शिक्षा में गुणवत्ता के लिए मुनि स्कूल करेगा हरियाणा सरकार का सहयोग

  |    September 24th, 2018   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- हरियाणा सरकार के डायरक्टरेट स्कूल एजुकेशन द्वारा शिक्षा को सार्थक व कारगर बनाने के उद्देश्य को लेकर मेंटर अध्यापकों के लिए 22 सितंबर को कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला “द-रोल-ऑफ-टीचर-प्रजेंट-चेंजिंग-सिनेरियो” विषय पर आधारित रही।
कुरूक्षेत्र स्थित जयराम धर्मशाला में आयोजित कार्यशाला के दौरान मुनि इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली के संस्थापक व शिक्षाविद् डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने हरियाणा शिक्षा विभाग के मेंटर अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया।
श्री ठाकुर ने बताया कि हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग से कई अधिकारियों ने समय-समय पर मुनि स्कूल का दौरा कर यहां कि शिक्षण-प्रशिक्षण प्रणाली को समझा और स्कूल द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए गए नवाचारों को जाना।
इसके बाद हरियाणा शिक्षा विभाग विभिन्न अवसरों पर मुनि स्कूल का सहयोग लेता रहा है।गौरतलब है कि बीते माह हरियाणा की चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटि (जींद) द्वारा उच्च शिक्षा में वैल्यूज को शामिल करने के लिए बनाए जाने वाले पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए वाईस चांसलर ने शिक्षाविदों के साथ खास चर्चा का आयोजन किया था। जहां मुनि इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने अपने सुझाव दिए जिन्हें प्रमुख्ता से शामिल किया गया।
शिक्षा में बेहतर परिणामों के लिए मेंटरों को प्रशिक्षित करते हुए डॉ. अशोक कुमार ठाकुर ने कहा कि शिक्षक अब पारंपरिक तरीकों को छोङ कर आधुनिक जरूरतों के मुताबिक छात्रों को शिक्षित करें, किसी भी पाठ का रट्टा मारने की बजाय छात्रों को उसमें गणित, विज्ञान, शोध जैसे बिंदुओं पर काम करने की प्रवृति बनाएं, ग्रुप लर्निंग को बढ़ावा दें, छात्रों को कुछ नया करने के लिए प्रेरित करें, छात्रों में “क्यों” को जानने कि जिज्ञासा बनाएं। श्री ठाकुर ने समझाया कि अब केवल पुस्तकें पढ़ाने से काम नहीं चलेगा, हमें तेजी से बदलती संसारिक गतिविधियों को ध्यान में रख कर वर्तमान की युवा पीढ़ी को शिक्षित करना होगा। आज शिक्षा के गिरते स्तर में सुधार को लेकर तमाम देशों के शिक्षाविद् चिंतित हैं, क्योंकि शिक्षा से वैल्यू एजुकेशन गायब हो चुकी है। यदि हमें शिक्षा को सार्थक बनाना है तो शिक्षा में वैल्यू एजुकेशन को प्राथमिकता और स्किल को बढ़ावा देना होगा। ताकि शिक्षित व्यक्ति देश व समाज को सही दिशा दे और अपने पारिवारिक संबंधों का ठीक से निर्वाहन करे। व्यक्तियों में अहम का टकराव न हो बल्कि एक दूसरे के पूरक बने तो सब के लिए बेहतर होगा।