शोध की गुणवत्ता और छात्रों को पाठ्यक्रमों में नई जानकारी दे शिक्षक

  |    January 24th, 2020   |   0

21दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर सीपीडीएचई ने प्रशिक्षुओं को प्रदान किए प्रमाण पत्र

नई दिल्ली (संवाददाता)- ओरियंटेशन प्रोग्राम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर आर. के. खंडाल थे। कार्यक्रम के अन्य विशिष्ट अतिथियों में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर तरुण कुमार दास, सीपीडीएचई की निदेशक प्रोफेसर गीता सिंह, वरिष्ठ पत्रकार डा. जयवीर सिंह, दीन दयाल उपाध्याय काॅलेज के प्राचार्य डा.हेमचन्द्र जैन आदि थे।

अभिविन्यास कार्यक्रम के संयोजक डॉ. के.पी. सिंह और डॉ. सचिन वशिष्ठ ने बताया है कि 3 जनवरी से शिक्षकों और शिक्षण में सुधार के लक्ष्य को लेकर चलने वाले ओरियंटेशन कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों से 44 शिक्षकों ने इसमें भाग लिया। उनके अनुसार प्रशिक्षण के दौरान अपने विषय के विशेषज्ञों को बुलाकर विभिन्न विषयों जैसे–मीडिया, कॉपीराइट, प्लेगरिजम, पर्यावरण, कृषि, नई शिक्षा नीति, कम्प्यूटर पर शिक्षा, कैरियर काउंसलिंग, हिंदी पत्रकारिता, इतिहास, दर्शन शास्त्र, राजनीति विज्ञान, यूजीसी रेगुलेशन, नियुक्ति और पदोन्नति आदि 100 से अधिक रीसोर्स पर्सन को बुलाया गया था।

कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर रमेश कुमार खंडाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, देश का संपूर्ण विकास वहां के नागरिकों की सोच पर निर्भर करता है। उन्होंने भारतीय प्राचीन संस्कृति के अनुसार जीवन शैली और सोच अपनाने की सलाह दी।उन्होंने आगे कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वह ऐसी शिक्षा और रोजगार चाहती है जो कम समय में उसे मिले।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर तरुण कुमार दास ने प्रतिभागियों को अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय गणितज्ञों की देन से अवगत कराया। उन्होंने कहा जैसी हमारी दृष्टि रहेगी वैसी ही देश और समाज के विकास की दिशा होगी। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण हमारी दृष्टि है। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यो से अवगत कराया और कहा कि हम उच्च शिक्षा में किसी से पीछे नहीं है। उन्होंने कहा कि जो विचार आप यहां से लेकर जा रहे हैं उसे अपने विद्यार्थियों में संचार करे तभी वास्तविक शिक्षा का अर्थ होगा उन्हें ज्ञान देना।

प्रतिभागियों की तरफ से प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘ ने 21दिवसीय कार्यक्रम की समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।प्रो. सुमन ने उच्च शिक्षा पर हो रहे हमले से अवगत कराते हुए कहा कि आज शिक्षा को निजीकरण के हाथों में दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सीपीड़ीएचई को ऐसी कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए जो छात्रोंपयोगी हो उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ती हो।उन्होंने मंच से मांग की है कि हर महीने कार्यशाला के माध्यम से शोध में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए जोर दिया जाए और शिक्षकों, छात्रों को अवगत कराएं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर तरुण कुमार दास ने प्रतिभागियों को अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय गणितज्ञों की देन से अवगत कराया। उन्होंने कहा जैसी हमारी दृष्टि रहेगी वैसी ही देश और समाज के विकास की दिशा होगी। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण हमारी दृष्टि है।उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यो से अवगत कराया और कहा कि हम उच्च शिक्षा में किसी से पीछे नहीं है।उन्होंने कहा कि जो विचार आप यहां से लेकर जा रहे हैं उसे अपने विद्यार्थियों में संचार करे तभी वास्तविक शिक्षा का अर्थ होगा उन्हें ज्ञान देना।

प्रतिभागियों की तरफ से प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘ ने 21दिवसीय कार्यक्रम की समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की।प्रो. सुमन ने उच्च शिक्षा पर हो रहे हमले से अवगत कराते हुए कहा कि आज शिक्षा को निजीकरण के हाथों में दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सीपीड़ीएचई को ऐसी कार्यशाला आयोजित करनी चाहिए जो छात्रोंपयोगी हो उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ती हो।उन्होंने मंच से मांग की है कि हर महीने कार्यशाला के माध्यम से शोध में गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए जोर दिया जाए और शिक्षकों, छात्रों को अवगत कराएं।

अभिविन्यास कार्यक्रम में संस्थान की निदेशक प्रो. गीता सिंह ने सभी प्रतिभागियों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस ज्ञान को यहां लिए है उसका विस्तार अपने छात्रों में जाकर विश्वविद्यालय/कॉलेजों में करे ताकि शिक्षा का सही अर्थ वे समझ सके। इस मौके पर शिक्षकों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।आसाम, हरियाणवी, केरल व नार्थ ईस्ट के शिक्षकों ने अपनी संस्कृति, लोकगीतों की छटा बिखेरी।अंत में डॉ. के.पी .सिंह ने धन्यवाद दिया।