लेखनी का इस्तेमाल संजीदगी से करना चाहिए, एक गलत शब्द समाज में दावानल पैदा कर सकता है : जोशी

  |    January 24th, 2020   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)-भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय के आईजीएनसीए केंद्र के सदस्य सचिव डाक्टर सचिदानंद जोशी ने कहा कि लिखने वालों को लेखनी का इस्तेमाल बहुत संजीदगी से करना चाहिए, क्योंकि एक गलत शब्द समाज में दावानल पैदा कर सकता है।श्री जोशी दिल्ली प्राद्यौगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में 23 से 25 जनवरी तक आयोजित होने वाले युवान-2020 “लिट्रेचर एंड फिल्म फेस्टिवल” के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।

उन्होने कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह एक सबसे उत्तम अवसर है, जहां वह अपनी क्रिएटिविटी का बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होने कहा कि मुझे लगता है कि इंजीनियर्स में शायद सबसे ज्यादा क्रिएटिविटी होती है और ये क्रिएटिविटी ही आदमी को इंसान बनाती है। इसके साथ ही उन्होने विद्यार्थियों से बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा मौका आसानी से नहीं मिलता जहां हॉलीवुड के लोग आपके लिए कास्टिंग करने को बैठे हों।

जोशी ने उन्होने लेखन से जुड़े विद्यार्थियों से कहा कि लिखने के लिए आपके हाथ में ये जो कलम, आइपैड, कीबोर्ड या माउस हैं, ये हथियार नहीं बल्कि अपनी चीज को प्रस्तुत करने का तरीका हैं। इनका इस्तेमाल बहुत ही संजीदगी से करना चाहिए। क्योंकि एक गलत शब्द समाज में दावानल पैदा कर सकता है। उनसे पूर्व हॉलीवुड से जुड़े एवं “लाइफ आर्ट फेस्टिवल” के फाउंडर रान मोर ने इस भव्य आयोजन के लिए आयोजकों की टीम व विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी।

इस अवसर पर डीटीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अक्सर यह सोचा जाता है कि साहित्य तकनीक से संबंधित लोगों के लिए नहीं है, परंतु ये सच है कि मानव तो मानव ही हैं। वह किसी भी भूमिका में हों, उनमें भावनाएँ तो होती ही हैं। उन्होने कहा कि इंजीनियर की तो प्रकृति ही रचनाशील व कल्पनाशील होती है। अगर ऐसा नहीं होता तो आज हमारे सामने यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म नहीं होते।

कुलपति ने कहा कि साहित्य से जुड़ना व किताबें पढ़ना जीवन में बहुत ही जरूरी है। उन्होने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि यदि आप अच्छी पुस्तकें पढ़ोगे तो अच्छे बनोगे। यदि आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो पुस्तकें इसमें बहुत अहम रोल अदा करती हैं। इसके साथ ही उन्होने चिंता जताते हुए कहा कि पढे लिखे लोगों में करुणा की कमी सबसे बड़ी चिंता का विषय है।

समारोह के अंत में मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों को कुलपति द्वारा सम्मानित किया गया। इसके पश्चात कोरियन कल्चर सेंटर द्वारा ताइक्वांडो की प्रस्तुति भी दी गई। इस अवसर पर यूवान समारोह के मैंटर एवं डीवाईसीए कंसल्टेंट अनूप लाठर, डीन स्टूडेंट वेल्फेयर प्रो. एस. इन्दु व लिट्रेचर एंड फिलम काउंसिल की फ़ैकल्टी एडवाइजर डा. यशा हसीजा सहित कई शिक्षक व अनेकों विद्यार्थी उपस्थित थे।