आज पत्रकारिता में आक्रामकता ज्यादा पत्रकारिता कम है : के जी सुरेश

  |    April 13th, 2018   |   0

                                                   दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में पहले मीडिया महोत्सव का आयोजन

नई दिल्ली (आर.के. शर्मा)- दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म में पहले दो दिवसीय मीडिया महोत्सव का आयोजित किया गया। जिसके पहले दिन सात इंटरकॉलेज प्रतियोगिताओं-क्विज, आरजे हंट, एड-मैड, भाषा प्रतियोगिता, क्रिएटिव राइटिंग, स्पॉट फोटोग्राफ़ी और कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। दिल्ली के सभी कॉलेजों के छात्रों ने बड़ी संख्या में  भागीदारी की।

दूसरे दिन मीडिया और राष्ट्रवाद पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, के.जी सुरेश, आईआईएमसी के निदेशक, डॉ उमा शंकर पांडे प्रोफेसर, मास कम्युनिकेशन, कोलकाता विश्वविद्यालय, सुश्री स्मिता प्रकाश, संपादक एएनआई, आलोक बाजपेई, कानपुर, डॉ. अवनीजेश अवस्थी, प्रोफेसर, पीजीडीएवी कॉलेज और प्रोफेसर शांता एन वर्मा प्रो. राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने भाग लिया।

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म की ओएसडी मानसविनी एम योगी ने बताया कि दूसरा दिन ‘मीडिया और राष्ट्रवाद’ पर संगोष्ठी के साथ शुरू हुआ। आमंत्रित वक्ताओं ने अपने विचार रखे। के जी सुरेश मुख्य वक्ता रहे। सुरेश ने जोर देकर कहा कि मीडिया सच्चाई दिखाने के लिए जिम्मेदार है। वास्तविक पत्रकारिता यह है कि जो राष्ट्र के हित में है उन्होंने कहा कि ‘मीडिया में गहरा ध्रुवीकरण किया गया है’ मीडिया में आज पत्रकारिता में आक्रामकता ज्यादा पत्रकारिता कम है। कई बार समाचारों के साथ विचारों को मिलाया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि युवाओं को समर्पित पाठक होना चाहिए और फिर वे अच्छे पत्रकार बन सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने संस्कृत में एक पाठ्यक्रम पेश किया तो इसे शिक्षा का भगवाकरण के रूप में  के रूप में उजागर किया गया, लेकिन जब उन्होंने अन्य भाषाओं में एक पाठ्यक्रम पेश किया तो उन पर कोई त्प्पिनी नहीं की। इस प्रकार का तर्क किसी भी दृष्टि से औचित्य से परे है। उन्होंने संविधान 19 के संधर्भ कहा कि इसका अर्थ है भाषण की और अभिव्यक्ति की आजादी इसका अर्थ भाषण का लाइसेंस नहीं है, क्योंकि इसमें उचित प्रतिबंध भी हैं। उन्होंने कहा कि क्यों मीडिया केवल पत्थर के मारने  वालो को ही कवर करता है ?, क्यों वे कश्मीरी युवा को कवर नहीं करते हैं जो भारतीय सेना में शामिल हो रहे हैं और राष्ट्र की सेवा के लिए पुलिस में भी ।

सभा को संबोधित करते हुए सुश्री स्मिता प्रकाश ने कहा कि घरों में बदलाव आना होगा। युवाओं को अपने दिन-प्रतिदिन परिवारों में व्यवहार करने में परिवर्तन लाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने पढ़ने और पढ़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। डॉ. अवनीजेश अवस्थी, डॉ. उमाशंकर पांडे और प्रोफेसर शांता एन वर्मा ने भी राष्ट्रवाद और भारतीया के बारे में बात की।

डॉ. आलोक बाजपेई ने मीडिया और गांधी के बारे में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।दोपहर सत्र में  मीडिया और राष्ट्रवाद के अनेक सम्भंदित विषयों एवं   उप विषयों पर असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसरों द्वारा पत्रों की प्रस्तुति कि गई। शाम को शांतानु अरोड़ा और उनके बैंड की शानदार प्रस्तुति के  के बाद कार्यक्रम सफल समापन किया गया।