कामयाबी चाहिए तो छात्र समय के हर पल का सदुपयोग करें : रणवीर सिंह

  |    March 16th, 2018   |   0

सीपीजे लॉ कॉलेज में तीसरे राष्ट्रीय विधि महोत्सव-2018 का शानदार आगाज

नई दिल्ली(राजेश शर्मा)-  चंद्रप्रभु जैन कॉलेज ऑफर हॉयर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ (सीपीजे) नरेला के तत्वाधान में तृतीय राष्ट्रीय विधि महोत्सव-2018 का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वल से की गई। इस मौके पर दिल्ली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. रणवीर सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की वहीं प्रो.(डॉ) अफजल बानी भी समारोह के दौरान उपस्थित रहे।

संस्थान के चेयरमैन सुभाष जैन, जनरल सेक्रेटरी अभिषेक जैन, डायरेक्टर युगांक चर्तुर्वेदी एवं प्रिंसिपल वीके सिंह के द्वारा समस्त अतिथियों का स्वागत किया गया।

राष्ट्रीय विधि महोत्सव के उद्घाटन स्त्र को संबोधित करते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रणवीर सिंह ने कहा कि आईटी और लॉ के बीच सहज संबंध होना ही चाहिए, ताकि कानून क्षेत्र में तेजी से विकास हो। उन्होंने कहा कि आज देश में 250 लॉ कालेज हैं और 22 लॉ विश्वविद्यालय है, लेकिन अभी हमें इस क्षेत्र में बहुत कुछ परफोर्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं विदेशों में भी लॉ का अलग महत्व है। लॉ को मानव से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसके साथ ही उन्हेंने छात्रों से अपील की कि वो इस लॉ जैसे पेशे में आएं तो कठीन परिश्रम करें, जितनी अधिक परिश्रम करेंगे उनकी काबलियल भी उतनी ही होगी। जीवन में कामयाबी चाहिए तो छात्र समय के हर पल का सदुपयोग करें, क्योंकि बीता समय कभी नहीं आएगा।

इस मौके पर प्रो. डॉ. अफजल बानी ने कहा कि आज छात्रों को अपने अलग पहचाने बनाने की जरूरत है। युवा ही विश्व को दिशा दे सकते हैं। आप बुद्ध को देख सकते हैं। जिनके आइडिया और फिलोसफी को विश्व के कई देशों ने अपनाया। इस तरह से युवाओं को सीख लेने की जरूरत है।  प्रो. अनुराधा साईबाबा ने अपने संबोधन में कहा कि इंटरनेशनल हुमेनीटेरीयन लॉ आज की जरूरत है।

संस्थान के कॉरपोरेट डायरेक्टर युंगाक चतुर्वेदी ने भी माना कि विश्व में सबको न्याय दिलाना है तो, हेमेनीटेरीयन लॉ की आवश्यकता ज्यादा है।

इस विधि महोत्सव के दौरान पांच प्रमुख प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय सेमिनार, राष्ट्रीय मुताब न्यायालय, राष्ट्रीय प्रश्नोत्तरी,राष्ट्रीय कानूनी मसौदा और राष्ट्रीय ग्राहक परामर्श विषय थे। इस प्रतियोगिताओं में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों के छात्र छात्राओं, अनुसंधान विद्वानों, शिक्षाविदों, न्यायमूर्तियों एवं अधिवक्ताओं ने भाग लिया।