त्यौहारों के मौसम में भी दिल्ली के बाज़ारों से रौनक गायब

  |    October 7th, 2019   |   0

ऑनलाइन बिक्री ने छीना व्यापार

नई दिल्ली(संवाददाता)- ज्यों-ज्यों दिवाली का त्योहारी सीजन नजदीक आ रहा है त्यों त्यों दिल्ली के व्यापारियों की इस सीजन में अच्छा व्यापार करने की आशा धूमिल होती जा रही है क्योंकि बाज़ारों में ग्राहकी बेहद कम है और व्यापारियों के पास सामान के स्टॉक का अम्बार लगा हुआ है। एक तरफ व्यापारियों के व्यापार पर ऑनलाइन व्यापार की मार पड़ पर रही है तो दूसरी ओर बाज़ार में नकद तरलता के बेहद अभाव है।

इस स्तिथि को देखते हुए दिल्ली के सभी बाज़ारों में बेहद निराशा का माहौल है, त्योहारी बिक्री की कोई गहमा गहमी नहीं है और त्योहारों के होते हुए भी सभी प्रमुख खुदरा एवं थोक बाजार पूरी तरह सुनसान पड़े हैं ! उधर दूसरी तरफ सीलिंग पर बनी मॉनिटरिंग कमेटी से सीलिंग का साया भी व्यापारियों पर बुरी तरह मंडरा रहा है जिसने दिल्ली के सदियों पुराने व्यापारिक वितरण स्वरुप की चूलें हिला कर रख दी हैं।

कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बाज़ारों की वर्तमान स्तिथि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा की दिल्ली के बाज़ारों में व्यापार का सबसे ज्यादा नुक्सान विभिन्न ई कॉमर्स कंपनियों ने लागत से भी कम मूल्य पर माल बेच कर और भारी डिस्काउंट देकर उपभोक्ताओं को बाज़ारों से दूर कर दिया है।

ये कंपनियां सीधे तौर पर केंद्र सरकार की एफडीआई नीति का खुला उल्लंघन करते हुए सरकार की नाक के नीचे धड्ड्ले से माल बेच रही हैं और अनेक बार सबूतों के साथ शिकायत करने के बावजूद भी अभी तक सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है जिससे इन कंपनियों के होंसले बुलंद हो गए है और पिछले सप्ताह ही एक फेस्टिवल सेल लगाने के बात ये कंपनियां अब एक बार फिर 12 अक्टूबर से फेस्टिवल सेल का दूसरा चरण शुरू कर रही हैं जो व्यापारियों की बची खुची आशाओं पर भी पानी फेर देगा ! पहली फेस्टिवल सेल के बाद इन कंपनियों ने अपनी बिक्री में 75 प्रतिशत के इजाफे और लगभग 50 प्रतिशत नए कस्टमर होने का दावा भी किया है।

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का कारोबार होता है और ऑनलाइन कंपनियों के कारण दिल्ली के विभिन्न बाज़ारों के व्यापारियों की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट हुई है ! अगली फेस्टिवल सेल के बाद ये आंकड़ा 50 से 60 प्रतिशत हो सकता है जो दिल्ली के सदियों पुराने व्यापार के लिए एक बड़ा धक्का साबित होगा।

श्री खंडेलवाल ने कहा की दिल्ली में पहले नवरात्र से 14 दिसंबर तक त्यौहार के सीजन का पहला चरण होता है और उसके बाद 14 जनवरी से अप्रैल -मई तक शादियों का सीजन होने के कारण व्यापार का दूसरा चरण रहता है जिससे गत वर्षों में व्यापारियों की बिक्री में बेहद इजाफा होता था लेकिन इस वर्ष व्यापारियों के सामने व्यापार के अस्तित्व का संकट ही खड़ा हो गया है जिसको लेकर व्यापारी बेहद चिंतित भी है। दिल्ली में लगभग 10 लाख व्यापारी हैं जिन पर 40 लाख लोगों की आजीविका निर्भर रहती है। दिल्ली से देश भर में माल जाता है और पडोसी राज्यों से लगभग 5 लाख व्यापारी सामान खरीदने के लिए दिल्ली रोज़ आते हैं।

श्री खंडेलवाल ने कहा की दिल्ली के प्रमुख बाजार चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, नया बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, सदर बाजार, करोल बाग़, कमला नगर, अशोक विहार, कनाट प्लेस, खान मार्किट, लाजपत नगर, सरोजिनी नगर, ग्रेटर कैलाश , राजौरी गार्डन, पीतमपुरा, विकास मार्ग, प्रीत विहार, शाहदरा, जगतपुरी आदि में जहाँ इन दिनों रौनक हुआ करती थी और दिवाली पर बाजार सजाये जाते थे, इस बार व्यापार में बेहद कमी के कारण व्यापारियों ने बाजार न सजाने का निर्णय लिया है।

श्री खंडेलवाल ने यह भी कहा की बाजार में नकद की तरलता का बेहद अभाव है क्योंकि लोगों के पास खरीदारी के लिए अतिरिक्त धन नहीं है वहीँ महीने के आखिरी दिनों में दिवाली, करवा चौथ, धनतेरस जैसे महतवपूर्ण त्यौहार इस वर्ष पड़ रहे हैं और तब ताकि लोगों की जेबें लगभग खाली हो जाती हैं और त्यौहार के लिए केवल जरूरी खरीदारी ही हो पाती है ! इसलिए भी इस बार बिक्री गिरने की काफी आशंका है।

यदि सरकार ने ऑनलाइन बिक्री पर अंकुश नहीं लगाया और बाजार में धन को नहीं डाला तो व्यापार की स्तिथि बेहद खराब हो जायेगी ! केवल दिल्ली ही नहीं अपितु कमोबेश देश के सभी राज्यों के बाज़ारों का यही हाल है।