भारत की प्रगति में अभिशाप की तरह है महिलाओं पर अत्याचार : मोनिका अरोड़ा

  |    October 15th, 2017   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- ‘घरेलू हिंसा और महिलाओं के साथ होने वाला अत्याचार भारत की प्रगति और कीर्ति में अभिशाप की तरह हैं।` ये शब्द दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज (सांध्य) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहे।

उन्होंने माना कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता` की पहचान रखने वाले इस देश में स्त्री हमेशा वंदनीय रही है। लेकिन आज हमारे यहाँ लड़की का जन्म लेना ही एक चुनौती है और अगर जन्म हो भी गया तो मुस्कुराना, पढ़ना और समाज में अपनी पहचान बनाना उससे भी बड़ी चुनौती है।`

उपरोक्त कार्यक्रम विमेन डेवलपमेंट सेल द्वारा ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा` विषय पर आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम के दौरान मोनिका अरोड़ा का स्वागत करते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि ‘निश्चित रूप से समाज को इस प्रश्न पर विचार करना चाहिए कि घरेलु हिंसा हमारे देश में कितनी दुर्भाग्यपूर्ण है।

भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है, ऐसे में एक भी परिवार में स्त्री चाहे वह माँ हो, बहन हो, पत्नी हो.. हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि घर, जो जहाँ प्रेम, स्नेह, वात्सल्य और सुरक्षा का प्रतीक है वहां पर हिंसा कितनी दुर्भाग्यपूर्ण है।

‘सेल` की संयोजिका डॉ. रुक्मिणी ने सेल की उद्देश्यों पर बात करते हुए बताया कि कॉलेज की छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से इतना सशक्त बनाना कि वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर देश का नेतृत्व कर सकें और अबला की जगह सबला के रूप में स्त्रियों की नई इबारत लिख सकें।

इस कार्यक्रम में सेल के अन्य सदस्यों सोनिका नागपाल, केसांग भूटिया, श्रुति मिश्रा, डिम्पल गुप्ता के साथ-साथ कॉलेज के कई वरिष्ठ शिक्षक व विद्यार्थी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के अंत में कंसाग भूटिया ने उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद किया।