गुरुद्वारा रकाबगंज में 1.5 मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा प्लांट शुरू

  |    June 21st, 2018   |   0
1800 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन रोकने में मिलेगी कामयाबी
नई दिल्ली (संवाददाता)- दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सूर्य की किरणों से बिजली उत्पादन की आज शुरूआत की गई। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के भाई लक्खी शाह वणजारा हाल में आयोजित समारोह के दौरान 1.5 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा प्लांट का उद्घाटन किया गया। केन्द्रीय नवीनीकृत ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री डा. हर्षवर्धन, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, वातावरण को संभालने के लिए कार्य करने वाले संत बलबीर सिंह सींचेवाल, बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब, बाबा बचन सिंह कारसेवा वाले, लोकसभा सदस्य प्रेम सिंह चंदूमाजरा, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग के सदस्य डा. जसपाल सिंह एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह ने इस अवसर पर हाजरी भरी।
संगतों को संबोधित करते हुए आर.के. सिंह, हर्षवर्धन, कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. एवं महासचिव मनजिन्दर सिंह सिरसा ने सिख सिद्धांतों एवं वातावरण संभाल के बीच के संबंधों को मानवता की सेवा के लिए इस्तेमाल करने का संदेश दिया। आर.के. सिंह ने सिख परम्पराओं की प्रशंसा करते हुए वातावरण में बढ़ रहे प्रदूषण के बारे विस्तार से जानकारी दी। आर.के. सिंह ने कहा कि दिल्ली सहित देश में 20 प्रदुषित शहर हैं। प्रदूषण को खत्म करने के लिए यूरोप की तरह हमें कार्य करना पड़ेगा। दिल्ली कमेटी ने 1.5 मेगावाट सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर काबिले तारीफ काम किया है। अब इसको देखकर बाकी धार्मिक संस्थायें प्रेरणा लेंगी।
आर.के. सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने 2022 तक 1 लाख 75 हजार मेगावाट प्राकृतिक स्रोत से उत्पादन करने का लक्ष्य रखा था पर 2018 में ही हम 1 लाख 80 हजार मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित करने में कामयाब हो गये हैं। इसलिए हमने 2022 का लक्ष्य 2 लाख 25 हजार मेगावाट कर दिया है। सिखों ने साफ तथा हरित ऊर्जा के उत्पादन में धार्मिक संस्थाओं में सबसे पहले पहल करके हर क्षेत्र में आगे रहने के सिख फलसफे को पुनः दोहराया है। वाहिगुरू की कृपा तथा कार्य करने की ललक के कारण हम अपने राष्ट्र को 24 घंटे बिजली आपूर्ति वाला राष्ट्र बनाने में कामयाब होंगे।
डा. हर्षवर्धन ने गुरू हरिराय साहिब के पर्यावरण प्रेम का जिक्र करते हुए बताया कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगभग 700 मानव आदतों/कार्यो में मामूली बदलाव के लिए गुरू हरिराय साहिब से प्रेरणा लेकर ‘‘ग्रीन गुड डीडस’’ नामक अभियान शुरू किया गया है। ताकि रोजमर्रा के जीवन में आदतों के बदलाव के जरिये वातावरण को संभालने का लक्ष्य पूरा किया जा सके। गुरू साहिब ने पेड़-पौधे, जीव-जंतु तथा जानवरों के लिए सुरक्षित वातावरण का माहौल निर्मित करने तथा हरियाली के निमार्ण के लिए भरपूर कार्य किया था। परन्तु आज पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण ने हमें फिर से गुरू सिद्धांतों की ओर मुड़ने को मजबूर किया है। हर्षवर्धन ने बताया कि इस मुहिम को अब संयुक्त राष्ट्र तथा ब्रिक्स जैसे संगठन अपनाने की तरफ चल पड़े हैं।
जी.के. ने गुरू साहिबानों के वातावरण प्रेम का हवाला देते हुए सौर ऊर्जा के बाद दिल्ली कमेटी द्वारा अब पानी की बर्बादी को रोकने, वर्षा के पानी के पुनः इस्तेमाल सहित थालीयों में बच जाते लंगर के हिस्से की बर्बादी को रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरू करने का ऐलान किया। जी.के. ने कहा कि दिल्ली सरकार सिर्फ 150 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर बड़े स्तर पर प्रचार किया था। जबकि हमने चुपचाप 1500 किलोवाट का प्लांट स्थापित किया है। जिससे लगभग 250 ट्रक भरने जैसे 1800 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन रोकने में कामयाबी प्राप्त होगी। उक्त कार्बन वातावरण पर कूप्रभाव डालता यदि उक्त बिजली सौर ऊर्जा की बजाये कोयले से बनाई गई होती। जी.के. ने गुरू साहिबानों द्वारा नदियों के तट पर रहकर सिख धर्म के प्रचार के स्थापित किये गये केन्द्रों का भी हवाला दिया। जी.के. ने महापुरूषों द्वारा वातावरण को बचाने के लिए किये जा रहे कार्यो की प्रशंसा की।
 सिरसा ने कहा  कि सिख धर्म सभी धर्मो का सत्कार करता है। सिखों ने हर प्राकृतिक आपदा के दौरान बढ़चढ कर कार्य किये हैं। गुरूओं ने 400 वर्ष पहले वातावरण की रक्षा के कार्यो की शुरूआत की थी। जिस सिद्धांत का पालन करते हुए अब दिल्ली कमेटी पर्यावरण को बचाने के लिए कार्य कर रही है। सिरसा ने साफ कहा कि सिख अहसान फरामोश नहीं हैं। इसलिए जिस वातावरण का इस्तेमाल हम अपनी सुविधा के लिए करते हैं उसको संभालने का कार्य भी अपने जिम्में लेते हैं। इस अवसर पर मेहमानों को कमेटी द्वारा पौधे तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।