दिल्ली विश्वविद्यालय के विकासशील राज्य शोध केन्द्र में रजत जयंती समारोह व पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

  |    April 20th, 2018   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- दिल्ली विश्वविद्यालय के विकासशील राज्य शोध केन्द्र द्वारा अपना रजत जयंती समारोह मनाया गया। जिसमें भारत-इजरायल मैत्री सम्बन्धों को एक नयी ऊर्जा प्रदान करने का प्रयास किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में भारत में इजरायल के राजदूत डेनिएल कार्मोन की उपस्थिति में केन्द्र के प्रथम सेवक व निदेशक प्रो॰ सुनील के चौधरी द्वारा भारत तथा इजरायल के राजनीतिक दलों व दलीय प्रणाली पर लिखित पुस्तक “द चेंजिंग फेस ऑफ पार्टीज एंड पार्टी सिस्टम्स: ए स्टडी ऑफ इज़रायल एंड इंडिया” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति पद्मश्री प्रो॰ दिनेश सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के भूतपूर्व प्रमुख प्रो॰ एम पी सिंह तथा नेहरू स्मारक संग्रहालय व पुस्तकालय के निदेशक शक्ति सिन्हा उपस्थित रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा इस केन्द्र की स्थापना 20 अप्रैल 1993 को अंतःविषयक कार्यक्रम के अंतर्गत की गई थी। यह केन्द्र जुलाई 2015 से वर्तमान निदेशक प्रो॰ सुनील कुमार चौधरी के निर्देशन में शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर है। पुस्तक विमोचन के अवसर पर प्रो॰ सुनील कुमार चौधरी ने तेल अवीव विश्वद्यालय तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में वरिष्ठ शोधकर्त्ता के रूप में अपने प्रवास के दौरान प्राप्त किए गए अनुभवों को भी साझा किया जो इस पुस्तक की रचना में सहायक हुए। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय का राजनीति विज्ञान विभाग भारत ही नहीं पूरे विश्व में पहला ऐसा संस्थान है जिसने 2015 में अपने पाठ्यक्रम में इजरायल के समाज, राज्य तथा राजनीति के अध्ययन को एक पृथक विषय के रूप में सम्मिलित किया है।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित करते हुये मुख्य अतिथि माननीय डेनिएल कार्मोन ने कार्यक्रम में स्वयं की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डी सी आर सी का धन्यवाद व्यक्त किया। श्री कर्मोन ने कहा कि २०१४ में भारत में राजदूत के पद पर नियुक्त होने के बाद उन्होंने विकासवादी कूटनीति को ज्यादा महत्त्व देना प्रारम्भ किया है जो कि दोनों देशों के सम्बन्धों में एक महत्वपूर्ण पक्ष है। मुख्य अतिथि ने बताया कि एक देश के रूप में हम एक-दूसरे को रक्षा, कृषि, आर्थिक, जल आदि के क्षेत्र में सम्बन्धों के दायरे में ही जानते व समझते हैं, परन्तु इतिहास व परम्परा के दृष्टिकोण से इन दोनों देशों के सम्बन्धों को समझने में प्रो. सुनील कुमार चौधरी द्वारा लिखी गयी पुस्तक एक विशिष्ट स्रोत उपलब्ध कराती है। श्री कार्मोन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में इजरायल को एक पृथक विषय के रूप में पढ़ाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय को धन्यवाद दिया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो॰ दिनेश सिंह ने डीसीआरसी द्वारा शैक्षणिक व शोध के क्षेत्र में निरन्तर किये जा रहे सराहनीय कार्यों के लिए केन्द्र के निदेशक व अन्य सदस्यों को शुभकामनाएं प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत ने सदैव ही विश्व को अपने ज्ञान व परम्परा से प्रकाशमय किया है। श्री सिंह ने कहा कि इजरायल ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए स्वयं को विश्व मानचित्र में एक सफल राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।  एक गणितज्ञ होने के नाते उन्होंने राजनीति व गणित के बीच के सम्बन्धों को स्पष्ट करते हुए गणित के क्षेत्र में इजरायल के योगदान को भी बताया।

विशिष्ट अतिथि शक्ति सिन्हा ने प्रो. सुनील कुमार चौधरी द्वारा शैक्षणिक व शोध के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताया। मुख्य वक्ता, प्रो॰ एम पी सिंह ने भारत व इजरायल के उभरते संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में  ये दोनों पंथनिरपेक्ष देश कूटनीतिक रूप से एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में इजरायल की दलीय व्यवस्था पर यह अपने प्रकार का पहला सफल प्रयास है।

इस अवसर पर केन्द्र के 29 नवरत्न सदस्यों (फैलो) को भी अतिथियों द्वारा शुभकामना स्वरुप स्मारिका प्रदान की गई।

प्रथम सेवक के रूप में प्रो॰ सुनील कुमार चौधरी द्वारा डीसीआरसी परिवार के सभी सदस्यों के समक्ष शैक्षणिक व सार्वजनिक जीवन में नैतिकता व सत्यनिष्ठा के उच्च मानदंडों को उदाहरण के रूप में स्थापित किया गया है। निदेशक के रूप में उनके द्वारा केन्द्र में नियमित रूप से मासिक व्याख्यानों, गोष्ठियों, सम्मेलनों तथा कार्यशालाओं का प्रारम्भ किया गया। समीक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों तथा दिल्ली नगर निगम चुनावों के विश्लेषण में अपनी अभूतपूर्व सफलता के साथ केन्द्र ने समकालीन शैक्षणिक परिदृश्य में प्रमुख स्थान प्राप्त किया है।

कार्यक्रम में यूनेस्को में समाज-विज्ञान के भूतपूर्व प्रधान निदेशक, प्रसिद्ध समाज-वैज्ञानिक तथा प्रो॰ सुनील कुमार चौधरी आदि उपस्थित रहे।