राम बहादुर राय को मिला 22वां पत्रकार भीमसेन विद्यालंकार स्मृति सम्मान

  |    August 7th, 2019   |   0

नई दिल्ली(संवाददाता)- हिंदी भवन, द्वारा अपने सभागार में आयोजित ‘हिंदी रत्न सम्मान’ समारोह में इतने अधिक लोगों की भीड़ देखी गई जितनी सामान्यतः किसी अत्यंत लोकप्रिय नेता या अभिनेता के आने पर होती है। वहाँ उपस्थित अधिकांश लोगों का यह कहना था कि हिंदी के समारोह में उन्होंने ऐसी भीड़ अब तक कहीं नहीं देखी है।

हिंदी भवन द्वारा एक अगस्त को राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जयंती पर उनके अनुयायी तथा प्रसिद्ध पत्रकार भीमसेन विद्यालंकार की स्मृति में दिया गया। यह 22वां हिंदी रत्न सम्मान इस वर्ष अपने निष्पक्ष तथा निर्भीक लेखन के लिए विख्यात हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के निदेशक मंडल के सदस्य तथा इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय को दिया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए राम बहादुर राय ने कहा कि संविधान में भारत सरकार की राजभाषा ‘हिंदी’ को बनाया गया अतः उच्च शिक्षा, ज्ञान, राज्य और बाजार की पहली भाषा के सिंहासन पर जहां हिंदी होनी चाहिए, अन्य भारतीय भाषाएं होनी चाहिए वहां आराम से अंग्रेजी बैठ गई है । आज जरूरत है कि भाषाई चिंतन का पूरा परिपेक्ष्य बदले।

श्री राय ने बताया कि एक अध्ययन से बहुत सनसनीखेज तथ्य यह निकला है कि यूरोपीय संघ के गैर ब्रिटिश सदस्य हर साल अंग्रेजी भाषा की प्रभुत्वशाली स्थिति के कारण  ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पच्चीस अरब यूरो का भुगतान कर रहे हैं। इस अध्ययन के बाद यूरोपीय विद्वान एक समतामूलक भाषा प्रणाली अपनाने का अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो बात यूरोप को चिंता में डुबो रही है वह भारत पर भी पूरी तरह से लागू होती है। यूरोप में यह समस्या नई है परंतु भारत में  पुरानी है।

श्री राय ने कहा कि अंग्रेजी एक तटस्थ भाषा नहीं है बल्कि ब्रिटिश कौसिंल तथा अमेरिका सूचना सेवा के जरिए ब्रिटेन और अमेरिका की सांस्कृतिक नीति का एक औजार है और एक बेचा जाने वाला ब्रांड है।

उन्होंने कहा कि एक भाषा दार्शनिक के शब्दों में हिन्दी और भारतीय भाषाओं की हालत ‘फटी हुई जीभ की दास्तान है’ जो अपना दुख स्वयं कह भी नहीं सकती।

श्री राय ने कहा कि सत्ता में आज हिंदी और भारतीय भाषाओं के पक्षधर लोग हैं जिससे उन्हें उम्मीद जगी है कि स्थिति बदलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त के लिए सुझाव मांगे है। उनका सुझाव है कि प्रधानमंत्री जी 15 अगस्त को लाल किले से यह घोषणा करें कि वे हिंदी और भारतीय भाषाओं को उनका खोया सम्मान लौटाएंगे। उपस्थित भारी भीड़ ने बहुत देर तक तालियां बजाकर श्री राय के इस सुझाव का समर्थन किया।

श्री राय को हिंदी रत्न सम्मान हिंदी भवन के अध्यक्ष टी.एन. चतुर्वेदी, हिंदी भवन के मंत्री, डा. गोविन्द व्यास तथा श्री हिन्दी भवन न्यास समिति के सदस्यों द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए हिंदी भवन के मंत्री डा. गोविन्द व्यास ने बताया कि बिना किसी सरकारी सहायता या अनुदान के हिंदी भवन पिछले 30 वर्ष से भी अधिक समय से हिंदी तथा भारतीय भाषाओं की अस्मिता की लड़ाई लड़ रहा है। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी के हिंदी प्रेम को उजागर करते हुए डा. व्यास ने बताया कि टंडन जी ने कांग्रेस के अध्यक्ष तथा अन्य अनेक उच्च पदों को त्यागकर हिंदी सेवा को अपनाया।

हिंदी भवन के अध्यक्ष टी.एन. चतुर्वेदी ने भी अपने व्याख्यान में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन तथा पंडित भीमसेन विद्यालंकार जी के बारे में विस्तृत जानकारी दी व रामबहादुर राय जी के संघर्ष और उनके लेखन व पुस्तकों का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता तथा जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा प्रसिद्ध पत्रकार अच्युतानंद मिश्र द्वारा की गई।

राम बहादुर राय जी का परिचय कादम्बिनी पत्रिका के मुख्य कॉपी संपादक संत समीर जी ने दिया तथा संचालन प्रसिद्ध टी.वी. कलाकार एवं सिने अभिनेता श्री अभिनव चतुर्वेदी द्वारा किया गया।

समारोह में गुजरात के पूर्व राज्यपाल, अनेक सांसद, दिल्ली तथा चैधरी चारण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति, दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक, सरकार तथा पुलिस के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, उद्योगपति, पत्रकार व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।