परंपराओं के बीच समन्‍वय के कवि हैं तुलसीदास : प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

  |    August 9th, 2019   |   0

हिंदी विश्‍वविद्यालय में गोस्‍वामी तुलसीदास पर दो दिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी सम्पन्न

वर्धा(संवाददाता)-गोस्‍वामी तुलसीदास परंपराओं के बीच समन्‍वय के कवि है। राम के प्रति उनकी भक्ति वैयक्तिक आनंद की भक्ति नहीं है। तुलसी के राम पूरी परंपरा में विशिष्‍ट है। तुलसी से महात्‍मा गांधी तक राम का स्‍वरूप करुणा का है। वे भारत की श्रेष्‍ठता के संपूर्ण कवि है। उक्‍त विचार महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने व्‍यक्‍त किए।

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में गोस्‍वामी तुलसीदास की जयंती के उपलक्ष्‍य में 7 एवं 8 अगस्‍त को ‘वर्तमान समय की चुनौतियां और गोस्‍वामी तुलसीदास’ विषय पर दो दिवसीय राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का समापन गुरुवार को गालिब सभागार में विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल की अध्‍यक्षता में किया गया। हिंदी शिक्षण अधिगम केंद्र के तत्‍वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर मुंबई विश्‍वविद्यालय, हिंदी विभाग के पूर्व अध्‍यक्ष प्रो. रामजी तिवारी, कार्यकारी कुलसचिव प्रो. कृष्‍ण कुमार सिंह, प्रो. अखिलेश दुबे, डॉ. उमेश कुमार सिंह, जंग बहादुर पाण्‍डे, संगोष्‍ठी संयोजक प्रो. अवधेश कुमार, डॉ. यशवंत सिंह रघुवंशी मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने किया तथा धन्‍यवाद ज्ञापन प्रो. अवधेश कुमार ने प्रस्‍तुत किया।

इस अवसर पर प्रो. जंग बहादुर पाण्‍डे, डॉ. उमेश कुमार सिंह, प्रो. अखिलेश कुमार दुबे, प्रो. रामजी तिवारी आदि ने गोस्‍वामी तुलसीदास के समग्र जीवन पर विचार व्‍यक्‍त किये।

इस अवसर पर सभागार में साहित्‍य विद्यापीठ की अधिष्‍ठाता प्रो. प्रीति सागर, संस्‍कृति विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. नृपेंद्र प्रसाद मोदी, प्रो. विष्‍णु कांत शुक्‍ल, प्रो. एम. शेषारत्‍नम (हैदराबाद), प्रो. जंग बहादुर पाण्‍डे, डॉ. रचना शर्मा, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी, डॉ. सुप्रिया पाठक,  डॉ. मनोज कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. संजय तिवारी, अभिषेक सिंह आदि सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या उपस्थित थे।

साहित्‍य विद्यापीठ भवन अब हुआ तुलसी भवन – विश्‍वविद्यालय का साहित्‍य विद्यापीठ का भवन अब तुलसी भवन के रूप में जाना जाएगा। इसकी घोषणा कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल की ओर से प्रो. अवधेश कुमार ने की। उन्‍होंने कहा कि साहित्‍य विद्यापीठ के भव्‍य भवन को अभी तक कोई नाम नहीं दिया गया था।