डीयू के ओपन बुक एग्जाम का विरोध तेज, शिक्षकों ने घरों में रहकर ही की भूखहड़ताल

  |    May 27th, 2020   |   0

नई दिल्ली (भारती सैनी)- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ओपन बुक एग्जाम कराने के विरोध में डीयू के शिक्षकों द्वारा घरों में रहकर ही विरोध किया जा रहा है। ओपन बुक एग्जाम का विरोध करते हुए एमएचआरडी और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से तुरंत इसे वापिस लेने की मांग की है।

16 मई से शिक्षकों व छात्रों ने इस विरोध को और व्यापक स्तर पर किया। “फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस” के तत्वावधान में मंगलवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक शिक्षकों, शोधार्थियों ने अपने घरों में रहकर लॉक डाउन का पालन करते हुए डीयू प्रशासन का विरोध किया। विरोध कर रहे शिक्षकों व छात्रों ने कहा कि ऑन लाइन ओपन बुक एग्जाम कराए जाने का हम पहले भी विरोध कर चुके हैं उसी कड़ी में आज फिर एक दिन की भूख हड़ताल करके अपना विरोध प्रकट कर रहे हैं। इस भूख हड़ताल में पर प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ प्रो. कैलास प्रकाश सिंह, डॉ. विनय कुमार, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. राजेन्द्र सिंह, डॉ. राजकुमारी, श्रीमती ज्योति, मनीष माहौर डॉ.अनिल, डॉ. संदीप कुमार, केदारनाथ व संजीव तोमर समेत दर्जनों छात्र भी शामिल रहे।

श्री अरबिंदो कॉलेज के प्राध्यापक प्रो. हसराज सुमन ने ओपन बुक एग्जाम की पुर जोर विरोध करते हुए कहाकि डीयू का यह कदम असहनीय है, इतना ही नहीं इस व्यवस्था को डीयू की सुप्रीम संस्था विद्वत परिषद और कार्यकारी परिषद से भी पास नहीं कराया गया। ना ही अधिष्ठाता, विभागाध्यक्षों, कॉलेज प्राचार्यो के साथ इस मुद्दे पर किसी तरह कोई विचार विमर्श हुआ।  इसे छात्रों पर मनमाने तरीके से जबरदस्ती थोपा जा रहा है।

प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘ ने कहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में ओपन बुक एग्जाम की अधिसूचना जारी होने के बाद से शिक्षकों और छात्रों का विरोध जारी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में लाखों छात्र ग्रामीण परिवेश और गरीबी जिंदगी से निकलकर आए हैं। उनके पास न तो तकनीकी व्यवस्थाएं, स्मार्टफोन, इंटरनेट, लेपटॉप, कम्प्यूटर, वाईफाई इत्यादि की सुविधाएं उपलब्ध है और ना ही उनके गांवों में। ऐसी स्थिति में वे इस प्रक्रिया से कैसे जुड़ पाएंगे।             

प्रोफेसर सुमन का कहना है कि हम ऑन लाइन परीक्षा पद्धति का पूरी तरह से बहिष्कार करते हैं और सलाह देते है कि इस पद्धति को तुरंत वापिस लिया जाए और पहले से चली आ रही लिखित परीक्षा पद्धति को ही अपनाते हुए शैक्षणिक गतिविधियों को पुनः संचालित किया जाए।

आर्य भट्टकॉलेज के प्रो.कैलास प्रकाश सिंह का कहना है कि ओपन बुक एग्जाम को लागू करने से पूर्व डीयू प्रशासन ने शिक्षकों, छात्रों से किसी तरह की कोई राय नहीं ली और ना ही छात्रों के बीच सर्वे कराया गया।

इस मुद्दे पर शोधार्थी राजकुमार सरोज का कहना है कि इस पद्ति से होने वाले एग्जाम से सबसे अधिक एसओएल और नॉन कॉलेजिएट के छात्र प्रभावित होंगे।