सामान्य पुस्तक नहीं है वी.के. पाहुजा स्विमिंग स्टेटिस्टिकल बुलेटिन : शीला दीक्षित

  |    June 27th, 2018   |   0

शीला दीक्षित ने किया स्विमिंग स्टेटिस्टिकल बुलेटिन के 38वें संस्करण का लोकार्पण

नई दिल्ली (राजेश शर्मा)- देश-दुनिया में तैराकी के क्षेत्र में होने वाले नए व पुराने कीर्तिमनों को पुस्तक रूप में संजोकर समाज के समक्ष प्रस्तुत करना आसान काम नहीं है। लेकिन आज से 38वर्ष पूर्व स्व. वी.के पाहुजा ने इस सोच को मूर्तरूप दिया और अपनी प्रथम पुस्तक “स्विमिंग स्टेटिस्टिकल बुलेटिन” के रूप में लिखी, जो काफी लोकप्रिय हुई। वी.के. पाहुजा स्विमिंग स्टेटिस्टिकल बुलेटिन समान्य पुस्तक नहीं है, इसमें लेखन से पूर्व काफी शौधकार्य किया जाता है।
ये विचार दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित दावारा “स्विमिंग स्टेटिस्टिकल बुलेटिन” के 38वें संस्करण का लोकार्पण करते हुए कहे। श्रीमति दीक्षित ने अपने आवास पर इस पुस्तक का लोकार्पण किया। उन्होंने कहाकि वी.के पाहुजा खुद बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय तैराक थे, कोच भी रहे। उन्होंने कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कई मेडल जीत कर देश का नाम रौशन किया। आज हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
वहीं दूसरी और मैक्समूलर मार्ग स्थित इंडियन इंटरनोशनल सेंटर के कमला देवी कॉम्पलेक्स में आयोजित 38वें लोकार्पण समारोह के दौरान बतौर अतिथि उपस्थित हुई दिल्ली की पूर्व शिक्षा व खेल मंत्री डॉ. किरण वालिया ने कहाकि इस समय वी.के पाहुजा हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके सपनों को साकार करने में लगी उनकी बेटी डॉ. मीनाक्षी पाहुजा पूरी लगन से कार्य कर रही हैं। इनकी अथक मेहनत का ही परिणाम है कि आज भी हम इस पुस्तक को एक निश्चित समय में हमारे समक्ष पाते हैं। इसके लिए डॉ. मीनाक्षी पाहुजा की जितनी तारीफ की जाए वो कम है।
देश की विख्यात अतंर्राष्ट्रीय महिला तौराकों में शामिल डॉ. मीनाक्षी पाहुजा ने बताया कि यह पुस्तक उनके पापा का सपना है। क्योंकि इससे पहले तैराकी के लिए इस प्रकार की पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि यह वार्षिक पुस्तक है, इस में वर्ष भर के दौरान होने वाली दुनिया भर की तैराकी खेल प्रतिशपर्ध से जुङी तमाम जानकारियों को संजोया जाता, तैराकी के नए पुराने कीर्तिमानों को आंकङों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है ताकि हर किसी को आसानी से समझ में आसके। इस पुस्तक को आज तैराकी से जुङे देश-विदेश के कोच, खिलाङियों के अलावा खेल पत्रकारों और तैराकी खेलों में रूचि रखने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है। देश के अनेक खेल शिक्षण संस्थानों की लाईब्रेरी में यह पुस्तक आसानी से उपलब्ध है।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि प्रो. संतोष पांढा, सीता राम साहू के अलावा दिल्ली के सेवानिवृत खेल अधिकारी पी.डी दत्ता, अर्जुन अवार्डी भानू सचदेवा समते कई दिग्ज खिलाङी, कोच ने स्व. वी.के पाहुजा को याद करते हुए अपने अनुभव साझा किए। लोकार्पण समारोह के दौरान उभरते तैराकों के अलावा विभिन्न समाचार-पत्रों व चैनलों से जुङे खेल पत्रकार भी उपस्थि रहे।