श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती पर एसएस मिन्हास द्वारा लिखित पुस्तक विमोचित

  |    November 4th, 2019   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश उत्सव के उपलक्ष में गुरु नानक पब्लिक स्कूल राजौरी गार्डन के प्रधानाचार्य डॉ.एस.एस.मिन्हास ने गुरु नानक देव जी को समर्पित करते हुए “गुरु नानक शाह फकीर, हिंदू का गुरु मुसलमान का पीर” नामक पुस्तक की रचना कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

गुरु नानक देव जी से संबंधित इस पुस्तक का विमोचन गुरु तेग बहादुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रजौरी गार्डन के सभागार में मुख्य अतिथि आई.एफ.एस तथा नेशनल एग्रीकल्चरल कॉपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव कुमार चड्डा तथा विशेष अतिथि नवीन कुमार जग्गी (सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट), सरदार एच.एस.पुलका, गौरव गुप्ता, गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान सरदार हरमनजीत सिंह, मैनेजर एच.एस. सोडी, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एच.एस. भाटिया,स. विक्की मान,स्त्री अकाली दल के सदस्य,पत्नी जसबीर कौर मिन्हास, सुपुत्र एवं पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस मौके पर परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलन तथा ईश्वरीय बंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। डॉ एस एस मिन्हास ने इस पुस्तक में भाईचारा, सद्भावना, सच्चा स्नेह और ईश्वर की एक सत्ता होने के भाव को बडे़ सुंदर ढंग से दर्शाया है।

डॉ. मिन्हास ने अपने द्वारा की गई यात्राओं के आधार पर ,अपने कई वर्षों के समृद्ध अनुभवों और अनुसंधान के अतिरिक्त विभिन्न गुरुद्वारों में जा कर प्रमाणिकता प्राप्त करके उनको समझ करऔर विभिन्न संसाधनों से ऐतिहासिक तथ्यों को एकत्र करके बहुत सफलतापूर्वक श्री गुरु नानक देव जी के जीवन दर्शन को इस पुस्तक में प्रस्तुति किया है ।यह पुस्तक इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कैसे गुरु नानक देव जी ने दुनिया को घृणा, कट्टरता, झूठ और पाखंड से पीड़ित देखा। दुनिया अज्ञानता,छल, धूर्तता व पाप मे डूबी हुई थी। ईश्वरीय स्वरूप गुरु नानक देव जी ने .मानव जाति के लिए सत्य, स्वर्गीय प्रेम, शांति और आनंद रूपी मशाल को उठाया। उन्होंने अपने इस ईश्वरीय मिशन को हर जगह पहुँचाया और वे पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण की यात्राओं पर गए वहां उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध , चीनी, सूफियों , योगियों और सिद्धौं  के धार्मिक केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न धर्मों, जनजातियों, संस्कृतियों और जातियों के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने ज्यादातर यात्राएँ अपने मुस्लिम साथी, मर्दाना, एक संगीतज्ञ और एक हिंदू अनुयायी, भाई बाला जी के साथ पैदल यात्रा की।

सार्वभौमिक,विश्व बंधुत्व की सद्भावना से परिपूर्ण, श्रद्धालु सिख विद्वान और अनुकरणीय धर्मनिरपेक्ष डॉ. एस एस मिन्हास ने प्रथम सिख गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं, उनके “सरल जीवन और उच्च विचार” के सिद्धांतों को उजागर करके इस पुस्तक को 550 वीं जयंती पर प्रस्तुत करते हुए सच्ची श्रद्धांजलि दी है।  गुरु नानक शाह फ़कीर हिंदू का गुरु मुसलमान का पीर! शीर्षक से ओतप्रोत यह पुस्तक सभागार में सार्थक दृष्टव्य और प्रतिकार्थ हो रही थी,इस बात को सभागार में सभी जातियों के लोगों की उपस्थिति और उन लोगों का गुरु नानक देव जी के प्रति प्रेम प्रमाणित कर रहा था।

कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि ने डॉक्टर मिन्हास द्वारा रचित इस पुस्तक को सभी उम्र के लोगों के लिए प्रेरणादाई और उपयोगी बताते हुए कहा कि यह पुस्तक इतनी सरल,स्पष्ट और प्रेरणादायी है कि इसका अनुसरण कर  प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सफल और मूल्यवान बना सकता है।