डीयू में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष बने प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन

  |    March 4th, 2020   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फ़ॉर सोशल जस्टिस (दिल्ली विश्वविद्यालय) के चेयरमैन  प्रोफेसर हंसराज ‘सुमन ‘ व महासचिव डॉ. कैलास प्रकाश सिंह ने प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन को दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग का विभागाध्यक्ष बनने पर उन्हें विभाग कार्यालय में जाकर पुष्प गुच्छ देकर बधाई दी।

प्रोफेसर बेचैन को बधाई देने वाले लेखक, साहित्यकार व शिक्षकों का दिनभर तांता लगा रहा।हालांकि वरिष्ठता के आधार पर उन्हें छह महीने पहले विभागाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों के चलते उस समय विभागाध्यक्ष नहीं बना पाए,फोरम और अनेक सामाजिक संगठनों ने यह लड़ाई लड़ी।आखिरकार सामाजिक न्याय की जीत हुई, उन्हें विभागाध्यक्ष बनाया गया।

फोरम के चेयरमैन व पूर्व सदस्य एकेडेमिक काउंसिल प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ ने  जाने-माने दलित चिंतक, वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन के विभागाध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के 72 वर्षो के इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई दलित प्रोफेसर इस पद पर आसीन हुआ।इससे एक ओर जहां सामाजिक न्याय की जीत हुई है वहीं पर यह साबित होता है कि हिंदी साहित्य की दुरूह परम्परा में दलित भी इस ऊंचाई तक अपनी पहचान बनाने में पीछे नहीं रहे प्रोफेसर बेचैन इसके उदाहरण हैं।

बधाई देते हुए प्रोफेसर सुमन ने कहा कि अकादमिक जगत में जब हाशिए के समाज से कोई अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाता है तो इसका अर्थ है कि देश का एक पिछड़ा तबका समाज के कल्याण हेतु अपना योगदान कर रहा है।दलित समाज में इस बात की प्रतिष्ठा के साथ-साथ एक प्रेरणा भी मिलेगी ताकि आने वाले समय में लोग अकादमिक दुनिया में उत्तरोत्तर शामिल हो और बेहतर साहित्य में अपना स्थान सुनिश्चित कर अपने समाज के यथार्थ को प्रतिबंधित करे।

उन्होंने बताया है कि पिछले छह महीने से असमंजस्य की स्थिति बनी हुई थी।12 सितम्बर को विभाग के अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हो चुका था और समकुलपति ने 12 सितम्बर को ही आने वाले अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष को बुलाकर प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कराई लेकिन 13 सितम्बर से यह पद खाली था जिसे लंबे संघर्ष के बाद आज उन्हें विभागाध्यक्ष बनाया गया।

फोरम के महासचिव प्रो. के पी सिंह ने  प्रोफेसर श्योराज सिंह बेचैन के विभागाध्यक्ष बनने की बधाई देते हुए कहा कि यह  सामाजिक न्याय की सच्ची जीत है।उनके बनने से दलित समाज के शोधार्थियों और शिक्षकों को आगे आने के अवसर प्राप्त होंगे।उनका नाम दलित साहित्य में जाना-माना नाम है।उन्होंने कहा कि प्रोफेसर बेचैन घोषित रूप से दलित समाज से आते हैं और आज वे दलित साहित्य में एक प्रतिष्ठित लेखक भी है।उन्होंने यह भी बताया है कि हाल ही में उन्हें हिंदी अकादमी पुरस्कार दिया गया है।साथ ही अनेक विश्वविद्यालयों के हिंदी पाठ्यक्रमों में उनकी आत्मकथा व उनकी कविताएं पढ़ाई जा रही है। वे योग्यता के मामले में किसी सामान्य वर्ग के प्रोफेसर से कहीं ज्यादा ही हैं।

प्रोफेसर बेचैन को विभाग में बधाई देने वालों में डॉ. सोहनपाल सुमनाक्षर, डॉ. रामजी लाल, डॉ. ज्ञानप्रकाश, डॉ. श्रवण कुमार आदि थे।