विश्व पुस्तक मेला : कवियों की महफिल में छाया नागरिक्ता संसोधन कानून

  |    January 9th, 2020   |   0

 “सीएए का समर्थन, कवियों का गर्जन“ कार्यक्रम में 200 कवियों व साहित्यकारों ने नागरिकता संसोधन कानून का किया समर्थन

ई दिल्ली (संवाददाता)- विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान के हॉल नम्बर आठ के सेमिनार हॉल में नागरिकता संसोधन कानून के समर्थन में कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसका विषय “सीएए का समर्थन, कवियों का गर्जन“ रहा जिसमें करीब 200 कवियों व साहित्यकारों ने नागरिकता संसोधन कानून का समर्थन किया।

इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद की दिल्ली इकाई इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के यमुना विहार विभाग द्वारा किया गया। विभाग के अध्यक्ष व कवि भुवनेश सिंघल ने कार्यक्रम का संयोजन किया व मंच का संचालन भी किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने दीप प्रज्ज्वलन करके किया। मुख्य अतिथि के रूप में सेवा इंटरनेशनल के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम परांडे रहे व मुख्य वक्ता पूर्व मंत्री दिल्ली सरकार कपिल मिश्रा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वैवेसो के डिप्टी चेयरमैन नवीन तायल, विश्व विख्यात नृत्यांगना नलिनी-कमलनी, उत्तराखण्ड की लोक गायिका सोनिया सिंह रावत, पूर्व महापौर मीनाक्षी शिवम, डॉ. यू. के. चौधरी, सुभाष जिंदल, परिषद के प्रवीण आर्य व मुन्ना लाल जैन आदि रहे।

मंचासीन अतिथियों ने नागरिकता संसोधन कानून के समर्थन में अपने विचार प्रकट किए व उसकी सार्थकता व आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला तथा कविताओं के माध्यम से भी अपनी बात रखी। अध्यक्षता गीतकार जय सिंह आर्य ने की। परिषद की ओर से सभी अतिथियों व कवियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल व सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस आयोजन में देशभर के लगभग 200 कवि व साहित्यकारों ने उपस्थित होकर नागरिकता संसोधन कानून का समर्थन किया।

वक्ताओं ने कहा कि इस देश के किसी भी भारतीय नागरिक को इस कानून से डरने की आवश्यकता नहीं है इससे किसी भी धर्म के भारतीय को परेशानी नहीं होने वाली है बल्कि इससे पाकिस्तान जैसे देशों में पीड़ित हिन्दुओं के लिए भारत में आने का मार्ग खुलेगा जिससे मानवता के आधार पर उनको यहां की नागरिकता देकर उनको निर्भय होकर जीने का अवसर प्रदान किया जाएगा।

वहीं भुवनेश सिंघल ने अपनी कविता में देश के गृहमंत्री अमित शाह के संसद में भारत के लिए जान दे देंगे वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि हम देश को विश्वास दिलाते हैं कि इस देश के लिए हर एक नौजवान अपना सर्वस्व समर्पण कर सकता है। उन्होने अपनी कविता में कहा कि ‘शहीदों की कतारों में अपना नाम लिख दूंगा, करूंगा काम कुछ ऐसा अगल अंजाम लिख दूंगा, भले ही डोर सांसो की कटे कट जाए गम कैसा, मगर आकाश के हृदय पे हिंदुस्तान लिख दूंगा’’।

वहीं दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भुवनेश सिंघल द्वारा आयोजित कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि नागरिकता संसोधन कानून पर बुद्धिजीवि समाज के साहित्यकारों का समर्थन मिलना भारत सरकार द्वारा भारत के हित में निर्णय लेने की सोच को बल प्रदान करेगा। वहीं सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि जब तथा कथित बुद्धिजीवी देश को तोड़ने की बात करते दिखाई देते हों तब यह आवश्यक हो जाता है कि देश का साहित्यकार सही निर्णय के समर्थन में उठ खड़ा हो, ऐसा बड़ा कार्य आज यहां किया गया है जो देश को सही दिशा देगा।

श्याम पाराण्डे ने कहा कि मैं भुवनेश सिंघल को साधुवाद देता हूं कि उन्होनें अपने साहित्यकार होने का दायित्व निभाया है। मैं आश्वस्त हूं कि देश का साहित्य भुवनेश सिंघल जैसे युवाओं के हाथों में सुरक्षित है। इस अवसर मुख्य रूप से उपस्थित कवियों-साहित्यकारों व बुद्विजीवियों में सुधीर वत्स, मनोज शर्मा, जी.पी.शर्मा, सतीश वर्धन, अंजना अंजुम, सुनीता बुग्गा, समोद सिंह चरौरा, रामश्याम हसीन, राजीव पाण्डेय, रसिक गुप्ता, बलजीत कौर, भूपेन्द्र जैन, नितिन शर्मा, यशदीप कौशिक, वैभव सिंघल, विपिन कुमार, अमर झा, रजनी अवनी, राम श्याम हसीन, आचार्य रामदत्त मिश्र अनमोल, राजकुमार मीणा, शिवम प्रधान, द्वारिका आनन्द व अतुल सिंघल  आदि उपस्थित थे।