दिल्ली में होने वाली इन्टरनैशनल पंजाबी कांफ्रेंस का उद्घाटन करेंगे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

  |    January 30th, 2018   |   0

पंजाब एवं पंजाबीयत को संभालने की दिशा में कांफ्रेंस बड़ा कदम : जी.के.

नई दिल्ली (संवाददाता)-  इन्टरनैशनल पंजाबी कांफ्रेंस पंजाबी एवं पंजाबीयत की डगमगाई हुई प्रतिष्ठा को संभालने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इस आशय को दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने श्री गुरु तेग बहादर खालसा कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रकट किया। जी.के. ने बताया कि 2-3 फरवरी को कॉलेज में आयोजित होने वाली पंजाबी कांफ्रेंस का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा मुख्य मेहमान के तौर पर किया जायेगा। कॉलेज के चेयरमैन त्रिलोचन सिंह, प्रिसीपल डॉ. जसविन्दर सिंह तथा दिल्ली विश्वविद्यालय पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रो. मनजीत सिंह ने कांफ्रेंस की जरूरत तथा लक्ष्यों के बारे में जानकारी दी।

जी.के. ने कहा कि पंजाबी हमारी मातृभाषा है। जिसको केवल सिख ही नहीं, मुस्लिम, हिन्दु तथा ईसाई समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में बोलते हैं। दिल्ली कमेटी के इतिहास में पहली बार उच्चकोटि के वक्ता पंजाबी भाषा की जरूरत, गुरमत साहित्य, पंजाबी साहित्य, पत्रकारिता, गद्य, काव्य, नाटक, रोजगार, उच्चशिक्षा, संगीत तथा सूफी कला के बारे अपने अनुभवों को बांटते हुए भाषा के विकास के योग्य तरीके भी समझायेंगे। जी.के. ने कहा कि पंजाब की आर्थिकता को विकास की तरफ मोड़ने की संभावनाओं को ढूढ़ने की दिशा में भी वक्ता अपने विचार रखेंगें।

जी.के. ने माना कि आज पंजाब की आर्थिकता को संभालने के लिए किसान तथा उद्योग-व्यापार को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। अगर आज पंजाब का किसान आत्महत्या कर रहा है तो यह पंजाबियों के डगमगाये हुए आत्मविश्वास का प्रतीक है। इसलिए पंजाब तथा पंजाबीयत की खुशहाली के लिए भाषा प्रेमीयों का यह दर्द फायदेमंद साबित होगा।

त्रिलोचन सिंह ने दिल्ली कमेटी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज पंजाबी भाषा को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कांफ्रेंस में आ रहे विश्वभर के पंजाबी भाषा प्रेमी, साहित्यकार, अर्थशास्त्री, लेखक, पत्रकार, गीतकार, गायक तथा समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता शिरकत करके भाषा के समाज हितेषी इस्तेमाल पर रोशनी डालगें। कांफ्रेंस गैरसियासी प्रभाव देते हुए शिक्षण कांफ्रेंस के स्तर को प्राप्त करे, यह हमारी कोशिश होगी। जसविन्दर सिंह ने बताया कि दोनो दिन 3 शिक्षण सत्र होगें जिसमें पंजाब तथा पंजाबी की अमीर विरासत को खुशहाल बनाने के लिए विचारचर्चा होगी।