डीयू के हजारों शिक्षक वी.सी ऑफिस में हड़ताल पर, दूसरे दिन भी डीयू में भारी पुलिस बल का इंतजाम

  |    December 6th, 2019   |   0

मांगें ना माने जाने तक शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन रहेगा जारी : प्रो.हंसराज

नई दिल्ली(संवाददाता)- दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ(डूटा) के आहवान पर बुधवार से ही हजारों शिक्षक रातभर एकेडेमिक काउंसिल हॉल व कुलपति कार्यालय में जमे हुए हैं।अभी तक उनका हाल जानने प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया।शिक्षकों ने पूरी रात कुलपति कार्यालय में रहकर गुजारी। प्रशासन का कहना है कि शिक्षक पहले वीसी ऑफिस खाली करे तभी उनकी मांगों पर चर्चा होगी। डूटा अध्यक्ष डॉ. राजीव रे डॉ. राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में यह धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।

डूटा द्वारा दिया जा रहा धरना प्रदर्शन के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को सुबह जब शिक्षक कुलपति कार्यालय पहुंचने लगे तो इसमें सुबह 9 बजे से पहले जो शिक्षक पहुंचे वह वाइस चांसलर ऑफिस के अंदर पहुंच गए लेकिन जैसे ही डीयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष के पास लिखित पत्र आया जिसमे प्रॉक्टर का लिखित बयान में कहा गया था कि शिक्षकों की हड़ताल गैर कानूनी है, उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया है इसलिए वाइस चांसलर ऑफिस को खाली कर दे।जो शिक्षक अंदर थे वे वहीं रहे ,बाहर से शिक्षकों को अंदर नहीं जाने दिया गया।सारे दरवाजे बंद कर दिए गए।

शिक्षकों ने वीसी ऑफिस की ग्रिल तोड़ी- दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने बताया सुबह जब शिक्षकों को जैसे ही पता चला कि वाइस चांसलर ऑफिस के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए हैं उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है तो शिक्षकों ने वीसी ऑफिस की ग्रिल तोड़ दिया जिससे भारी संख्या में पुलिस बल का इंतजाम करना पड़ा। शिक्षकों ने ग्रिल व दरवाजे को तोड़ने का प्रयास किया तो भारी पुलिस बल ने बल का प्रयोग किया जिसमें कुछ शिक्षकों को चोट लगी।डॉ. टी एन ओझा, प्रो.हंसराज’सुमन’, लक्ष्मण सिंह यादव, डॉ. युद्धवीर शर्मा के अलावा कई महिला शिक्षकों को चोटें आईं।

क्या है सारा मामला-प्रो. हंसराज’सुमन ‘ने बताया है कि शिक्षकों की मांग है कि डीयू प्रशासन द्वारा जारी 28 अगस्त का पत्र जिसमे यह निर्देश दिया गया है कि एडहॉक शिक्षकों को इस पत्र के बाद से गेस्ट टीचर्स(अतिथि शिक्षक) में पदों को तब्दील किया जाए। 28 अगस्त के बाद नवम्बर/दिसम्बर में इन एडहॉक शिक्षकों को फिर से रिज्वाईनिंग(पुनर्नियुक्ति) की जानी थी लेकिन कॉलेज प्रिंसिपलों ने उन्हें रिज्वाईनिंग नहीं दी, कुछ कॉलेजों ने रिज्वाईनिंग दे दी मगर उन्हें सहायक प्रोफ़ेसर(एडहॉक) का लेटर अभी तक नहीं मिला है जिसके कारण एडहॉक शिक्षकों को वाइस चांसलर ऑफिस पर धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है।उनका कहना है कि यदि 28 अगस्त का पत्र वापिस नहीं होता है तो इससे हजारों शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे।जो पिछले एक या उससे अधिक समय से एडहॉक पढ़ा रहे हैं।

