पुस्तक मेले में उमड़ी पुस्तक प्रेमियों की भीड़ , रोमांचक बना रविवार

  |    January 7th, 2019   |   0

पुस्तक मेले में रविवार को पहुंचे 80 हजार से अधिक पुस्तक प्रेमी 

नई दिल्ली (संवाददाता)- विश्व पुस्तक मेले के दूसरे दिन रविवार को छुट्टी के दिन मेले में पुस्तक प्रमियों की भारी भीड़ उमड़ी। दिल्ली की इस ठिठुरती सर्दी में भी पुस्तक मेले में लोगों की भारी भीड़ देखकर प्रसन्नता होती है कि आज भी लागों में पुस्तकों के प्रति उत्साह है। प्रगति मैदान में हर तरफ 80,000 से भी अधिक सभी आयुवर्गों के पाठक अपनी पसंदीदा पुस्तकें खरीदते और यहाँ आयोजित हो रही विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेते नज़र आए।रविवार सुबह से ही बारिश और तेज़ ठंड के बावजूद मेला शुरू होने से पहले साढ़े दस बजे से ही प्रगति मैदान में पुस्तक प्रेमियों का आना शुरू हो गया था और दोपहर होते-होते मौसम को मात देकर लगभग सभी हाॅलों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं। स्टाॅलों पर जुटी भीड़ देखकर प्रकाशकों के चेहरे भी खिल उठे।

पुस्तक मेले में बी-2बी गतिविधियों के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा फिक्की के सहयोग से सीईओ स्पीक – एक प्रकाशन मंच का आयोजन किया गया। एमिरेट्स पब्लिशर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, श्री अली अल शाही द्वारा ‘अमीरात प्रकाशन बाज़ार‘ विषय पर प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष, डाॅ. बल्देव भाई शर्मा, शारजाह पुस्तक प्राधिकरण के अध्यक्ष, श्री अहमद अल अमेरी; फिक्की के महासचिव और श्री दिलीप चिनाॅय ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

थीम मंडप –ध्यान रहे कि इस वर्ष नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले की थीम ‘दिव्यांगजनों की पठन आवश्यकताएँ‘ हैं। थीम प्रस्तुति मानव समाज के एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से, जिसे आमतौर पर दिव्यांग कहते हैं, के जीवन और संघर्षों, विफलताओं और सफलताओं, आनंद और नैराश्य आदि विविध पक्षों पर प्रकाश डालती है। थीम का उद्देश्य इस विशिष्ट समुदाय की आकांक्षाओं, साथ-ही-साथ, उनकी उपलब्धियों को, सामान्य लोगों के बीच उनके बारे में एक बेहतर समझ विकसित करने के विचार से, प्रस्तुत करना है। इस थीम को प्रदर्शित करने हेतु हॉल नं. 7 में एक विशिष्ट डिसेबल्ड फ्रेंडली मंडप का निर्माण किया गया है जहाँ व्हीलचेयर्स, हर तरफ स्टील रेलिंग तथा संकेत भाषा के दुभाषिए हैं, यहाँ ब्रेल पुस्तकों, स्पर्शनीय पुस्तकों, मूक पुस्तकों, ऑडियो पुस्तकों, समेकित मुद्रित ब्रेल पुस्तकों, विशेष आवश्यकता वाले दृष्टिबाधित या श्रवणबाधित बच्चों पर आधारित 500 पुस्तकों की विशेष प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र है।

ऑल इंडिया कॉनफेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड्स द्वारा ऑर्बिट रीडर, सिग्नेचर गाइड, टाइप सहित अर्थमेटिक फ्रेम, स्टाइल्स के साथ आईपी ब्रेल स्लेट, ज्योमेट्री किट, परकिंस ब्रेल आदि सामग्री की प्रदर्शनी इस थीम मंडप की अन्य विशेषता है। इस मंडप में ‘फैमिली ऑफ डिएबल्ड द्वारा पेंटिंग, मूर्तियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। ‘माइक्रोसॉफ्ट‘ द्वारा डिजिटल अभिगम्यता उपकरण पर मंडप के बीच में विशेष रूप से निर्मित अवलोकन बूथ बनाया गया है। इस बूथ पर जाकर पाठक ‘माइक्रोसॉफ्ट‘ द्वारा निर्मित दिव्यांगजनों के लिए डिजिटल साधनों के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते है। इस विशेष अवलोकन बूथ पर आकर पता चलता है कि प्रौद्योगिकी ने दिव्यांगजनों हेतु लेखन एवं पठन को कितना आसान बना दिया है।

