मेडिकाबाजार ने की ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह की शुरुआत

  |    October 22nd, 2019   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर और इसके उपचार के बारे में जागरूकता फैलाने के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मेडिकाबाजार ने ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह की शुरुआत की है।

मेडिकल सप्लाई के लिए भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन बी2बी प्लेटफॉर्म मेडिकाबाजार ने देशभर के अस्पतालों के लिए ब्रैस्टर प्रो ब्रेस्ट-स्क्रीनिंग डिवाइस उपलब्ध करा रहा है।

यूरोप में निर्मित यह अत्याधुनिक स्क्रीनिंग डिवाइस एक थर्मोग्राफिक इमेजिंग डिवाइस है। यह प्रभावी रूप से न्यूनतम त्रुटियों के साथ ब्रेस्ट को स्क्रीन करता है और लगभग आधी कीमत पर मैमोग्राफी के लिए एक आदर्श सहायक प्रक्रिया के रूप में कार्य करता है। पोलैंड, बुल्गारिया और जर्मनी सहित कई यूरोपीय देशों में पहले ही इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है। मेडिकाबाजार की ओर से भारत में इसे पहली बार पेश किया गया है। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के दौरान कंपनी ने ब्रेस्ट्र प्रो द्वारा प्रदान किए जाने वाले एडवांस डायग्नोसिस के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पहल की है, जो हर उम्र की भारतीय महिला को सुरक्षित, सस्ता और सुलभ समाधान प्रदान कर सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर यकीनन दुनिया भर में महिलाओं में होने वाली सबसे प्रमुख बीमारियों में से एक है। इससे पीड़ितों में मृत्यु दर अधिक है। सिर्फ 2018 में ही मौत का शिकार होने वाले 45 वर्ष से कम आयु के मरीजों में 21.2 प्रतिशत रोगी ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थे। उसी साल इस बीमारी की वजह से वैश्विक स्तर पर 30% से अधिक मामलों में और भारत में 28% मामलों में 45 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं की मौत हुई। यह शहरी और ग्रामीण भारत दोनों में होने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है और हालिया शोध के अनुसार, भारत में हर दिन 2000 नए मामले डायग्नोज हो रहे हैं। लगभग 1200 मामले देर से पता लगाने के कारण अंतिम चरणों में सामने आते हैं।

यह देखते हुए कि भारतीय आबादी में युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग ज्यादा हैं, ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों की एक बड़ी संख्या इसी आयु समूह में है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक 22 भारतीय महिलाओं में से एक में यह बीमारी विकसित करती है, और उनमें से दो में से एक मौत का शिकार हो जाती है। यह उन समाधानों के लिए दबाव की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है जो प्रारंभिक अवस्था में स्तन कैंसर का पता लगा सकते हैं, विशेष रूप से कम आयु वाले समूहों में। हालांकि, स्वीकृत मानदंडों के अनुसार रेडिएशन के जोखिम और पारंपरिक तरीकों से जुड़ी जटिलताओं के कारण यह सलाह दी जाती है कि महिलाओं में स्क्रीनिंग 45 वर्ष की आयु के बाद ही कराई जानी चाहिए।

स्तन कैंसर का जितना जल्दी पता चलता है, उसके डायग्नोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यदि इसका पता देर से चलता है, तो यह खराब प्रोग्नोसिस, कम जीवन प्रत्याशा और घातक परिणाम की ओर ले जा सकता है। लागत बहुत ज्यादा होने के कारण देश के कई हिस्सों में मैमोग्राफी जैसी प्रोफेशनल इमेजिंग स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं अनुपलब्धता के कारण ब्रेस्ट कैंसर का पता देर से चलता है। ब्रैस्टर प्रो एक आदर्श डिवाइस है, जहां इसका उपयोग उन स्थानों पर स्क्रीनिंग के लिए किया जा सकता है, जहां यूएसजी सुविधाएं और मैमोग्राफी उपलब्ध नहीं हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को बीमारी के लिए खुद को जांचने की अनुमति मिलती है।