घरेलू कामगारों का गुरुग्राम के लघु सचिवालय पर धरना-प्रदर्शन

  |    November 21st, 2017   |   0

नई दिल्ली (निशा सिंह)- गुरुग्राम के लघु सचिवालय के समाने मंगलवार को घरेलू कामगार यूनियन (जी.के.यू) के नेतृत्व में कामगारों ने अपनी विभिन्न मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया।  इस प्रदर्शन में  गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में घरेलू कामगार महिलाएं शामिल हुई। इन कामगारों में बहुसंख्यक हिस्सा अन्य राज्यों से यहाँ आकर काम करने वाले गरीब, आदिवासी, अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्ग समुदाय के लोगों का है।

घरेलू काम में संलिप्त कामगारों का बड़ा हिस्सा महिलाओं और बच्चों का हैं। यह सभी कामगार बेहद गरीब हैं और कमजोर आर्थिक व सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण अति-शोषित दरों पर काम करने को मजबूर हैं। चूँकि सरकार द्वारा घरेलू काम करने वाले कामगारों की कार्यस्थिति सम्बन्धी कोई नियमन नहीं है, काम के स्थानों पर इनके अधिकारों की रक्षा और इनकी सुरक्षा का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है।

यह बात संज्ञान में लाना आवश्यक है कि गुरुग्राम की विभिन्न आवासीय सोसाइटी और कोठियों में घरेलू कामगारों को दिया जाने वाला वेतन, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम है। अधिकांश मालिक समय से वेतन नहीं देते और कई बार मालिक महीने-दो महीने बाद वेतन देने का वादा कर मनमाना काम करवाते हैं और फिर बिना तनख्वाह दिए काम से बाहर कर देते हैं। इसके साथ ही किसी प्रकार के कानूनी नियंत्रण से बाहर होने के कारण ज्यादातर कामगारों को समय से वेतन नहीं दिया जाता है जिसके माध्यम से घरेलू कामगारों को जबरदस्ती काम करते रहने को मजबूर किया जाता है। कई बार घरेलू कामगारों को बिल्डिंग में अन्य जगह भी नो-एंट्री करवाकर काम करने से रोका जाता है। यह ऐसी समस्याएं हैं, जो घरेलू कामगारों को रोज़ झेलनी पड़ती हैं। साथ ही हफ्ते का अवकाश या बीमार पड़ने पर छुट्टी भी नहीं दी जाती है।

कामगारों ने घरेलू कामगार यूनियन (जी.के.यू) की संयोजिका डॉ. माया जॉन के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें घरेलू कामगारों के साथ हिंसा व पुरुष मालिकों द्वारा यौन-शोषण की समस्याओं की रोकथाम के लिए इन्तेजाम किये जाने की मांग की। इस सम्बन्ध में ध्यान देने की बात है कि घरेलू कामगारों के साथ हिंसा व यौन-शोषण की घटनाओं के होने पर पुलिस द्वारा एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जाती है और ज्यादातर मौकों पर शिकायत करने पहुँचे कामगारों और परिवारजनों को या तो डरा-धमकाकर कर भगा दिया जाता है या मामले को रफा-दफ़ा करने का प्रयास किया जाता है। जिन आवासीय सोसाइटी में कामगारों को काम करने के लिए रखा जाता है, वहां भी कार्यस्थल में महिलाओं का यौन उत्पीड़न (सुरक्षा,रोकथाम व निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत बनाई जाने वाली यौन-उत्पीड़न रोकथाम समिति नहीं स्थापित की गयीं हैं।

डिप्टी कमिश्नर को संबोधित ज्ञापन में निम्नलिखित मांगों को उठाया गया था:

  1. मालिकों/मैडम द्वारा बिल्डिंग में नो-एंट्री को गैर-कानूनी घोषित किया जाए।
  2. बकाया वेतन न देने वाली मैडम पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  3. घरेलू कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए हरियाणा सरकार क़ानून बनाये।
  4. पुलिस घरेलू कामगारों की शिकायत को लिखे और उसपर तुरंत कार्रवाई की जाए।
  5. घरेलू कामगारों का वेतन महीने की शुरुआत में तीन दिन के अन्दर एकाउंट में दिया जाए।
  6. सभी घरेलू कामगारों को हफ्ते में एक दिन की छुट्टी (साप्ताहिक अवकाश) का अधिकार दिया जाए।
  7. गुरुग्राम में घरेलू कामगारों का वेतन निर्धारित करने और उनकी समस्याओं के निवारण के लिए एक आय बोर्ड/त्रिपक्षीय कमिटी का गठन किया जाए, जिसमे मालिकों, कामगारों और प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद हों।
  8. यह सुनिश्चित किया जाए कि घरेलू कामगारों के काम का पैसा आय बोर्ड/ कामगारों के यूनियन द्वारा तय दर के अनुसार दिया जाए।
  9. यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून, 2013 के तहत घरेलू कामगारों की सुरक्षा के लिए सभी बिल्डिंग में यौन-शोषण रोकथाम कमिटी बनाई जाए। अगर, हाऊसिंग सोसाइटी यह कमिटी नहीं बनाती हैं तो प्रशासन द्वारा यह कमिटियाँ गठित की जाएँ।
  10. मालिकों के घर में ही रहने वाले घरेलू कामगारों की सूची पुलिस और कामगारों के यूनियन को दिया जाए।
  11. घरेलू कामगारों के लिए बिल्डिंग में रेस्टरूम (आराम के लिए जगह) का इंतेजाम किया जाए|
  12. घरेलू कामगारों की समस्याओं को सुलझाने के लिए सभी बिल्डिंगों में शिकायत निवारण केंद्र बनाया जाए, घरेलू कामगारों ने अपनी मांगों के नहीं माने जाने तक अपना संघर्ष जारी रखने का निर्णय लिया है।