जीएसटी कर प्रणाली में सुधार की आवश्यकता : प्रवीन खंडेलवाल

  |    July 1st, 2018   |   0

बिल  देने के लिए व्यापारियों को दोष क्यों – जो उपभोक्ता बिल नहीं लेते उन्हें दोष क्यों नहीं

नई दिल्ली (संवाददाता)- जीएसटी कर प्रणाली के एक वर्ष पूरे होने पर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के  बैनर तलेदेश भर में व्यापारियों ने “जीएसटी दिवस” के अनेक कार्यक्रम किये जीएसटी के एक वर्ष पूर्ण होने पर देश भर के  व्यापारियों में मिश्रित प्रतिक्रिया थी।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महा मंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी लागू होने के पहले 6 महीनों में व्यापारियों को अनेकपरेशानियां झेलनी पड़ी जिसमें ख़ास तौर पर जीएसटी पोर्टल का सुचारू न चलना एवं लगातार जीएसटी नियमों में परिवर्तन होना रहा किन्तु एक वर्ष बीतते बीततेस्तिथि में काफी सुधार हुआ है और व्यापारी जीएसटी को अपनाने में उत्साहित हैं ! लेकिन अभी भी जीएसटी कर प्रणाली का सरलीकरण होना बहुत जरूरी है जिससेआम व्यापारी भी आसानी से जीएसटी की पालना कर सके।

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने इस आरोप का जोरदार विरोध किया की व्यापारी बिल नहीं देते हैं,उन्होंने कहा की अधिकतर मामलों में उपभोक्ता बिल नहीं लेताक्योंकि वो कर नहीं देना चाहता संभवत : कर की दरें अधिक हैं ! इस दृष्टि से सिर्फ व्यापारियों को दोषी ठहराना बेहद गलत है ! इस दृष्टि से उपभोक्ताओं कोजागरूक करना जरूरी है की वो माल लेकर बिल अवश्य लें।

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा की जीएसटी कर प्रणाली व्यापारियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई है क्योंकि इस प्रणाली में व्यापारियों को दिए हुए कर का इनपुटक्रेडिट मिल जाता है, जीएसटी से व्यापारियों को अनेक प्रकार के करों एवं अनेक सरकारी विभागों से मुक्ति मिली है वहीँ दूसरी ओर ई व्यवस्था होने के कारण से करअधिकारीयों से सीधा संपर्क समाप्त हुआ जिसके चले भ्रष्टाचार में कमी आयी है ! इन खूबियों की वजह से जीएसटी एक विशिष्ट कर प्रणाली के रूप में विकसित हुई है।

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की आगामी वर्ष में सरकार को जीएसटी को और अधिक सरल बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए ! हर महीने रिटर्न भरने कीअपेक्षा फॉर्म 3 बी पर  तिमाही रिटर्न भरना, स्वत : रिफंड व्यापारियों के बैंक खाते में जमा होना, केवल एक राज्य से दुसरे राज्य में माल भेजने पर ई वे बिल लग्न,जीएसटी में कर की कवाल दो दरें होना, कम्पोजीशन स्कीम में अंतरराज्यीय व्यापार को अनुमति देना , एचएसएन कोड केवल निर्माताओं पर लागू करना आदि कुछकदम ऐसे हैं जिनसे जीएसटी का सरलीकरण होगा। उन्होंने यह भी कहा की शिकायतों के पारदर्शी और निष्पक्ष निपटारे के लिए एक जीएसटी लोकपाल का भी गठनहोना चाहिए। वहीँ दूसरी ओर 28% कर दर में से ऑटो पार्ट्स, सीमेंट, मार्बल, पेंट आदि को निकालकर कम दर वाले स्लैब में डालना चाहिए।