बिजली कटौती पर दिल्ली के उपभोक्ताओं को मिलेगा हर्जाना

  |    April 18th, 2018   |   0

1 घंटे से अधिक की अघोषित कटौती होने पर मिलेगा हर्जाना, मासिक बिल में एडजस्ट किया जाएगा हर्जाना

नई दिल्ली (सिटि डेस्क)- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके अंतर्गत बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होने पर निजी बिजली कंपनियों को दिल्ली में उपभोक्ताओं को अब हर्जाना देना होगा। इस नीति को अंतिम मंजूरी के लिए दिल्ली सरकार ने उप-राज्यपाल को भेज दिया है जिससे बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह बनाया जा सकेगा।

सरकार का स्पष्ट तौर पर मानना है कि दिल्ली में बिजली के निजीकरण, जोकरीब 15 साल पहले किया गया था, से उपभोक्ताओं को फायदा मिलना चाहिए और उनको 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। इसके लिए उपभोक्ता बिजली कंपनियों को भुगतान करते हैं और यह उनका अधिकार है।

दिल्ली सरकार का मानना है कि उपभोक्ताओं के हित में लिए गये इस फैसले को उप-राज्यपाल महोदय अपनी सहमति दे देंगे जिससे ये फैसला देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल साबित होगा और अन्य राज्य भी इस तरह की नीति अपने यहां भी लागू कर सकेंगे।

                                               इस नीति की मुख्य बातें इस प्रकार हैं–  

इस नई नीति के मुताबिक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होने की स्थिति में बिजली कंपनियों को एक घंटे के अंदर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। अगर बिजली कंपनियों ने ऐसा नहीं कर पाती हैं तो पहले दो घंटे की कटौती पर 50 रुपये प्रति घंटे, प्रति उपभोक्ता को हर्जाना देना होगा। दो घंटे से अधिक की कटौती की स्थिति में यह हर्जाना प्रति उपभोक्ता 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से देना होगा।

एक दिन में केवल शुरुआती पहले घंटे की ऐसी कटौती की स्थिति बिजली कंपनियों को हर्जाने की छूट रहेगी लेकिन अगर उसी उपभोक्ता को उसी दिन आगे भी बिजली कटौती की समस्या का सामना करना पड़ता है तो कंपनियों को पूरी कटौती का हर्जाना देना पड़ेगा।

अगर किसी उपभोक्ता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है तो उसे बिजली कटौती की शिकायत एसएमएस, ई-मेल, फोन, एप और वेबसाइट के जरिये अपने नाम, कन्ज्यूमर एकाउंट (सीए) नंबर, मोबाइल नंबर इत्यादि जानकारियों के साथ करनी होगी। बिजली कंपनियां को शिकायत स्वीकार करनी होगी और उपभोक्ताओं को शिकायत सुलझाने के दिन और समय की सूचना देनी होगी।

एक निश्चित समय अवधि में उपभोक्ता के सीए नंबर में हर्जाना अपने आप पहुंच जाएगा और इसकी सूचना भी उपभोक्ता को मिल जाएगी। हर्जाने की रकम उपभोक्ता के मासिक बिजली बिल के साथ एडजस्ट की जाएगी।

अगर किसी उपभोक्ता को अपने आप बिजली कंपनी से हर्जाना नहीं मिलता है तो वह डीईआरसी/सीजीआरएफ के पास अपनी शिकायत कर सकता है। ऐसी शिकायत सही पाये जाने पर बिजली कंपनी को संबंधित उपभोक्ता को, 5000 रुपये या हर्जाने की पांच गुना राशि, जो भी अधिक हो, देनी होगी।

बिना किसी पूर्व सूचना के अगर बिजली कटौती से उपभोक्ताओं का एक समूह प्रभावित होता है तो बिजली कंपनियों को ऐसे प्रभावित लोगों का अपने दस्तावेजों से पता लगाना होगा और ऐसे हर उपभोक्ता के सीए नंबर में निश्चित समय अवधि के भीतर हर्जाना देना होगा।