कोरोना महामारी में मारीजों केलिए मसीहा बनी आर.डब्लयू.ए. और संस्थाएं मरीजों को इलाज के साथ दे रही हैं बेहतर सुविधाएं

  |    July 18th, 2020   |   0

नई दिल्ली (राजेश शर्मा)- कोरोना महामारी से आज पूरी दुनिया जूझ रही है, सभी देशों की सरकारें परेशान हैं। अपने देश के नागरिकों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए भरपुर प्रयास जारी हैं। कोरोना संक्रमित मरीज को सब से अधिक जरूरत ऑकसीजन की होती है, क्योंकि कोरोना संक्रमण का वायरस सबसे अधिक मानव के स्वसन तंत्र को ही प्रभावित करता है।

लोकेश मुंजाल

अधिक स्थित बिगड़ने पर वेल्टीनेटर की आवश्यता होती है। जो हॉस्पीटलों में सीमित ही होते हैं, मौजूदा समय में भारत में भी मरीजों की संख्या इतनी बढ़ने लगी कि हॉस्पीटलों में वेल्टीनेटर की कमी आने लगी। वेल्टीनेटर ना मिलने पर मरीज की तबियत बिगड़ने से बुराहाल और फिर वेल्टीनेटर के आभआव में दम तोड़ते मरीजों ने सब को दु:खी करना शुरू किया।

भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में सरकारी स्तर पर किए जा रहे प्रयास जनता के लिए ना काफी साबित होते देख देश के समाज सेवी संगठनों व आर.डब्लयू.ए. ने कोरोना संक्रमित होने वाले मरीजों को आरंभिक दौर में कुछ राहत देने के उद्देश्य से अपनी निजि स्तर पर प्रयास करने शुरू किए।

सब से पहले दिल्ली के पश्चिम विहार जी-17 आर डब्लयूए फेडरेशन अध्यक्ष लोकेश मुंजाल ने अपने साथियों के सहयोग से कोरोना मरीजों के लिए निःशुल्क ऑकसीजन कंसंट्रेटर मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलबध कराना शुरू किया। लोकेश मुंजाल के अनुसार इस सेवा को शुरू किए एक महिने से अधिक हो चुका है अब तक जी-17 फेडरेशन अपने क्षेत्र के लगभग 74 कोरोना संक्रमित लोगों को ऑकसीजन कंसंट्रेटर मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर सुविधा उपलबध करा चुकी है, यह सुविधा अभी जारी है।

पश्चिम विहार जी-17 आर डब्लयूए फेडरेशन से प्रेरणा लेते हुए रोहिणी सेक्टर-9 की न्यू सरस्वती सोसाईटी आर.डब्लयू.ए. ने भी अपनी सोसाईटी में कोविड केयर सेंटर सुरू किया। यहां सोसायटी के कोरोना संक्रमित या लक्ष्ण होने वाले जरूरत मंद मरीज को डॉक्टर की सलाह पर बैड की सुविधा दी गई है। इस सेंटर की जिम्मेदारी संभाल रहे आर.डब्लयू.ए अध्यक्ष सचिन शर्मा ने बताया कि केयर सेंटर पर डॉक्टर, नर्स, दवाईयां, खाना तथा ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सभी जरूरी इंतजाम हैं। आपातकाल में एंबूलेंस बुलाने की भी सुविधा भी है। सचिन शर्मा ने बताया कि न्यू सरस्वती सोसाईटी में अब तक चार कोरोना संक्रमित मरीजों को दाखिल किया गया, जिसमें तीन स्वस्थ्य हो कर अपने घर जा चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति अभी हमारे सेंटर में दाखिल हैं। न्यू सरस्वती सोसाईटी की यह सुविधा अन्य जरूरतमंदों के लिए जारी रहेगी।

इसी प्रकार रोहिणी के आंतरिक्ष अपार्टमेंट तथा सेक्टर-14 के मिलनसार अपार्टमेंट भी आयसोलेशन सेंटर की शुरूआत की गई है, यहां भी जरूतमंद लोगों को निःशुल्क सेवाएं दी जा रही हैं।  

बवाना की श्री सुखमणी सोसायटी ने भी कोरोना पीडित मरीजों के लिए आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीमीटर के साथ निःशुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम किया है। श्री सुखमणी सोसायटी के सरदार तेजेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने सिलेंडर उपलबध कराने के लिए दिल्ली में बवाना, नरेला, कोंडली के अलावा सोनिपत तक के क्षेत्रों में आठ स्थान निश्चित किए हैं, जहां से मरीज के परिजन निःशुल्क ऑस्सीजन सिलेंडर ऑक्सिमीटर साथ ले सकते हैं, जरूरत पड़ने पर दूसरा सिलेंडर भी ले सकते हैं। लेकिन सिलेंडर खाली होने पर वापस देने की जिम्मेदारी निभानी होगी। सरदार तेजेंद्र सिंह ने कहाकि वो मानव भलाई के कार्यों में कभी पीछे नहीं रहेंगे श्री सुखमणी सोसायटी इससे पहले हैंड सेनेटाईजर, मास्क तथा काढा भी बांट चुकी है।

कोरोना महामारी के दौर में आर.डब्लयू.ए. तथा समाजिक संगठनों द्वारा जरूरतमंद कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बनाए जारहे कोविड केयर सेंटर, ऑक्सीजन सुविधा केंद्र से लोगों को काफी राहत मिली है।

पश्चिम विहार जी-17 आर डब्लयूए फेडरेशन के अध्यक्ष लोकेश मुंजाल ने बताया कि इन दिनों सरकारी हॉस्पीटलों में कोरोना मरीजों को जगह नहीं मिल रही है, वहीं प्रईवेट हॉस्पीटल वाले कोरोना के नाम पर 10 से 15 हजार रूपए प्रतिदिन का खर्च लेते हैं, जो एक सामान्य आदमी की पहुंच से दूर है। लेकिन जी-17 आर डब्लयूए फेडरेशन ने घर-घर ऑकसीजन पहुंचाने की पहल की जिसकी मुख्यमंत्री केजरीवाल, स्वास्थय मंत्री सितेंद्र जैन व गृह राज्यमंत्री द्वारा भूरी-भरी प्रशंसा की गई और सरकारी स्तर पर भी मरीजों के घर पर ही लोगों ऑकसीजन पहुंचाने की बात कही।

सचिन शर्मा का मानना है कि प्राईवेट हॉस्पीटलों के खर्च बहुत ज्यादा हैं, तो सरकारी हॉस्पीटलों बरती जाने वाली लापरवाही से लोगों में खौफ है। इस लिए मरीज वहां जाने में कतराते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ड़ॉक्टर की सलाह से घर में ही ऑक्सीजन का इंजाम करके इलाज करवाना बेहतर समझते हैं।

समाजिक स्तर पर किए गए इस प्रकार के प्रयासों से हस्पतालों पर मरीजों का दाब कम होगा, परिजनों में संक्रमण का खतरा कम होने के चांस होंगे। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मरीजों के घरों में निःशुल्क ऑक्सीजन सिलेंडर देने या स्थानीय स्तर पर आयशोलेशन सेंटर बनाने की मुहिम दिल्ली के पश्चिम विहार से शुरू कर रोहिणी, बवाना, मुबई से पंजाब तक जा पहुंची है। इस प्रकार की सुविधाएं मिलने से गरीब व जरूरत मंद लोगों को भी आज राहत मिलने लगी। इन सुविधाओं का लाभ उठा कर सैंकड़ों मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं।  

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