उन्‍नत ग्राम से साकार होगा प्रगत भारत : डॉ. विजय भटकर

  |    September 11th, 2019   |   0

हिंदी विश्‍वविद्यालय में उन्‍नत भारत अभियान पर राष्‍ट्रीय गोष्‍ठी आयोजित

वर्धा(संवाददाता)- भारत के गांव उन्‍नत होंगे तभी उन्‍नत भारत साकार होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान जैसे महत्‍वपूर्ण संस्‍थानों की मदद से तकनीकी का उपयोग गांव के विकास के लिए किया जाना चाहिए, यह विचार वरिष्‍ठ वैज्ञानिक, पद्म भूषण और उन्‍नत भारत अभियान के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ. विजय भटकर ने व्‍यक्‍त किये।

वे महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में आचार्य विनोबा भावे की जयंती के उपलक्ष्‍य में गालिब सभागार में आयोजित गोष्‍ठी में मुख्‍य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने की। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. के. के. सिंह, महात्‍मा गांधी फ्यूजी गुरुजी सामाजिक कार्य अध्‍ययन केंद्र के निदेशक प्रो. मनोज कुमार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विवि के उन्‍नत भारत अभियान के विश्‍वविद्यालय के संयोजक डॉ. मिथिलेश कुमार ने किया तथा कुलसचिव प्रो. के. के. सिंह ने किया।

डॉ. भटकर ने कहा कि देश को विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थानों (आईआईटी) की स्‍थापना की गयी। इससे स्‍वतंत्रता के बाद विश्‍व में भारत को विश्‍वमान्‍यता भी प्राप्‍त हुई है। उन्‍होंने गांव के विकास की बात करते हुए कहा‍ कि आज मोबाइल के माध्‍यम से हमारे हाथ में तकनीक आ गयी है। देश में नौ सौ  से अधिक विश्‍वविद्यालय, 40 हजार से अधिक महाविद्यालय और 18 लाख से अधिक स्कूल्‍स विद्यमान है। हमारे पास शिक्षा को सबसे बड़ा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर है जिसमें 25 करोड़ से अधिक बच्‍चे पढ़ रहे हैं। हमें नॉलेज-कॉलेज-विलेज की संकल्‍पना पर विचार कर गांव के विकास की दिशा में सोचना चाहिए। उन्‍नत भारत अभियान इस दिशा में भारत सरकार द्वारा उठाया गया महत्‍वाकांक्षी कदम है। उन्‍होंने कहा कि गांव की आवश्‍यकता और जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बननी चाहिए ताकि गांव के विकास में काम आ सके। उन्‍होंने कहा कि आईआईटी में 100 से अधिक विद्यार्थी पीएच.डी. कर रहे हैं। मनुष्‍य, यंत्र और सामग्री के माध्‍यम से अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूती प्रदान करने के लिए पंचगंव्‍य का प्रयोग होना चाहिए। उन्‍होंने विश्‍वविद्यालय द्वारा उन्‍नत भारत अभियान के कार्यों की प्रशंसा करते हुए महत्‍वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल ने कहा कि विश्‍वविद्यालय के नाते समाज हमारी ओर देखता है। अन्‍य लोगों के लिए आदर्श बनने के लिए पहले हमें आदर्श बनाना होगा। उन्‍होंने स्‍वामी विवेकानंद, विनोबा भावे का उल्‍लेख करते हुए कहा कि ज्ञानेश्‍वरी और भगवदगीता को आदर्श मानकर विज्ञान का प्रयोग करना हमारी जिम्‍मेदारी है।    

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं कुलगीत से किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल की ओर से डॉ. विजय भटकर का विश्‍वविद्यालय का स्‍मृति चिन्‍ह, सूत माला एवं अंगवस्‍त्र प्रदान कर स्‍वागत किया। अपने स्‍वागत वक्‍तव्‍य में उन्‍होंने कहा कि डॉ. भटकर के आगमन से मैं रोमांचित हूं। उन्‍होंने कृतज्ञता भाव से उनके प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए आशा व्‍यक्‍त की कि उनके ज्ञान और अनुभवों का विश्‍वविद्यालय को लाभ मिलेगा।

प्रो. मनोज कुमार ने उन्‍नत भारत योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि इस योजना के तह‍त विश्‍वविद्यालय दस गावों में काम कर रहा है। इस योजना के तहत अभी तक 605 विद्यालयों में संपर्क कर जागरूकता लाने का काम कियया गया है। इस अवसर पर उन्‍नत भारत अभियान पर किए गए कार्यों की प्रस्‍तुति डॉ. शिवसिंह बघेल ने की। दत्‍ता मेघे आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय, सावंगी के डॉ. सौरभ कुमार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. बाबासाहब अंबेडकर समाज कार्य महाविद्यालय, वर्धा  के डॉ. आनंदप्रकाश भेले और जिला परिषद प्राथमिक शाला नांदोरा की प्राचार्य सीमा पंढरकर को डॉ. विजय भटकर के हाथों प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्‍मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्‍ट्रगीत से किया गया। कार्यक्रम में अध्‍यापक, अधिकारी, विद्यार्थी, वर्धा शहर के विभिन्‍न महाविद्यालयों के शिक्षक तथा गणमान्‍य नागरिक बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

विनोबा हिल का उदघाटन

पद्मश्री डॉ. विजय भटकर की प्रमुख उपस्थिति में बुधवार को विनोबा जयंती के उपलक्ष्‍य में विश्‍वविद्यालय के उत्‍तरी परिसर का नामकरण ‘विनोबा हिल’ किया गया। उदघाटन के बाद कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल समेत डॉ. भटकर जी और अन्‍य अध्‍यापकों ने विनोबा हिल का भ्रमण किया। इस अवसर पर विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापक, अधिकारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।