महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्‍ता आश्‍वासन प्रकोष्‍ठ की बैठक संपन्‍न

  |    June 30th, 2019   |   0

वर्धा (संवाददाता)- महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्‍ता आश्‍वासन प्रकोष्‍ठ की ग्‍यारहवीं बैठक कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल की अध्‍यक्षता में भाषा विद्यापीठ के सभागार में संपन्‍न हुई। बैठक में बाह्य विशेषज्ञ के रूप में महात्‍मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्‍थान, सेवाग्राम के मेडिसिन विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओ. पी. गुप्‍ता, दैनिक भास्‍कर के समूह संपादक श्री प्रकाश दुबे उपस्थित थे।

वहीं सदस्‍य के रूप में कार्यकारी कुलसचिव प्रो. कृष्‍ण कुमार सिंह, वित्‍ताधिकारी क़ादर नवाज़ ख़ान, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. नृपेंद्र प्रसाद मोदी, प्रो. कृपाशंकर चौबे, डॉ. रामानुज अस्‍थाना, डॉ. हरीश हुनगुंद, डॉ. शिरीष पाल सिंह, डॉ. ऋषभ मिश्र, पूर्व विद्यार्थी अनिल फरसोले, विद्यार्थी प्रतिनिधि वैभव उपाध्‍याय,  डॉ. राजीव रंजन राय, सहायक कुलसचिव राजेश अरोड़ा, सुशील पखीडे उपस्थित थे।

प्रारंभ में गुणवत्‍ता आश्‍वासन प्रकोष्‍ठ की समन्‍वयक डॉ. शोभा पालीवाल ने प्रकोष्‍ठ के सभी सदस्‍यों का स्‍वागत किया तथा नए सदस्‍यों का परिचय कराया। उन्‍होंने प्रकोष्‍ठ की कार्यविधि की चर्चा करते हुए कुलपति महोदय से बैठक की कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया। बैठक में शिक्षण को अनुभवपरक एवं गुणात्‍मक रूप से समृद्ध करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित सदस्‍यों ने महत्‍वपूर्ण सुझाव देते हुए अकादमिक गुणवत्‍ता और प्रतिभा को निखारने को लेकर मंतव्‍य दिए।

कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के अनुपालन में विद्या‍र्थियों के लिए तनाव व्‍यवस्‍थापन के लिए उपयुक्‍त प्रबंध किया जाएगा। उन्‍होंने अध्‍यापकों के लिए सूक्ष्‍म नियोजन करने का आहवान करते हुए अनुसंधान परियोजनाओं पर काम करने का सुझाव भी दिया। इसके साथ कुलपति प्रो. शुक्‍ल ने प्रकाशन, स्‍थानीय समुदायों के साथ संवाद बढ़ाना, भाषा के लिए कोश तैयार करना विभाग के स्‍तर पर अनुसंधान परियोजनाएं चलाना, उत्‍कृष्‍टता हासिल करने वाले विद्यार्थियों की उत्‍तरपत्रिकाएं पुस्‍तकालय में उपलब्‍ध कराना आदि सुझाव भी दिए।

बैठक में परामर्शदाताओं के स्‍वरूप एवं कार्यपद्धति पर चर्चा की गयी। विभागों में शिक्षण एवं शोध की गुणवत्‍ता पर विचार-विमर्श एवं नवाचारी पाठ्यक्रमों के संबंध में विमर्श किया गया। विश्‍वविद्यालय में शोध सहायता प्रकोष्‍ठ को सक्रिय करने तथा हिंदी में शोध पत्रों इम्‍पेक्‍ट फैक्‍टर तथा स्‍कोपस पर भी चर्चा की गयी। प्रकोष्‍ठ की अध्‍यक्ष डॉ. शोभा पालीवाल ने अध्‍यक्ष एवं सभी उपस्थित सदस्‍यों के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया।