बिना प्रिंसिपल के चल रहे है दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेज

  |    January 8th, 2020   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में खाली पड़े प्रिंसिपलों के पदों व सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति किए जाने को लेकर विज्ञापन निकाले जा रहे हैं।इन कॉलेजों में पिछले 10 महीनों से गवर्निंग बॉडी नहीं है।मार्च 2019 के पहले सप्ताह में इन कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है ।दिल्ली सरकार की ओर से कॉलेजों में बनने वाली गवर्निंग बॉडी के नामों को दिल्ली विश्वविद्यालय को कई बार भेजा गया लेकिन कार्यकारी परिषद ने उसे आज तक पास नहीं किया जिससे पिछले 10 महीनों से इन कॉलेजों में ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी कार्य कर रही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन ‘ने बताया है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में लंबे समय से प्रिंसिपल पदों को नहीं भरा गया है।कुछ कॉलेजों में 5 साल और उससे अधिक समय तक कार्यवाहक/ओएसडी के रूप में कार्य करते हुए हो गए हैं जबकि यूजीसी रेगुलेशन के अंतर्गत स्थायी प्रिंसिपल का कार्यकाल 5 साल का होता है मगर ये प्रिंसिपल उससे ज्यादा समय तक अपने पदों पर बने हुए हैं मगर उनकी स्थायी नियुक्ति आज तक नहीं की गई। जबकि अधिकांश कॉलेजों ने अपने यहां प्रिंसिपल पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाले है।

प्रो. सुमन के अनुसार प्रिंसिपलों के पदों पर स्थायी नियुक्ति न होने से इन कॉलेजों में सहायक प्रोफ़ेसर की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है जबकि गैर शैक्षिक पदों पर नियुक्ति व पदोन्नति की जा रही है। लंबे समय से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां ना होने से 20 से अधिक कॉलेजों के प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं ।इन कॉलेजों में सबसे ज्यादा दिल्ली सरकार के कॉलेज है जहां पिछले 10 महीनों से बिना गवर्निंग बॉडी के चल रहे हैं हालांकि इनमें से कुछ में काम चलाऊ ट्रेंकेटिड गवर्निग बॉडी है,कुछ में तो दोनों ही नहीं है।

दिल्ली सरकार के अंतर्गत 28 कॉलेज आते हैं, इनमें नहीं है स्थायी प्रिंसिपल–श्री अरबिंदो कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज(सांध्य) मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज(सांध्य) सत्यवती कॉलेज, सत्यवती कॉलेज (सांध्य ),भगतसिंह कॉलेज ,भगतसिंह कॉलेज(सांध्य) श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, श्रद्धानंद कॉलेज, भारती कॉलेज, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, राजधानी कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, (कोर्ट में विचाराधीन है) गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज आदि है।इसके अतिरिक्त जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज(सांध्य) आर्यभट्ट कॉलेज के प्रिंसिपल को दो महीने का सेवा विस्तार दिया गया है।इसके अलावा दयालसिंह कॉलेज,मिरांडा हाउस कॉलेज और दौलतराम कॉलेज की प्रिंसिपल इसी महीने सेवानिवृत्त हो रही है।कालिंदी कॉलेज की प्रिंसिपल के कुलपति बनने पर पद खाली है।उन्होंने बताया है कि जिन कॉलेजों में प्रिंसिपल पदों पर इंटरव्यू नहीं हुए उन विज्ञापनों की समय सीमा दिसम्बर -2018 में समाप्त हो गई। इन कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के ना होने से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां ना हो पाई और न ही पद निकाले गए।

उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के अधिकांश कॉलेजों में लंबे समय से कुछ तो 5 साल या उससे अधिक से प्रिंसीपल के पद खाली पड़े हुए हैं ।इसी तरह से प्रिंसिपलों के पदों पर भी नियुक्ति ना होने से टीचिंग व नॉन टीचिंग की परमानेंट वेकेंसी नहीं निकाली गई ,कुछ ने निकाली है तो पूरा आरक्षण नहीं दिया गया है।लायब्रेरियन व प्रिंसिपलों के कारण लायब्रेरी में नॉन टीचिंग की नियुक्तियां भी नहीं हो पा रही है ।उन्होंने जल्द से जल्द लायब्रेरियन व कॉलेजों में प्रिंसिपलों की नियुक्ति चुनाव के बाद ही सरकार बनने के बाद गवर्निंग बॉडी में लोगों के नाम भेजे जाए।साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर चुनाव के समय नियुक्ति न करने संबंधी सर्कुलर भेजा जाए।यह सर्कुलर 28 कॉलेजों के प्रिंसिपलों को भी भेजा जाए ताकि प्रिंसिपल अपनी मनमानी न कर सके। उनका यह भी कहना है कि प्रिंसिपल पदों में आरक्षण ना देते हुए कॉलेज अपना विज्ञापन निकाल रहे हैं।

दिल्ली सरकार के कॉलेजों में 10 महीनों से नहीं गवर्निंग बॉडी–प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में 7 मार्च 2019 से गवर्निंग बॉडी नहीं है। डीयू की सुप्रीम बॉडी ईसी में दो बार गवर्निंग बॉडी का मामला आ चुका है लेकिन सरकार और विश्वविद्यालय के बीच खींचतान के कारण पिछले 10 महीनों से इन कॉलेजों में सरकार की गवर्निंग बॉडी नहीं है। उनका कहना है कि दिल्ली के चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद इन कॉलेजों में किसी तरह की स्थायी नियुक्ति न हो, तुरंत वाइस चांसलर को पत्र भेजे जिससे नियुक्तियों पर प्रतिबंध लग सके।चुनाव के बाद ही गवर्निंग बॉडी के सदस्यों के नाम भेजे जाए।