पर्यावरण और जड़ी-बुटी के बारे में आदिवासी समुदायों से सीखना चाहिए : डॉ. राजाराम त्रिपाठी

  |    June 2nd, 2018   |   0

वर्धा(समाचार डेस्क)- पर्यावरण हमारे जीवन को बचाने में मददगार है। पर्यावरण ही हीरा और मोती है, वह सबसे बड़ी सम्‍पत्‍ती है। उक्‍त आशय के विचार जाने-माने पर्यावरणविद तथा बस्‍तर में पर्यावरण तथा हर्बल औषधियों के संरक्षण में आदिवासी समुदायों के बीच काम करने वाले डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने व्‍यक्‍त किये। महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में 31 मई को पर्यावरण सप्‍ताह का उदघाटन श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी भवन के सभागार में उनके वक्‍तव्‍य से किया गया।

 उन्होंने बताय कि हम पर्यावरण के प्रति सजग नहीं है और इसलिए पृथ्‍वी को जीवन को रहने के अयोग्‍य बना रहे है। स्थिति भयावह है। हमारा पानी और मिट्टी प्रदूषित है। जंगलों की कटाई और सिमेंट के जंगलों में वृद्धि की वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्‍होंने अपने अनुभव से बताया कि हमें आदिवासी समुदायों से पर्यावरण और जड़ी-बुटी के बारे में सीखना चाहिए। अनेक प्रकार के रोगों को ठीक करने का ज्ञान उनके पास है। कीटनाशक के उपयोग से पर्यावरण और जल प्रदूषित हो रहा है, यह प्रकृति के साथ अन्‍याय है। उन्‍होंने कहा कि हमें भौतिकता और साधनों की दौड़ में संतुलन ढूंढना होगा और प्रकृति के साथ तादात्‍म्‍य बिठाना होगा।

डॉ. राजाराम त्रिपाठी पर्यावरण और आयुर्वेद के जानकार है। उन्‍होंने इन विषयों पर पुस्तकें लिखी हैं। वें बस्‍तर में 26 एकड़ जमीन पर औषधी की खेती करते है जिससे चार सौ से अधिक स्‍थानीय किसान जुड़े हुए हैं। वें पर्यावरण जागरूकता के लिए ककसाड़ नामक पत्रिका भी प्रकाशित करते हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में उनके कार्यों को लेकर बनी फिल्‍म ‘खेती का सिकंदर’ दिखायी गयी। इस दौरान उनकी पत्‍नी और पुत्री भी मौजूद रही।

विश्‍वविद्यालय में पाच जून को विश्‍व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्‍य में पर्यावरण सप्‍ताह का आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्‍वच्‍छता एवं प्‍लास्टिक मुक्ति अभियान, वृक्षारोपण, पर्यावरण पर पोस्‍टर एवं चित्रकला स्‍पर्धा, अरण्‍यऋषी मारुति चितमपल्‍ली जी के साथ वार्तालाप, पर्यावरण पर  फिल्‍म का प्रदर्शन आदि उपक्रम शामिल हैं। पर्यावरण क्‍लब, राष्‍ट्रीय सेवा योजना एवं जनसंपर्क कार्यालय की ओर से उक्‍त आयोजन किया जा रहा है।

उदघाटन कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र ने की। उन्‍होंने कहा कि दिल्‍ली में धूंध और घना कोहरा यह खतरे की घंटी है। हम प्रकृति को नष्‍ट कर जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पर्यावरण की रक्षा जीवन तथा अस्त्‍िात्‍व की रक्षा है। उन्‍होंने डॉ. राजाराम त्रिपाठी का पौधा देकर स्‍वागत किया तथा उनके कार्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में स्‍वागत वक्‍तव्‍य प्रतिकुलपति प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने दिया। संचालन राष्‍ट्रीय सेवा योजना के संयोजक राजेश लेहकपुरे ने किया तथा आभार जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने माना। इस अवसर पर डॉ. शिरीष पाल सिंह, राकेश मंजुल, डॉ. संजय तिवारी सहित अध्‍यापक बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।