नि:संतान के लिए आयुर्वेद में भी है सफल इलाज : डॉ. चंचल शर्मा

  |    June 12th, 2020   |   0

बिना साइड इफेक्ट के सफल इलाज, संतान प्राप्ति की सफलता

डॉ. चंचल शर्मा

नई दिल्ली – आज के इस भागते दौड़ते जीवन में निसंतानता भी एक गंभीर विषय बनता जा रहा है। डॉक्टरों के माने तो इस बिमारी के पीछे कई कारण होते है, जैसे के हमारा खान पान, वातावरण, पारिवारिक कारण और सबसे बड़ा कारण होता है, “स्ट्रेस” जो कि आज के इस समय में हर दूसरा व्यक्ति इससे जूझ रहा है। इसी गंभीर बीमारी के लिए आशा आयुर्वेदा की डॉक्टर चंचल शर्मा बताती है कि हमारे आयुर्वेद में निसंतानता का सफल इलाज आज से नहीं पुराने काल से चला आ रहा है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि आयुर्वेद का 90 फ़ीसदी से भी ज्यादा सफल रेट है, वंही गूगल के मुताबिक आईवीएफ का सफल रेट सिर्फ 30 फीसदी है।

डॉ. चंचल शर्मा के मुताबिक कहा जाता है कि बच्चे भगवान का रूप होते है, जिस घर में बच्चों की किलकारियाँ गूँजती है वह घर खुशियों से चहक उठता है। हर स्त्री को जीवन की सबसे बड़ी ख़ुशी तब मिलती है जब उसे पता चलता है की वह “माँ बनने वाली है”, हर नए नवेले शादीशुदा जोड़े को आशीर्वाद के रूप में कहा जाता है दूधो नहाओ फूलो फलो जिसका अर्थ होता हैं दूध से नहाना और पोते यानी कि पुत्र के भी पुत्र के द्वारा सेवा का सुख भोगना।

इस एक आर्शीवाद में जीवन का बहुत बड़ा सुख छिपा है, क्योंकि दूध से नहाने वाला इंसान निश्चित ही समृद्ध होगा। बिना समृद्धि के दूध से स्नान की बात सोची ही नहीं जा सकती है साथ ही यदि इंसान अपने पोते का सुख भोगता है तो वह उसके लिए परम सुख की प्राप्ति होती है। हर नव विवाहित जोड़े को यह आशीर्वाद इसलिए दिया जाता है ताकि इन्ही शुभकामाओं की वजह से उनके घर के आँगन में एक नन्हे-मुन्हे बच्चे की किलकारियां गूंजे। हम चाहे कितने ही परेशां क्यों न हो पर एक बच्चे के साथ समय बिताने से सभी चिंताएँ दूर हो जाती है।

लेकिन आज बहुत से विवाहित जोड़े ऐसे है जो सालों के प्रयास के बाद भी परम संतान सुख से वंचित है, इंडियन सोसाइटी ऑफ़ असिस्टेड रिप्रोडक्शन के मुताबिक भारत की 10-14% आबादी संतान सुख पाने बांझपन का शिकार है, जिसकी वजह से उनके घर का आँगन कई सालों से सुना है। वह संतान सुख की प्राप्ति के लिए मेहेंगे से मेहेंगे एलॉपैथी इलाज जैसे आई वी एफ, आई यू आई करवा चुके है, लेकिन इतनी कोशिशों और पैसे व्यर्थ करने के बाद भी कोई परिणाम नहीं मिला।

लेकिन अब आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है, वो कहते है ना की अगर एक रास्ता बंद हो जाता है तो दूसरा रास्ता अपने आप खुल जाता है अगर एलॉपैथी में कोई इलाज नहीं है तो क्या हुआ? आयुर्वेद है ना, सुनने में थोड़ा अजीब लगता है की आयुर्वेद से बाँझपन का इलाज लेकिन ऐसा आशा आयुर्वेदा ने यह मुमकिन कर दिखाया है। आशा आयुर्वेदा ने बहुत से चिंतित लोगों के जीवन में आशा की किरण जगाई है। यहाँ आई वी एफ जैसे इलाज में भी यह लोग केवल आयुर्वेदिक दवाईयों का ही प्रयोग करते है। यहाँ पर आई वी एफ जैसा इलाज प्राइवेट अस्पताल के मुकाबले बहुत ही कम फीस में किया जाता है। आशा आयुर्वेदा दावा करता है कि जहाँ एलॉपैथी में सफलता दर केवल 20-30% होती है वही आयुर्वेदा में सफलता दर 90% होती है। आशा आयुर्वेदा ने आज तक हज़ारों लोगों को संतान का सुख प्रदान किया है। आशा आयुर्वेदा की स्थापना 2014 में डॉ. चंचल शर्मा द्वारा हुई , इन्हें आयुर्वेद से इलाज करने में 8 सालों से भी अधिक का अनुभव है।

डॉ. चंचल शर्मा का कहना है कि “आज कल लोगों की जीवन शैली ऐसी हो गई है कि उन्हें कुछ ऐसी बीमारियाँ होती है जिन्हें शुरू में तो वह नज़रअंदाज़ करते है लेकिन बाद में फिर उनका गर्भधारण पर गहरा असर पड़ता है। उनकी कोशिश है की वह हर जोड़े को संतान का सुख प्रदान करें।”