आज थीम मंडप पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत तथा इनसाइड मी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में दृष्टिबाधित बच्चों द्वारा चित्रकारी का हुनर प्रदर्शित किया गया। ‘इनसाइड मी की निदेशक-सह-आर्ट थेरापिस्ट शिवानी भारद्वाज के निर्देशन में कार्यक्रम में बच्चों ने क्रेयॉन्स और विशेष उपकरण की मदद से कागज़ पर चित्र उकेरने के कौशल का प्रदर्शन किया।

एक अन्य कार्यक्रम में, पिंगलवाड़ा संस्था के दिव्यांग बच्चों द्वारा नृत्य एवं गायन प्रस्तुत किया गया। इन दिव्यांग बच्चों के नृत्य एवं गायन कौशल को देखकर दर्शक अचंभित हो गए। प्रतिदिन की भांति, यहाँ ‘वी केअर‘ द्वारा फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कनाडा के रेस्टिक मकुशाक द्वारा निर्देशित फिल्म ‘पैरा नॉर्मल‘ में तीन वयस्क दिव्यांगों के जीवन को दर्शाया गया है जो तमाम चुनौतियों के बावजूद हर दिन कुछ नया सीखने का जज़्बा रखते हैं।

बाल मंडप के शानदार नजारे – मेले में बच्चों के लिए बने रोमांचक बाल मंडप पर अनेक गतिविधियाँ एवं कार्यक्रम आयोजित किये गए जिनमें बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आज यहाँ राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा रचनात्मक लेखन कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें बाल साहित्यकारों जैसे देवेंद्र मेवाड़ी तथा मंजरी शुक्ला ने बच्चों को कहानी लेखन के तरीकों से अवगत करवाया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं से रोचक कहानियाँ बनाईं। इसी मंच पर आज प्रसिद्ध कहानी वाचक, जयश्री सेठी द्वारा बच्चों के ही अंदाज़ में कहानियाँ सुनाई गईं जिसका बच्चों ने भरपूर आनंद उठाया। यहाँ जागो टीन्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नन्हें-मुन्ने दिव्यांग बच्चों ने डिजिटल खेल खेले। 

महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में बच्चों के लिए एक कहानी-सत्र का आयोजन किया गया जहाँ डॉ. वेद मित्रा ने अपनी कहानियों के माध्यम से बच्चों को गांधी जी के जीवन तथा शांति और अहिंसा के सिद्धांतों के बारे में बताया।

साहित्यिक कार्यक्रम –

लेखक मंच पर वाणी प्रकाशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गीतकार व पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर ने अपनी पुस्तक ‘मेरी फितरत है मस्ताना‘ पर चर्चा की। इसी मंच पर कविता कोश के तत्वावधान में ‘उत्तर भारतीय भाषा, बोली और साहित्य‘ विषय पर आधारित परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें अंगिका, अवधी, बज्जिका, मैथिली, मगही, ब्रज और भोजपुरी भाषाओं का प्रतिनिधित्व क्रमशः प्रसून लतांत, अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, हरि नारायण सिंह हरि, कैलाश मिश्र, संजीव कुमार मुकेश, श्रुति पुरी और विनय भूषण जी ने किया। कार्यक्रम का संचालन रश्मि भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विभिन्न भाषाओं के साहित्य और इन भाषाओं के बीच आपसी सम्बंध के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।

इंटरनेशनल इवेंट कॉर्नर शारजाह पवेलियन

शारजाह पवेलियन में अरब चिल्ड्रेन बुक पब्लिशर्स फोरम की ओर से महामहिम शेख डॉ सुल्तान बिन मोहम्मद अल कासिमी के जीवन पर आधारित एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में यूएई की सुप्रसिद्ध लेखिका सालेहा गाबिस ने बच्चों को सुल्तान बिन मोहम्मद अल कासिमी के बचपन के तमाम किस्से साझा किए। सुल्तान बनने से पहले वह किस तरह किताबों व पठन-पाठन की दुनिया से जुड़े इसकी जानकारी बच्चों को दी।