हिंदी विश्व्विद्यालय में ‘आदि शंकराचार्य व्याख्यानमाला’ शुरू

  |    April 29th, 2020   |   0

ज्ञानार्जन में शिक्षा,समाजविज्ञान की अहम भूमिका : प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

वर्धा(संवाददाता)- भारतीय संस्कृति के प्रमुख स्तंभ एवं अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रतिपादक आदि शंकराचार्य की 1232वीं जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा “आदि शंकराचार्य व्याख्यानमाला” के अंतर्गत “सामाजिक-शैक्षिक अनुसंधान की दार्शनिक दृष्टि” विषय पर कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने मंगलवार को उदघाटकीय वक्‍तव्‍य दिया।

विश्‍वविद्यालय के फेसबुक पेज पर लाइव व्‍याख्‍यान में प्रो. शुक्‍ल ने कहा कि आज के विश्‍व में अनुसंधान में शिक्षा और समाज विज्ञान की बड़ी भूमिका है और ज्ञानार्जन की प्रक्रिया में इसे अधिक महत्‍व प्राप्‍त हुआ है। मनुष्‍य द्वारा अर्जित ज्ञान को आने वाली पीढ़ी को अंतरित करना ही ज्ञान है। उन्‍होंने कहा कि नवीनता प्रकृति का नियम है परंतु वही ज्ञान नहीं है, ज्ञान एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उनका कहना था कि नित्‍यता और नवीनता ही शिक्षा का जरूरी उपकरण है।

उन्‍होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र के अनुसंधान  में तदभव परिणाम लाया जा सकता है। उन्‍होंने अनुसंधान के विभिन्‍न मॉडलों की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्‍य माध्‍यम, साधन या यंत्र नहीं है, वह एक जैविक इकाइ है। उनका मानना था कि समाज भी तथ्‍यों का संसार है और व्‍यक्ति की सारी भूमिकाएं एक सामाजिक प्राणि की भूमिकाएं हैं। उन्‍होंने शिक्षक व ज्ञान का संबंध, नए ज्ञान की निर्मिति और अनुसंधान का दार्शनिक आधार आदि विषयों पर अपनी बात विस्‍तार से रखी।  

व्‍याख्‍यानमाला के आयोजन को लेकर शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोपाल कृष्ण ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय के शिक्षा विद्यापीठ के अंतर्गत मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की योजना पंडित मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन के तत्वावधान में “आदि शंकराचार्य व्याख्यानमाला” का आयोजन किया गया।

इसके अंतर्गत अगले एक वर्ष तक दर्शन एवं शिक्षाशास्त्र संबंधित अनेक व्याख्यान आयोजित किये जाएँगे। वर्तमान कोरोना आपदा के कारण पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति के बावजूद विभिन्न माध्यमों से विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रसार के लिए संकल्पित है एवं इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहा है। कुलपति प्रो. शुक्‍ल की पहल और मार्गदर्शन पर विभिन्‍न अकादमिक और बौद्धिक विषयों पर व्‍याख्‍यानों और चर्चाओं का सिलसिला लगातार जारी है।