दलित हजारों वर्षों से शोषित और वंचित रहे हैं : उदित राज

  |    December 27th, 2017   |   0

नई दिल्ली (भारती शर्मा)-अनुसूचित जाति,जनजाति पिछड़ा के संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान में आरक्षण बचाओ महा रैली का आयोजन किया गया। रैली में देश के विभिन्न राज्यों दिल्ली,उत्तरप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, केरल,कर्नाटक, तमिलनाडु,पंजाब, झारखण्ड, उड़ीसा, बिहार और राजस्थान आदि सेदलितों/आदिवासियों और पिछड़ों सहित लाखों की संख्यामें लोगों ने भाग लिया।

परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार निजी करण की आंडमें आरक्षण को समाप्त किये जाने के  प्रयास किया जा रहा है। पिछड़े और दलित हजारों वर्षों से शोषित और वंचित रहे हैं।आज हम आज़ाद भारत में रह रहे हैं लेकिन इन वर्गों के ज़िन्दगी में विशेष परिवर्तन नहीं हो सका है। यह दुर्भाग्य है कि भारत में सामाजिक स्तर पर ही नहीं बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी सर्वाधिक  अ-समानता है। जो अमीर हैंवह अमीर होते जा रहे हैं और बहुमत में लोग या तोबेरोजगार हैं या ठेके पर कम से कम वेतन पर काम कर रहे हैं। सरकारी विभाग में रेस लगी है कि रोजगार एवं काम को ठेका पर दे दिया जाये या आउटसोर्स कर दें। इसका सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर दलित/आदिवासी और पिछड़ों पर पड़ा है। कोई भी जनतांत्रिक सरकार हो यह मान कर चला जाता है उसका चरित्र कल्याणकारी होगा और प्राथमिकता सबसे ज्यादा अपने नागरिको को रोजगार देने की है।

डॉ. उदित राज ने विशाल रैली में बोलते हुए कहा किआरक्षण को विकास का अवरोध माना जाता है जबकि यहगलत है। मद्रास में आरक्षण 1921 में, मैसूर औरत्रिवान्कोर में 1935 और कोल्हापुर रियासत में 1902 मेंलागू हुआ और ये राज्य उत्तर भारत के राज्यों की तुलना मेंविकास के कई सूचकांक में आगे हैं। अब समय आ गया है कि तथा कथित सवर्ण भाई और बहन विचार करें कि हम भी उन्ही के समाज का हिस्सा हैं  जैसे अश्वेतों के साथ अमेरिकामें गोरों ने किया। इनकी विभिन्न क्षेत्रों में भागेदारी से देशप्रगति करेगा। यह कभी नहीं संभव है कि लगभग 20प्रतिशत आबादी की खरीद शक्ति के बल पर उत्पादन और मांग को बढाया जा सकता है। इन लोगों को आरक्षण दिया जाता है तो आय बढ़ेगी और क्रय शक्त। जब वस्तु और सेवाकी  मांग बढ़ेगी तब कुल घरेलु सकल में उछाल आएगा और व्यापारियों को भी फायदे होंगे। जो मेरिट की मिथ्या है कि आरक्षण से निकम्मापन का जन्म होता है वह गलत है |दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अश्वनी देश पाण्डेय नेअमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एकशोध किया किआरक्षण से सरकार में क्या असर पड़ता है तोपाया कि प्रतिकूल तो कतई नहीं लेकिन जहाँ दलित/आदिवासी कर्मचारी ज्यादा थे वहां उत्पादकता में इजाफा ही हुआ है। इस परिपेक्ष में यह बिलकुल उचित है कि निजीक्षेत्र में आरक्षण दिया जाए। डॉ. उदित राज ने संसद मेंनिजी क्षेत्र में आरक्षण के लिए प्राइवेट मेम्बर बिल पेशकिया है और सरकार से अनुरोध है कि उसे सरकारी बिल में परिवर्तित करके कानून बनाया जाये ताकि निजी क्षेत्र मेंआरक्षण दिया जा सके।