शिक्षा ही समाज में मनुष्यता का सर्जन कर सकती है : मोहनराव भागवत

  |    April 6th, 2018   |   0

दिल्ली में शुरू हुआ तीन दिवसीय ज्ञानोत्सव : सैंकड़ो स्कूलों ने लगाई शिक्षा में नवाचार की प्रदर्शनी

                      स्वार्थी जीवन व्यतीत करना मनुष्यता नहीं अपितु पशु

 नई दिल्ली (राजेश शर्मा)- शिक्षा संस्कृति उथान न्यास के द्वारा दिल्ली में राजघाट स्थित गांधि शांति प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ज्ञानोत्सव का आयोजन किया गया। 6 अप्रैल से आरंभ हुए इस उत्सव के तहत 8 अप्रैल तक यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए स्कूलों द्वारा शिक्षा में किए गए विशेष नवाचारों के प्रदर्शन किया जा रहा। शिक्षा क्षेत्र में कुछ नया करने की सोच रखने वाले लोगों के लिए इस प्रदशर्नी में काफी कुछ मिलेगा। प्रदर्शनी में आने के लिए तीनों दिन सुबह 11 से सांय 6 बजे तक स्टॉल खुले रहेंगे। 

उत्सव का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक प्रमुख मोहनराव भागवत, संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन राज्य मन्त्री महेश शर्मा द्वारा  किया गया, वहीं इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के दीनानाथ बत्रा, अतुल कोठरी, ईश्वर दयाल कंसल, स्वामी आत्माराम, अशोक प्रधान, प्रो. बंसल, प्रो. कुटियाला, प्रो.सी.बी. शर्मा आदि मुख्य अतिथियों ने कार्यक्रम की शोभा बड़ाई।

इसके बाद सर संघचालक मोहनराव भागवत ने मन्त्री महेश शर्मा के साथ शैक्षिक संस्थानों स्कूलों द्वारा शिक्षा में नवाचारों एवं अभिनव प्रयोगों पर लगाई गई प्रदर्शनी का विभिन्न स्टॉल पर जाकर अवलोकन किया और उनके कार्यों की सराहना की।

इसी कङी में मोहनराव भागवत ने दिल्ली के मुनि इंटनेशनल स्कूल के स्टॉल का भी अवलोकन किया जहां स्कूल संस्थापक डॉ अशोक कुमार ठाकुर व स्कूली छात्रों ने उनका पारंपरिक रूप से स्वागत किया।

ज्ञानोत्सव के प्रथम दिन के पहले सत्र में देश के शैक्षिक संगठन प्रमुखों अध्यक्षों व संघचालक मोहनराव भागवत के बीच एक विचार मंथन सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में भारत में शैक्षिक प्रथाओं में सकारात्मकता लाने तथा शिक्षा में नैतिक मूल्यों, पर्यावरण, चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महेश शर्मा ने कहा की मुझे पूरा विश्वास है की इस आयोजन के ज़रिये जो शिक्षा और संस्कृति में एक फ़ासला है, वह परिपूर्ण होगा तथा राष्ट्रीय निर्माण का लक्ष्य भी पूरा होगा। इसके लिए हमें ऐसे युवा तैयार करने हैं जो देश की संस्कृति के प्रति समर्पित हो।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक प्रमुख मोहनराव भागवत ने अपने सम्बोधन में सभी राज्यों से आए शैक्षिक संस्थानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में जन मानस ही सुधार की नींव है और यही शिक्षा में नवाचारों एवं अभिनव प्रयोगों का सर्जन करेगी। इसके लिए हम सभी को मिलकर कार्यरत होना पड़ेगा तथा मनुष्य को स्वार्थी न बनकर दूसरों के दर्द को भी समझना चाहिए। स्वार्थी जीवन व्यतीत करना मनुष्यता नहीं अपितु पशु होने जैसा है। शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा की शिक्षा ही समाज में मनुष्यता का सर्जन कर सकती है व इसके द्वारा की मनुष्य देवत्व की प्राप्ति कर सकता है।