कुश्ती में सफलता के बाद मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में किस्मत आजमाएंगी ऋतू फोगाट

  |    November 15th, 2019   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- शनिवार 16 नवंबर को वन चैंपियनशिप के “ऐज ऑफ़ ड्रैगन्स” प्रतिस्पर्धा में ऋतू का मुकाबला दक्षिण कोरिया के नाम ही किम से होना है। ऋतू समेत इसमें भाग लेने वाले सारे प्रतियोगी चीन कि राजधानी बीजिंग में पहुँच चुके हैं। आज वहाँ मिडिया और प्रशंगशाकों के सामने ऋतू अपने प्रतिद्वन्दी से पहली बार रूबरू हुईं तो पूरा कमरा तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

पेशेवर एम् एम् ए में अपने प्रथम मुकाबले से पहले 25 वर्षीय ऋतू  फोगाट साफ कर दिया की इस खेल में आने का उनका एक ही मकसद है, “में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में विश्व चैंपियन बनना चाहती हूँ। अभी में जो भी कर रही हूँ वह मुझे उसी दिशा में लेके जा रही है।
“मैंने इस नए खेल में अपना पूरा दिल लगा दिया है। मैं एम् एम् ए में वर्ल्ड टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने के लिए लड़ूंगी। इस खेल में मैं अपने देश की प्रतिनिधित्व कर रही हूँ। यह मेरे लिए एक गर्व की बात है।”
ऋतू ने पहले भी भारत के लिए कुश्ती में काफी सारे सम्मान अर्जित किये। राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्णपदक जीता, विश्व अंडर-23 कुश्ती में रौप्यपदक और एशियाई कुश्ती में ताम्रपदक हासिल किया। वह कई बार भारतीय कुश्ती प्रतियोगिता में चैंपियन रह चुकी हैं।

ऋतू भारतीय खेल में प्रसिद्ध फोगाट परिवार आती हैं जिनकी कहानी बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म “दंगल” में दर्शायी गयी थी। उनके पिता महावीर सिंह फोगाट एक जाने  माने पहलवान और कुश्ती के प्रशिक्षक हैं, और उनकी बहनें गीता, बबिता और संगीता कुश्ती में चैंपियन रह चुकी हैं।
ऋतू अपने परिवार की पहली ऐसी सदस्या हैं जो एक खेल में महारथ हासिल करके दूसरे में कूद पड़ी हैं।
“मैं भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के लिए विश्व स्तर पर सफलता पाना चाहती हूँ। दुनिया के सामने अपने देश की संस्कृति और इतिहास का सम्मान करना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है,” ऋतू ने कहा। “लेकिन सबसे पहले मुझे शनिवार को जीत हासिल करना होगा। मैंने उस बाउट के लिए बहुत अच्छी तैयारी की है। पर यह मेरी पहली लड़ाई है, इससे मुझे पता चलेगा की आगे क्या करना है।”

सिंगापुर के ‘इवॉल्व एम् एम् ए’ में ऋतू के बॉक्सिंग कोच हैं पूर्व विश्व चैंपियन ड्राईयान फ्रांसिस्को और जू-जुत्सु प्रशिक्षक हैं विश्व चैंपियन तेको शिंज़ातो। दोनों का मानना है की ऋतू ने पिछले महीनों में फाइटर के तौर पर काफी उन्नती की है।

फ्रांसिस्को कहते हैं, “जब ऋतू ने पहली बार सिंगापुर में ट्रेनिंग की तो उन्हें स्ट्राइकिंग का कोई जानकारी नहीं था। पर अब वह मुक्का, लाथ और कुश्ती का सम्मिलित प्रयोग करना सिख गयी हैं। ऋतू मेहनती हैं और नयी चीज़ें जल्दी सिख लेती हैं।

शिंज़ातो जो सिंगापुर की जु-जुत्सु टीम के भी कोच हैं यह मानते हैं की ऋतू का ‘ग्राउंड गेम’ काफी उन्नति कर चूका है, “वह कुश्तीगीर हैं इस लिए टेकडाउन बहुत अच्छी कर लेती हैं। मैं उसको आधार बनाकर ऋतू को एक ऑल-राउंडर फाइटर में ढालने की कोशिश कर रहा हूँ।”

ऋतू के पहले मुकाबले के अब बस दो ही दिन बचे हैं। उनका कहना है की अपना पूरा ध्यान वह इस फाइट को जीतने में लगा रही हैं, “मुझे कोई जल्दबाज़ी नहीं है। में यंग हूँ, स्ट्रॉन्ग हूँ और हंग्री भी। पहले के कुछ फाइट मुझे इस खेल में अपने पैर ज़माने में मदत करेंगे। उसके बाद मैं आ रही हूँ वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए। मेरा वादा है की देश के लिए कुछ बड़ा करके दिखाउंगी। मैं अपने पिताजी और परिवार को गर्वित करना चाहती हूँ।”