शिक्षण संस्थानों में जन्मी नई संस्कृति, वर्क फ्रॉम होम : प्रो.सुमन

  |    April 27th, 2020   |   0

अध्यापक इंटरनेट तकनीक से घर बैठे ही अपने छात्रों को दे सकते हैं ज्ञान

नई दिल्ली (संवाददाता)-कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान यूनिवर्सिटी/कॉलेजों/शिक्षण संस्थानों में एक नई संस्कृति ‘वर्क फ्रॉम होम कल्चर ‘ने जन्म लिया है।इस कल्चर के माध्यम से पाठ्यक्रम में निर्धारित अध्यायों को सीखने में आसानी भी हुई है।सूचना क्रांति के इस युग में डिजिटल दुनिया में मनुष्य मशीनी बनकर रह गया है।उसका मन मस्तिष्क संचार माध्यमों का उपयोग अपनी शिक्षा, पठन पाठन में करने लगा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अरबिंदो कॉलेज में हिंदी के शिक्षक व नॉन कॉलेजिएट सेंटर प्रभारी प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण विश्व को झकझोर कर रख दिया है, इसने पारिवारिक जीवन में जहां संयुक्त परिवार है उनमें भय और आतंक का माहौल पैदा कर दिया है लेकिन वहीं दूसरी तरफ कोरोना ने मनुष्य को एक नए ढंग से जीवन जीने का मार्ग भी दिखाया है। मनुष्य की अपनी जीवनशैली में आमूल चूल परिवर्तन हुआ है। वहीं उसने सरकार के आदेश का पालन करते हुए कि लॉक डाउन में घर से बाहर नहीं निकलना है।घर में रहते हुए मास्क लगाना, बार-बार हाथ धोना, सेनिटाइजर का प्रयोग करना आदि।इतना ही नहीं बल्कि घर में रहकर कॉलेज के छात्रों की शिक्षा संबंधी कार्यो का निपटान करना होगा।

प्रोफेसर सुमन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि कोरोना महामारी के चलते लॉक डाउन की वजह से जहां पहले ऑफिस और बड़ी-बड़ी कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम संस्कृति कार्य कर रही थीं।इस महामारी के चलते उसने अपने पैर कॉलेज, विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों में भी फैला लिए है।संकट की इस घड़ी में अब शिक्षकों को कॉलेज में अपनी कक्षा लेने के लिए कक्षा में उपस्थित होना नहीं पड़ेगा बल्कि अपने घर के वातावरण को कॉलेज की कक्षा में तब्दील कर सकेंगे।उन्होंने बताया है कि लॉक डाउन के दौरान छात्रों को ऑन लाइन पढ़ाने ,ग्रुप डिस्कशन ,असाइनमेंट व परीक्षा जैसे कार्यो को अंजाम देने के तरीकों को बता दिया गया है साथ ही सेमेस्टर के दौरान होने वाले असाइनमेंट, परीक्षा संबंधी जानकारी, होम वर्क, उनके अध्ययन के पश्चात परीक्षा आदि के तरीके भी बता दिए गए हैं।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि इन कठिन परिस्थितियों में शिक्षक अपने छात्रों के साथ संवाद तभी कर पाएगा जब उनके पास स्मार्टफोन, इंटरनेट, लेपटॉप ,वाईफाई, माइक्रोसॉफ्ट मिट, जूम, वाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, ईमेलआदि की सुविधाएं उपलब्ध है।जिन छात्रों के पास यह सुविधाएं है ऐसे छात्र बिना कॉलेज, शिक्षण संस्थान गए छात्रों की उपस्थिति व उनकी रुचि ग्रहण करने, उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर परिणाम आ रहे हैं।उनका कहना है कि यदि कुछ समय और कॉलेज नहीं खुलते हैं तो इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है इससे खर्च भी कम आता है और परिणाम बेहतर।

