भारतीय कबड्डी में नए प्रयोगों का दौर शुरू स्कूल कबड्डी लीग देगी उभरते खिलाड़ियों को बेहतर अवसर

  |    July 24th, 2019   |   0

नई दिल्ली(संवाददाता)- देश में कबड्डी के प्रति बढ़ते रुझान और पिछले एशियाड में ईरान द्वारा स्वर्ण पदक झटकने के बाद से भारतीय कबड्डी में नये प्रयोगों का दौर चल निकला है। फ़ेडेरेशन अपने स्तर पर प्रयास कर रही है लेकिन स्कूली कबड्डी से जुड़ा एक वर्ग ऐसा है जिसे लगता है कि सिर्फ़ राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराने और कबड्डी लीग के आयोजन से खेल का भला नहीं होने वाला।

स्कूल कबड्डी लीग फ़ेडेरेशन की राय में यदि भारत को इस खेल में अपनी बादशाहत बनाए रखनी है तो ग्रासरुट स्तर पर बढ़ावा देना होगा और स्कूली खिलाड़ियों की लीग आयोजित की जाने की ज़रूरत है, जिसका आगाज़ 25 जुलाई को सामाजिक न्याय एवम् अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले और ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार करेंगे।

इस आयोजन के लिए तर्क दिया जा रहा है कि खिलाड़ी छोटी उम्र से ही खेल की बारीक़ियाँ सीख सकेगा और सतत प्रयासों से बेहतर खिलाड़ी बन पाएगा| स्कूल कबड्डी लीग के सचिव एमएल साहू  के अनुसार स्कूल गेम्स फ़ेडेरेशन आफ इंडिया ने उनके आयोजन को मान्यता प्रदान की है और आयोजन समिति शारीरिक शिक्षा फाउंडेशन आफ इंडिया(पेफ़ी) के साथ मिलकर जिला और तत्पश्चार राज्य एवम् राष्ट्रीय स्तर पर मुक़ाबले आयोजित करेगी| साहू ने बताया कि देश के सभी राज्यों ने इस आयोजन की रूपरेखा की सराहना की है और भाग लेने का फ़ैसला किया है। आयोजकों के अनुसार सभी टीमों में 12 से 18 साल के 12  खिलाड़ी हो सकते हैं लेकिन हर टीम16 से 18 साल के छह खिलाड़ियों के साथ उतरेगी| ऐसा छोटी उम्र के खिलाड़ियों को प्लेटफार्म प्रदान करने के लिए किया गया है।

देश के सभी 760 जिलों ने स्कूल लीग से जुड़ने के लिए हांमीं भरी है। इस लीग से देश में उभरते खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे। इसका जिला स्तर के बाद राज्य स्तर पर भी आयोजन किया जाएगा।