जेपी हाॅस्पिटल में हुई 92 साल की इराकी महिला की बाइपास सर्जरी 

  |    September 7th, 2018   |   0

नोएडा(समाचार डेस्क)- वर्षीया इराकी महिला महरोब सादून अब्बास को नया जेपी हॉस्पिटल ने नया जीवन दिया है। महिला की बायीं दिल-धमनी बीमारी की वजह से 90 प्रतिशत नाकाम हो गई थी। मरीज की उम्र और पूर्व की दिल की बीमारी के रिकाॅर्ड की वजह से जोखिम अधिक था और बचने की संभावना कम थी। लेकिन जेपी हाॅस्पिटल के सीईओ एवं कार्डिएक सर्जरी के डायरेक्टर डाॅ. मनोज लूथरा ने 18 अगस्त 2018 को जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा के कार्डिएक सर्जन की अपनी टीम के साथ जोख़िम भरी कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
महरोब सादून अब्बास पिछले 10 सालों से दिल की बीमारी से जूझ रही थीं और दो बार ब्लाॅकेज़ दूर करने के लिए उन्हें दो बार स्टेंट लगाए गए थे। स्टेंट की वजह से उन्हें छाती में हमेशा दर्द रहता था, कमजोरी रहती और कुछ भी करने या अक्सर आराम से रहने पर भी सांस फूलने लगती थी। इन बीमारियों और बढ़ती उम्र से उनकी हालत बिगड़ने लगी, उनका चलना मुश्किल हो गया। वह अपने नित्य प्रतिदिन के कार्यों के लिए परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहने लगी। इसके अलावा उन्हें डायबीटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की अंतिम स्टेज की बीमारी थी जिसके लिए नियमित डायलेसिस करवाना अनिवार्य था वरना उनकी जान जा सकती थी।
मरीज के बारे में खुद डाॅ. लूथरा ने बताया, ‘‘महरोब सादून अब्बास दिल-धमनी की बीमारी की मरीज़ थीं। इसमें एक या अधिक धमनियां ब्लाॅक हो जाती है और दिल को खून नहीं पहंुचता है। पूर्व में मरीज की दो बार बड़ी हार्ट सर्जरी हो चुकी थी और ब्लाॅकेज़ दूर करने के लिए स्टेंट भी लगाए गए थे। ब्लाॅकेज़ की समस्या फिर भी हो गई थी। उनकी उम्र और अन्य बीमारियों को देखते हुए इरान और तुर्की के प्रमुख हाॅस्पिटलों ने उनकी सर्जरी करने से मना कर दिया क्योंकि इसमें बड़ा जोखि़म था।’’
महिला की हालत देखते हुए उसके परिवार के लोग उसे जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा ले आए। गहन जांच से पता चला कि मरीज को दिल के बायें भाग (बायें मुख्य दिल-धमनी में ब्लाॅकेज़ की गंभीर समस्या) की गंभीर बीमारी है। इससे उनके बीमार रहने और जान जाने का भी खतरा था। इतना ही नहीं, इससे पहले लगे स्टेंट भी आंशिक रूप से ब्लाॅक हो गए थे जिससे मरीज की हालत और खराब हो गई थी। दिल के दौरे का खतरा बढ़ गया था। लेकिन जेपी हाॅस्पिटल के डाक्टरों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मरीज को कोरोनरी बाइपास ग्राफ्टिंग सर्जरी ;ब्।ठळद्ध की सलाह दी। यह खून के दिल-धमनी से गुजरने की प्रक्रिया दुबारा सामान्य बहाल करने की सर्जरी है।
महरोब सादून अब्बास का मामला जटिल था और इसमें चुनौती बड़ी थी। मरीज की 92 साल उम्र और दिल-धमनी की बीमारी, साथ ही, डायबीटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की समस्या भी अंतिम स्टेज़ में होने से सर्जरी में जोखिम़ बहुत था। हमने पूरी बारीकी से काम शुरू किया। सर्जरी में न्यूनतम चीरा लगाने की प्रक्रिया अपनाई ताकि सर्जरी के दौरान जोखिम और संबंधित समस्याओं का खतरा भी न्यूनतम हो। हमारी टीम ने सटीक काम करते हुए टीम वर्क की मिसाल रखी। हमने अपने कौशल का पूरा लाभ लेते हुए निर्धारित समय के अंदर सर्जरी पूरी कर ली और सफल रहे। सर्जरी के बाद मरीज की उचित देखभाल की गई और मरीज के सभी ‘वाइटल्स’ स्थिर देखते हुए 26 अगस्त 2018 को उन्हें हाॅस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।
जेपी हाॅस्पिटल के कार्डियक सर्जन डाॅ. मंसूर अहमद सिद्दकी ने बताया, ‘‘भारत में अब तक सबसे अधिक उम्र,  96 वर्ष में जे सी मेहता की बाईपास सर्जरी का रिकाॅर्ड है जो 2014 में की गई। श्री मेहता बच्चों के लोकप्रिय किताबों की सीरीज़ – ‘रिमेम्बरिंग आॅर लीडर्स’ और ‘रीड अलाउड स्टोरीज़’ के लेखक हैं। इस लिहाज से 92 साल की मरीज की बाइपास सर्जरी हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है। अत्यधिक गहन चिकित्सा के क्षेत्र में हमने यह बड़ी कामयाबी पाई है। आज हमारे पास ऐसी तकनीक और विशेषज्ञता है कि श्रीमती अब्बास जैसे मरीजों की जान बचाने में भी हम कामयाब रहे हैं। हमने दुनिया के सामने भारत में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा की मिसाल रखी है।’’
हाॅस्पिटल का आभार व्यक्त करते हुए महरोब सादून अब्बास ने कहा, ‘‘जेपी हाॅस्पिटल के डाॅ. मनोज लूथरा और उनकी टीम का आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मुझे नई जिन्दगी मिल गई है। मैं तो उम्मीद हार गई थी पर मेरे परिवार के लोगों की जिद्द पर इलाज के लिए भारत आई। जेपी हाॅस्पिटल की देखभाल से न केवल मेरा शरीर स्वस्थ हुआ बल्कि मुझे जीने का नया उत्साह मिल गया। मैं खूबसूरत यादों के संग भारत से विदा ले रही हूं। अब मुझे नए सिरे से जिन्दगी जीनी है।
जेपी हाॅस्पिटल, नोएडा में इस तरह की अद्भुत सर्जरी होना इसका प्रमाण है कि भारत में चिकित्सा विशेषज्ञता और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवा का स्तर तेजी से ऊंचा हो रहा है।