डूटा के आवाहन पर शिक्षकों ने घरों में रहकर किया ऑन लाइन एग्जामिनेशन का विरोध

  |    May 20th, 2020   |   0

नई दिल्ली(संवाददाता)- दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के आवाहन पर 20 मई, बुधवार को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक, छात्रों ने घरों में रहकर ही विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ऑन लाइन परीक्षा कराए जाने का कड़ा विरोध किया।

इसे तानाशाही और मनमाना निर्णय बताया है। शिक्षकों का कहना है कि इसे लागू करने से पूर्व शिक्षकों, छात्रों से ना तो किसी तरह का विचार विमर्श किया गया और ना ही उनकी इस विषय में कोई राय ली ,इसे छात्रों पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘  ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में ऑन लाइन परीक्षा की अधिसूचना जारी होने के बाद से शिक्षकों और छात्रों का विरोध जारी है।उनका कहना है कि किसी भी व्यवस्था को लागू करने से पूर्व  बिना फीडबैक लिए छात्रों पर जबरदस्ती थोपा जाना शैक्षिक जगत के लिए हानिकारक है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में लाखों छात्र ग्रामीण परिवेश और गरीबी जिंदगी से निकलकर आए हैं जो कि सुविधाओं की वजह से नहीं बल्कि अपनी कर्मठता और मेहनत के बल विश्वविद्यालय में प्रवेश लेते है।उनके पास न तो तकनीकी व्यवस्थाएं- स्मार्टफोन, इंटरनेट, लेपटॉप, कम्प्यूटर, वाईफाई इत्यादि और ना ही उनके गांवों में।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि कोरोना जैसी महामारी के संकट के समय लाखों छात्र गांव की ओर वापस चले गए है।ऐसी स्थिति में सिर्फ तकनीकी सुविधा प्रदत्त छात्र ही इस परीक्षा में भाग ले सकेंगे और जिनके पास तकनीकी सुविधाएं नहीं है वे वंचित रह जाएंगे। इसमें सबसे ज्यादा आरक्षित वर्ग के एससी, एसटी, ओबीसी और विक्लांग छात्रों पर प्रभाव पड़ेगा जिनके पास न तो स्मार्टफोन, इंटरनेट, कम्प्यूटर और लैपटॉप जैसी कोई सुविधाएं नहीं है।।इन अर्थों में यह पद्धति एक नए तरीके के भेदभाव की परंपरा की शुरुआत करने जा रही है जो छात्र हित में कतई नहीं है।

प्रोफेसर सुमन का कहना है कि हम ऑन लाइन परीक्षा पद्धति का पूरी तरह से बहिष्कार करते हैं और सलाह देते है कि इस पद्धति को तुरंत वापिस लिया जाए और पहले से चली आ रही लिखित परीक्षा पद्धति को ही अपनाते हुए शैक्षणिक गतिविधियों को पुनः संचालित किया जाए।उनका कहना है कि ऑन लाइन परीक्षा पद्धति को आनन फानन में लागू करने वाले फार्मूले को वापिस करे नहीं तो एक नया युग आरम्भ हो जाएगा जो उच्च शिक्षा के लिए घातक सिद्ध होगा।