युवाओं के लिए प्रेरक थे नेताजी : प्रो. गिरीश्वर मिश्र

  |    January 27th, 2019   |   0

हिंदी विवि में डॉ. अनुपमा गुप्‍ता की  ‘दिल दियां गल्‍लां’ काव्‍य कृति का लोकार्पण

वर्धा(संवाददाता)-नेताजी सुभाषचंद्र बोस धुन के बहुत पक्‍के थे। पिताजी की इच्‍छा पर ही उन्‍होंने आईसीएस की परीक्षा उत्‍तीर्ण की और कहा कि अब मुझे देश सेवा करनी है। उन्‍होंने देश सेवा के लिए जो अप्रतीम योगदान दिया उससे हम सभी वाकिफ हैं। नेताजी युवाओं के लिए प्रेरणास्‍पद थे। उक्‍त उद्बोधन कुलपति प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र ने व्‍यक्‍त किए। वे महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में नेताजी जयंती के उपलक्ष्‍य में आयोजित व्‍याख्‍यान, लोकार्पण समारोह तथा काव्‍य पाठ समारोह की अध्‍यक्षता करते हुए बोल रहे थे।

मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ के संकायाध्‍यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि 1928 में कलकत्‍ता में हुए राष्‍ट्रभाषा सम्‍मेलन की स्‍वागत समिति का अध्‍यक्ष नेताजी को बनाया गया था जिसमें उन्‍होंने हिंदी के साथ बंगाल के घनिष्‍ठ संबंधों को याद किया, उस कार्यक्रम की अध्‍यक्षता महात्‍मा गांधी ने की थी इसलिए गांधी और नेताजी में अंतर्विरोध की तलाश युक्तिसंगत नहीं है, दोनों एक-दूसरे का सम्‍मान करते थे। जनसंचार विभाग के एडजंक्‍ट प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि नेताजी भी गांधीजी की तरह ही जाति व्‍यवस्‍था को सामाजिक विकृति के रूप में देखते थे। नेताजी वर्णसंकर समाज चाहते थ। अमर उजाला, दिल्‍ली के सहायक संपादक कल्‍लोल चक्रवर्ती ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद, रवीन्‍द्रनाथ टैगोर तथा नेताजी बंगाल की पहचान हैं। 

इस अवसर पर महात्‍मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्‍थान की डॉ. अनुपमा गुप्‍ता रचित ‘दिल दियां गल्‍लां’ काव्‍य कृति का लोकार्पण किया गया। साहित्‍य अकादेमी पुरस्‍कार सेसम्‍मानित सुप्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुद्गल ने कहा कि इस यांत्रिक दुनिया को एक अदना सा कवि और उसकी प्‍यारी सी कविता ही बचा सकती है। जिसमें अपनी बात कहलाने की युक्ति होगी वही कविता लिख सकता है इसमें कवयित्री डॉ. अनुपमा फिट बैठती हैं। कथाकार मनोज कुमार पांडेय ने डॉ. अनुपमा गुप्‍ता की काव्‍य कृति ‘दिल दियां गल्‍लां’पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनकी कविताओं में प्रिय खयालों में है। जिसके प्रेम में इन कविताओं की स्त्री डूबी हुई है। इन प्रेम कविताओं का एक स्त्रीवादी पाठ भी किया जा सकता है। कविता का कठिन दौर बताते हुए साहित्‍य विद्यापीठ के प्रो. अखिलेश दुबे ने ‘दिल दियां गल्‍लां पुस्‍तक’ पर विस्‍तार से चर्चा की।  

समारोह में प्रतिकुलपति आनंद वर्धन शर्मा ने मां पर कविता सुनाई। काव्‍य पाठ के दौरान डॉ. अनुपमा गुप्‍ता ने यह कहकर कहकर अपनी कविता सुनाई कि यह विश्‍वविद्यालय मुझे अपने घर जैसा लगता है। इस मौके पर डॉ. अप्रमेय मिश्र, उपासना गौतम, हुस्न तबस्सुम निहां, शावेज़ खान आदि कवियों ने कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. अमित विश्‍वास ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कहा कि डॉ. ओमप्रकाश गुप्‍त लगभग पिछले दो दशक से वर्धा की धरती को साहित्यिक ऊर्जा से सिंचित कर रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी ने संचालन तथा भाषा विद्यापीठ के सहायक प्रोफेसर डॉ. अनिल दुबे ने आभार व्‍यक्‍त किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्‍वलन तथा नेतीजी की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण कर किया गया। अतिथियों का स्‍वागत अंगवस्‍त्र तथा पुष्‍प प्रदान कर किया गया। कुलपति प्रो. मिश्र ने डॉ. ओमप्रकाश गुप्‍त,चित्रा मुद्गल तथा कल्‍लोल चक्रवर्ती को चरखा प्रदान कर सत्‍कार किया। इस अवसर पर कार्यकारी कुलसचिव प्रो. के.के. सिंह, प्रो. मनोज कुमार, आवासीय लेखक प्रो. एस.शेष रत्‍नम, आनंद भारती, गीता गुप्‍ता, डॉ. दिलीप गुप्‍ता, राजेश लेहकपुरे सहित अध्‍यापक, कर्मी, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित रहे।