एससी,एसटी,ओबीसी शिक्षकों पर पड़ेगा असर-प्रो.सुमन ने बताया है कि 28 अगस्त के पत्र का सबसे ज्यादा असर आरक्षित वर्गों के शिक्षकों पर पड़ेगा।इस पत्र के बाद उन्हें भी व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा जबकि वे अपनी स्वीकृत पदों पर पढ़ा रहे हैं।विश्वविद्यालय प्रशासन के इस आदेश के बाद उन्हें भी गेस्ट टीचर्स में तब्दील कर दिया जाएगा।

28 अगस्त के पत्र के बाद कॉलेजों ने नहीं दी सैलरी–उन्होंने बताया है कि कुछ कॉलेजों ने नवम्बर माह का शिक्षकों को वेतन नहीं दिया है ,कुछ कॉलेजों ने उन्हें 17 या 18 दिन का वेतन दिया है।साथ ही अभी तक उन्हें एडहॉक टीचर्स का लेटर जो हर चार महीने बाद मिलता है, नहीं मिला है जिसके कारण डूटा ने शिक्षकों की उचित मांगों के समर्थन में यह कदम उठाया है।उनका कहना है कि डूटा  वीसी ऑफिस से तभी उठेगा जब उनकी मांग–28 अगस्त का पत्र की वापसी, स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति और 3000 शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता नहीं खुल जाता उनका धरना- प्रदर्शन जारी रहेगा।

डीयू में 60 फीसदी शिक्षक है एडहॉक–प्रो. सुमन ने बताया है कि वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में 60 फीसदी शिक्षक एडहॉक है।ये शिक्षक पिछले 10 से 15 वर्षो से कार्य कर रहे हैं।महिला शिक्षकों को किसी तरह की मेटरनिटी लिव, चिकित्सा या अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।इन्हें स्थायी करने के लिए विश्वविद्यालय/कॉलेजों ने दो बार विज्ञापन भी निकाले,पदों की स्क्रीनिंग होने के बावजूद आज तक इन्हें भरने के लिए प्रशासन ने कोई निर्देश जारी नहीं किए जिससे हर साल शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनके स्थान पर एडहॉक शिक्षक लगाया जाना चाहिए मगर उसके स्थान पर कॉलेज गेस्ट टीचर(अतिथि शिक्षक ) लगा रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय में कितने पदों पर होनी है नियुक्ति–प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभागों में- 865 और कॉलेजों में 5043 पद रिक्त पड़े हैं।हालांकि विश्वविद्यालय ने –857 रिक्तियों को भरने के लिए विज्ञापन जारी  कर दिया है।इसके अलावा 26 कॉलेजों ने अपने विज्ञापन दिए हैं जिसमे लगभग 2500 पदों का विज्ञापन दिया गया है।प्रो. सुमन ने आगे बताया है कि वर्तमान में 31 अक्टूबर,2019 के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर–167 ,एसोसिएट प्रोफेसर–431 ,सहायक प्रोफ़ेसर–267 सहित कुल-865 रिक्तियां है।

संसद में मिल चुका आश्वासन-मार्च 2017 में संसद के एक प्रश्न के जवाब में कहा गया था कि एक साल के अंदर सभी एडहॉक टीचर्स की वेकेंसी को भर लिया जाएगा।इन पदों पर स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का बात कही गई थी लेकिन लगभग तीन साल होने को आए आज तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की।लॉ डिपार्टमेंट, शिक्षा विभाग, मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के अलावा दौलतराम कॉलेज के एक विभाग में नियुक्ति होने के बाद रोक दी गई।

उनका कहना है कि आज सुबह से शिक्षकों का आना शुरू हो गया था दोपहर तक हजारों शिक्षक वाइस चांसलर ऑफिस पहुंच चुके थे जो शाम तक डटे हुए हैं और रात को भी डटे रहेंगे।वीसी और मंत्रालय से जब तक कोई सकारात्मक आदेश नहीं आ जाता तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।