नैतिक शिक्षा हेतु गांधी विचार आज की अहम जरुरत : प्रो. के. एम. मालती

  |    August 21st, 2019   |   0

हिंदी विश्‍वविद्यालय और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का आयोजन

वर्धा(सन्नी गौंड)-आज के समय में जब नैतिक शिक्षा की अत्‍यंत आवश्‍यकता है, महात्‍मा गांधी के विचार अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। गांधी जी ने सर्व धर्म समानता की बात की थी हमें चाहिए कि‍ सर्व धर्म समानता का भाव बोलने से नहीं अपितु उसे अमल में लाकर समाज में प्रसारित किया जाए। उक्‍त विचार कालीकट, केरल की जानी-मानी विद्वान प्रो. के. एम. मालती ने व्‍यक्‍त किए। वह महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्‍त तत्‍वावधान में महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्‍य में 20, 21 और 22 अगस्‍त को ‘गांधी और उनकी समसामयिक प्रासंगिकता : समाज, संस्‍कृति और स्‍वराज’ विषय पर आयोजित राष्‍ट्रीय परिसंवाद में चतुर्थ सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए बोल रही थी।

परिसंवाद के दूसरे दिन के कार्यक्रम (21अगस्‍त) गांधी की कर्मस्‍थली सेवाग्राम आश्रम में आयोजित किए गये। अकादमिक सत्र के प्रारंभ में गांधी जी पर आधारित वृत्‍त चित्र का प्रदर्शन किया गया। सेवाग्राम आश्रम के गांधी भवन में केरल से आयी जानी मानी विद्वान प्रो. के. एम. मालती की अध्‍यक्षता में प्रथम अकादमिक सत्र आयोजित किया गया । इस अवसर पर दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति और प्रख्‍यात गणितज्ञ पद्मश्री दिनेश सिंह, सेंट जेवियर महाविद्यालय, मुंबई के गांधी दर्शन के अध्‍यापक डॉ. अवकाश जाधव, बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय वाराणसीकेगांधीविचार विभाग के संस्‍थापक अध्‍यक्ष प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी ने विचार रखे। सत्र का संचालन विवि के गांधी एवं शांति अध्‍ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं परिसंवाद के संयोजक डॉ. मनोज कुमार राय ने किया।

दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति और प्रख्‍यात गणितज्ञ पद्मश्री दिनेशसिंह ने ‘आधुनिक युग में गांधी की महत्‍ता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि गांधी जी ने जो विचार दिए हैं वह हमारी सभ्‍यता में ऋग्‍वेद और उपनिषदों में पूर्व से ही है। पांच हजार वर्ष पूर्व के विचारों को गांधी ने निखारा, परखा और हमारे सामने रखा। उन्‍होंने कहा कि गांधी जी पर रस्किन, थॉरो और इमर्सन के विचारों का गहरा प्रभाव रहा है। रस्किन की पुस्‍तक अन टू धिस लास्‍ट को उन्‍होंने रेल के प्रवास के दौरान पढ़ा। इस पुस्‍तक से उन्‍हे जिने का ध्‍येय प्राप्‍त हुआ।

प्रो. दिनेश सिंह ने कहा कि गांधी जी ने हाथ का उपयोग करने पर बल दिया है और इसका उन्‍होंने अपने जीवन में उपयोग भी किया है। यही उनके विचारों की प्रासंगिकता है। मार्टिन लुथर किंग और नेल्‍सन मंडेला जैसे विचारकों पर भी गांधी का प्रभाव रहा है और इस मायने में गांधी की अंतरराष्‍ट्रीय प्रासंगिकता का पता चलता है। गांधी जी के जीवन में रेल यात्रा का महत्‍व बताते हुए उन्‍होंने कहा कि भारत को सभी दृष्टि से जानने और समझने के लिए गांधी ने रेल से यात्राएं की।

सेंट जेवियर महाविद्यालय, मुंबई के डॉ. अवकाश जाधव ने ‘शरीर के माध्‍यम से संदेश’ विषय को लेकर गांधी जी ने अपने शरीर के माध्‍यम से अपने संदेश को कैसे जन-जन तक पहुंचाया इसका विश्‍लेषण किया। वाराणसी के प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी ने ‘समन्वित विकास की कुंजी है महात्‍मा गाधी’ विषय पर विचार रखे। उन्‍होंने कहा कि त्‍याग और सेवा का भाव भारतीय सभ्‍यता में निहित है और गांधी जी ने वहीं से सूत्र लेकर अपने जीवन में इसे उतारा है। गांधी ने आत्‍म संयम और इंद्रिय निग्रह से अपने जीवन को चरितार्थ किया और विद्वान की जगह चरित्र को तरजिह दी।

गुरुवार को होगा समापन

राष्‍ट्रीय परिसंवाद का समापन गुरुवार, 22 अगस्‍त को हिंदी विश्‍वविद्यालयात होईल. यावेळी प्रो. पुष्‍पा मोतियानी, अहमदाबाद, प्रो. के. एम. मालती, केरळ, डॉ. सुरेश कुमार, दिल्‍ली, देवजानी चक्रबोर्ती, डॉ. नवी खानगी, नागपुर, प्रो. जी. गोपीनाथन, कालीकट डॉ. शैलेश कुमार मिश्र, वाराणसी, प्रो. मेधा तापियालवाला, मुंबई, डॉ. ऐंजला गंगमई, मणिपुर, डॉ. रवि शेखर सिंह, वाराणसी, डॉ. राणा सांनिया तेजबहादुर, असम विचार मांडतील.

परिसंवाद का समापन प्रो.कुमार रत्‍नम की अध्‍यक्षता में दोपहर 2.00 बजे होगा। इस अवसर पर प्रो.अशोक मोडक, मुंबई, राघवशरण शर्मा,वाराणसी, प्रो. वी. के.वशिष्‍ठ,राजस्‍थान और आर. सी. प्रधान, दिल्‍ली विचार व्‍यक्‍त करेंगे। परिसंवाद का प्रतिवेदन डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा प्रस्‍तुत करेंगे। डॉ. मनोज कुमार राय आभार ज्ञापन प्रस्‍तुत करेंगे।