दिव्यांगों को अपनी सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए : डा.शाहिद अख्तर

  |    January 10th, 2019   |   0
विश्व पुस्तक मेले में उर्दू परिषद के तत्वाधान में ‘‘समावेश:सशक्तिकरण की ओर पहला कदम’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन

नई दिल्ली(संवाददाता)- विश्व पुस्तक मेला 2019 का थीम दिव्यांगों से संबंधित रखा गया है। इस थीम के चयन से दिवयांगों के प्रति भारत सरकार की नेक भावना उजागर होती है। सरकारी स्तर पर देश के भीतर माननीय नरेंद्र मोदी जी ने दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए अनेक अहम कदम उठाए हैं जो सराहनीय हैं। यह बातें राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक डा. शेख अकील अहमद ने विश्व पुस्तक मेले में उर्दू परिषद के तत्वाधान में ‘‘समावेश:सशक्तिकरण की ओर पहला कदम’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि दिव्यांगों के बारे में समाज और लोगों को अपनी सोच में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। हमें दिव्यांगों के प्रति समानता की भावना रखने की आवश्यकता है और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के प्रयास किए जाने चाहिएं। निदेशक महोदय ने आगे कहा कि उर्दू परिषद ब्रेल लिपी में उर्दू सिखाने की एक पुस्तक प्रकाशित करेगी ताकि दृष्टिहीन भी उर्दू सीख सकें।

इस अवसर पर उर्दू परिषद के उपाध्यक्ष व इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. शाहिद अख्तर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को लोगों की सोच और उनके व्यवहार पर ध्यान देने की बजाय अपने पैरों पर खड़े होकर लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। दुनिया ऐसे ही लोगों को सम्मान की दृष्टि से देखती है जिनमें कुछ कर दिखाने का जज्बा मौजूद होता है। उन्होंने दिव्यांगों के प्रति समाज  में नैतिक शिक्षा को आम करने पर जोर दिया साथ ही ऐसे लोगों की सेवाओं पर उर्दू में एक पुस्तक प्रकाशित करने का भी सुझाव दिया।

चर्चा में शामिल फेैजुल्लाह खान ने कहा कि दिव्यांगों के प्रति अधिकार और हक की बात तभी कारगर होगी जब हम अपनी सोच में सकारात्मक बदलाव लाएं। डा. असगर अली ने कहा कि ऐसे अहम विषय पर चर्चा करना ही समाज की सकारात्मक सोच का परिचायक है। हमें इस विषय पर और अधिक विचार विमर्श करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर  सौरभ राय ने कहा कि सरकारी स्तर पर दिव्यांगों के लिए कानून का लागू होना तो ठीक है लेकिन इससे बढ़कर हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम उनके प्रति कैसा रवैय्या रखते हैं। प्रो. नसर शकील रूमी ने कहा कि हमें अपने आपको असहाय मानने की आवश्यकता नहीं है। हमारे भीतर सेहतमंद लोगों की तरह कुछ कर दिखाने का जज्बा होना चाहिए। इस कार्यक्रम में उर्दू परिषद से प्रकाशित तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।