मणिपुर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर एक जुट हुआ डूटा, जेएनयूटा और फेडकूटा

  |    August 2nd, 2018   |   0

शिक्षण संस्थानों पर हमला आरएसएस-भाजपा के जनविरोधी मंसूबों को करता है प्रदर्शिता

नई दिल्ली(भावना सैनी)- नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) और कांगलापाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (के.एस.ए) ने बुधवार को मणिपुर विश्वविद्यालय संकट के मुद्दे पर इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प्स पर प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया।ज्ञात हो कि पिछले 2 महीनों से मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी हड़ताल पर हैं और मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति, अद्या प्रसाद पांडे को बर्खास्त करने की माँग कर रहे हैं। यह माँग कुलपति कार्यालय द्वारा की गयी अनियमित्ताओं को लेकर की जा रही है।

प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) और फेडकूटा की पूर्व अध्यक्ष, नंदिता नारायण, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटा) के सचिव, सुधीर सुथर, प्रख्यात शिक्षक एवं महिलाधिकार कार्यकर्त्ता, डॉ. माया जॉन शिरकत की और मीडिया को संबोधित किया।

जेएनयूटा सचिव, सुधीर सुथर ने उच्च शिक्षण संस्थानों पर लगातार हमले किये जाने के खिलाफ अपनी चिंता जताई। उन्होंने यह कहा कि मणिपुर विश्वविद्यालय का मुद्दा एकलौता मुद्दा नहीं है और इस तरह से विश्वविद्यालयों में संकट पैदा करने की कोशिश डीयू, हैदराबाद विश्वविद्यालय एवं अन्य विश्वविद्यालयों में हो चुके हैं।

डूटा एवं फेडकूटा की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कुलपति को उनके पद पर बने रहने देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की आलोचना की और कहा कि यह कदम पूर्व स्थापित नियमों के खिलाफ है जिसमे उस प्रशासनिक अधिकारी को छुट्टी पर भेज दिया जाता था जिसके खिलाफ कार्रवाई चल रही होती थी। डॉ. माया जॉन ने अपने वक्तव्य में कहा कि भाजपा सरकार अपनी नीतियों द्वारा उच्च शिक्षा में निजीकरण ला रही है। साथ ही, अपने नुमाइंदों को पदों पर बिठाकर जनतान्त्रिक आन्दोलनों को दबाने का प्रयास कर रही है। के.एस.ए के उपाध्यक्ष ने भी मीडिया को सम्बोधित कर उन्हें विश्वविद्यलय के जमीनी हालात से अवगत कराया। उन्होंने भाजपा सरकार को छात्रों का हित नज़रंदाज़ करने का दोषी बताया।

ज्ञात हो कि दो महीने से जारी हड़ताल के पीछे कुलपति का गंभीर आरोपों के बावजूद अपने पद पर बने रहना कारण है और इस वजह से विश्वविद्यालय का कार्य ठप्प है और छात्रों का भविष्य अधर में है। इस मामले में एम.एच.आर.डी का भी उदासीन रवैया साफ़ ज़ाहिर होता है, जिसने कुलपति के खिलाफ जांच बिठाने के बावजूद, उनको पद पर बने रहने दिया है। केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर रवैया प्रदर्शित करता है कि उसका विश्वविद्यालय का अकादमिक वातावरण नष्ट करने में कुलपति के साथ गठजोड़ है। केंद्र भाजपा सरकार के इस उदासीन रवैये के पीछे सार्वजनिक उच्च शिक्षण संस्थानों को खत्म करना कारण है। फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (एफ.टी.आई.आई) से लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय तक भाजपा-आरएसएस सरकार ने अपने नुमाइन्दों को प्रशासनिक पदों पर बिठाया है ताकि अकादमिक माहौल को ठप्प किया जा सके और निजीकरण को बढ़ावा दिया जा सके।

भारत का उत्तर-पूर्व क्षेत्र पहले से ही उच्च शिक्षण संस्थानों से वंचित रहा है। अब सरकार की निजीकरण और उच्च शिक्षण संस्थानों को खत्म करने की नीति का असर मणिपुर विश्वविद्यालय पर भी पड़ रहा है| मणिपुर विश्वविद्यालय में मौजूदा संकट भाजपा सरकार की इन्ही नीतियों का चरम रूप है।

ज्ञात हो कि कल के कार्यकर्ताओं ने मणिपुर एवं अन्य राज्यों के छात्रों और अन्य संगठनों के साथ मिलकर केंद्र मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी) के खिलाफ विशाल प्रदर्शन किया| इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र-प्रतिनिधियों ने भी हिस्सेदारी निभाई थी| प्रदर्शन कर रहे छात्र मणिपुर विश्वविद्यालय कुलपति, अद्या प्रसाद पांडे को बर्खास्त करने की माँग कर रहे थे, और इस मुद्दे को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर से मिलना चाहते थे। परन्तु, दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें बर्बरतापूर्वक हिरासत में लेकर, संसद मार्ग पुलिस थाने में डिटेन किया गया| छात्रों एवं नेफिस और के.एस.ए कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक ज्ञापन और आम छात्र-जनता के हस्ताक्षर सौंपकर कुलपति को तुरंत बर्खास्त करने की माँग उठाई।

मणिपुर विश्वविद्यालय कुलपति पर भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, प्रशासन में अनियमित्ता, अकादमिक माहौल को खत्म करने और  गबन के गंभीर आरोप हैं| उनके कार्यालय द्वारा गैर-कानूनी रूप से छात्र संगठन, एबीवीपी को चन्दा दिया गया| साथ ही, विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव कौंसिल और फाइनेंस कौंसिल के साथ बैठक न करना, कोर्ट मीटिंग की उपेंक्षा करना, गैर-कानूनी रूप से पदों को भरना और शिक्षकों के प्रमोशन को रोकना उनके ऊपर लगे आरोपों में शामिल हैं| नेफिस ने जल्द ही मांगें न माने-जाने की स्थिति में अपना आन्दोलन और तेज़ करने का ऐलान किया है।