लाडली योजना की समिक्षा करे सरकार, आवेदन में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएं : हरपाल राणा

  |    September 13th, 2020   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- दिल्ली सरकार के द्वारा वर्ष 2008 में लाडली योजना के तहत लड़कियों को जन्म से लेकर 12वीं पास करने तक कई चरणों में योजना को क्रियान्वित करके एक लाख राशि देने की योजना आरंभ की गई थी। लेकिन इस योजना के पीछे सरकार का एक छुपा हुआ एजेंडा भी था जिसका उद्देश्य यह था कि दिल्ली में अधिक से अधिक लड़की जन्म लें जिससे दिल्ली का लिंग अनुपात बढ़ाया जा सके।

इसके लिए सरकार ने लाडली योजना के आवेदन में यह अनिवार्य कर दिया कि चाहे परिवार दिल्ली का स्थाई निवासी हो या अनेकों वर्षों से दिल्ली में रह रहा हो उसकी बेटी को लाडली योजना का लाभ उस वक्त ही मिल सकता है जब बच्ची का जन्म दिल्ली में हुआ हो। जबकि अन्य योजनाओं में दिल्ली का 5 साल पहले का निवास प्रमाण के तौर पर राशन कार्ड, पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि होना अनिवार्य किया हुआ है साथ ही लाडली योजना के आवेदन में लिंग अनुपात बढ़ाने के लिए 5 साल की बजाय यह अवधि घटाकर 3 वर्ष कर दी गई।

 इससे दिल्ली का लिंग अनुपात तो भले ही बढ़ गया हो लेकिन इससे हजारों लड़कियों को लाडली योजना के हक से वंचित कर दिया गया।

योजना का लाभ लेने में उन माता-पिता को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है जिन्होंने किसी कारणवश, बीमारी के कारण या अपने मायके में बच्ची को जन्म दिया हो, क्योंकि उस बच्ची का प्रमाण पत्र जन्म के स्थान पर ही नियम अनुसार बनवाया जा सकता है अभिभावक अपनी बच्ची का दिल्ली का प्रमाण पत्र ना होने के कारण से दिल्ली में लाडली का आवेदन करने में असमर्थ हो जाते हैं इसके लिए बहुत से अभिभावक अपनी बच्ची को लाभ दिलवाने के लिए अनियमितताएं तक करने को मजबूर होते हैं और दिल्ली का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए झूठे कागजात देकर भ्रष्टाचार तक का सहारा लेकर दिल्ली का प्रमाण पत्र बनवाया जाता है लेकिन यह बहुत ही आश्चर्यचकित है कि सरकार इसके ऊपर ध्यान क्यों नहीं दे रही है जिससे दिल्ली की हर लाडली को योजना का लाभ मिल सके।

इस मुद्दे पर दिल्ली के समामाजिक कार्यकर्ता हरपाल राणा ने बताया कि गरीब परिवारों कि बच्चियों के लिए शुरू की गई इस योजना में भ्रष्टाचार आए दिन बढ़ रहा है। राणा ने बताया कि उन्होंने 2012 में संबंधित विभाग को इस योजना के संबंध में भेजे गए पत्र के जवाब  में कहां गया की “ऊपरी विभागीय अफसरों तक पहुंचाने में प्रयासरत हैं” और “2020 के जवाब में भी कहा गया कार्यवाही विचाराधीन है”। इसके साथ ही दोनों पत्रों के जवाब में यह तो कहा गया कि आपका सुझाव, प्रयास प्रशंसनीय हैं, सराहनीय है। लेकिन मेरे द्वारा दिए गए सुझावों पर बीते 8 वर्षों में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे साबित होता है कि सरकारी विभागों की लापरवाही का यह रवैया है सरकार की अन्य योजनाओं के बारे में कितना गंभीर होगा।

हरपाल राणा ने कहाकि दिल्ली सरकार यदि सही मायने में लडली योजना का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना चाहती है तो इस योजना की समीक्षा कर लाडली योजना जन्म प्रमाण पत्र की अनियमितताओं को दूर करें, नियमों के कारण लड़कियों के अभिभावकों आरही परेशानियों को समझें और लोगों को इस योजना के लाभ के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने पर अंकुश लगाएं।