ऑडियो-वीडियो ज्यादा कारगर साबित–प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि वर्क फ्रॉम होम कल्चर के दौरान कुछ शिक्षकों ने अपने लेक्चर को ऑडियो-वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड कर दिया।यूट्यूब के साथ उन्होंने उसका लिंक शेयर कर दिया है जिससे विद्यार्थियों को वाट्सएप या अन्य माध्यम से समय के अनुसार वीडियो देख सकते हैं, अकेले भी देख सकते हैं, पढ़ सकते हैं। ऑन लाइन क्लासेज में ज्यादा छात्रों के बीच सही से देख नहीं सकते इसलिए दो-तीन दिनों के बाद वीडियो को देखे।यह ऐसा ही है जैसे किसी लाइब्रेरी में रखी कोई पुस्तक आप पढ़ रहे हैं।उन्होंने बताया है कि इस तरह की शिक्षा यूरोपियन कंट्री में दी जा रही है वहां स्टूडेंट्स ऑडियो, वीडियो के माध्यम से पढ़ाई करते हैं, दूसरे छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है।कोई भी सुनकर इसका फायदा उठा सकते हैं।

उन्होंने बताया है कि वर्क फ्रॉम होम कल्चर की सुविधाएं जब तक शिक्षकों के पास ये सुविधाएं नहीं है और वह स्वयं इसके लिए तैयार नहीं है तो उसे पहले सुविधाओं से लैस होना पड़ेगा तभी वह अपने छात्रों को सुविधाएं दे सकेगा।शिक्षक को हर समय अपडेट रखने व इंटरनेट पर फोन के माध्यम से जुड़े रहने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि वर्क फ्रॉम होम कल्चर को समस्या की तरह नहीं बल्कि अवसर के तौर पर लेना चाहिए।अपने घर में रहकर, घर का कार्य करते हुए समय निकालकर छात्रों को समय दे सकते हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को लागू करते समय परिवार के सदस्यों का साथ बहुत ही जरूरी है, वे हर तरह से मेरे कार्यों में हाथ बटाते हैं, इसका परिवार में लाभ भी हुआ है।सबसे बड़ी बात यह है कि परिवार में अलग तरह वातावरण तैयार हुआ है और एक अलग तरह की मानवीयता का जन्म हुआ है, बच्चों के साथ बैठकर कार्य करने, उनसे सीखने में मदद मिली है।

प्रोफेसर सुमन ने लॉक डाउन में वर्क फ्रॉम होम कल्चर का फायदा बताते हुए कहा है कि इससे परिवहन का खर्च, समय की बचत, पर्यावरण आदि की बचत के साथ-साथ मुसीबत की घड़ी में एक हथियार है जो सीखने, सिखाने में मदद करता है। उनका कहना है कि लॉक डाउन में उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। नॉन कॉलेजिएट के श्री अरबिंदो कॉलेज सेंटर प्रभारी होने के नाते कॉलेज व सेंटर का सारा कार्य निपटाने की चिंता सता रही थी शिक्षकों व छात्राओं के फोन आने शुरू हो गए नई तकनीक ने बहुत कुछ सीखा दिया।ऑन लाइन क्लासेज, पठन पाठन सामग्री,उसके पढ़ने पढ़ाने का तरीका आदि।इस कल्चर से छात्राओं और शिक्षकों को भी राहत मिली है जो फोन आते हैं तो उसका समाधान हो जाता है।

कैसे आसान बनाए- वर्क फ्रॉम होम कल्चर ने लॉक डाउन के समय एक नई संस्कृति को जन्म दिया है जो वर्तमान समय की मांग है।इस नई तकनीक को हर शिक्षक व विद्यार्थियों को जानना जरूरी है हालांकि भारत में अभी इन आधारभूत संरचनाओं की भारी कमी है, हर छात्र के पास यह सुविधा हो जरूरी नहीं।कोरोना के बहाने से आई यह तकनीकी केंद्रित शिक्षा की अनिवार्यता एक नया मार्ग खोल रही है जो भविष्य में छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।