पुस्तक प्रमियों की बढ़ती भागीदारी से गुलज़ार है पुस्तक मेला

  |    January 10th, 2019   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)-प्रगति मैदान में चल रहे 26वें विश्व पुस्तक मेले में हर तरफ युवा-पीढ़ी को अपनी पसंदीदा पुस्तकों को ढूँढ़्ता देख तथा मेले में प्रतिदिन युवाओं के समूहों को पहुँचते देख अत्यंत प्रसन्न्ता का अनुभव हो रहा है। युवा हमारे देश का भविष्य हैं तथा युवाओं की पुस्तकों में बढ़ती रुचि देख आनंद का अनुभव होता है।
विदित हो कि हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य विश्वभर में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण निर्मित करना है। प्रगति मैदान में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेले के हाॅल सं. 12(ए) में हिंदी भाषा के प्रकाशकों के लगभग 240 स्टाॅल हैं जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। हिंदी भाषी पाठक अपनी भाषा की सोंधी महक से यहाँ अनायास ही खिंचे चले आ रहे हैं। इन प्रकाशकों में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास सहित साहित्य अकादेमी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारतीय ज्ञानपीठ, कबीर ज्ञान प्रकाशन केंद्र, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, गीता प्रेस, प्रकाशन संस्थान आदि शामिल हैं।
    बाल गतिविधियाँ
पुस्तक मेले में (हाॅल सं. 7 एच के पास हैंगर) विशेष रूप से बच्चों के लिए बने रचनात्मक बाल मंडप पर प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रम एवं गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। आज यहाँ कोशिश स्पेशल स्कूल के दिव्यांग बच्चों द्वारा ‘जंगल का महाराजा कौन‘ शीर्षक नाटिका प्रस्तुत की गई। बच्चों ने रंग-बिरंगी आकर्षक पोशाकों में अभिनय किया। नाटक के माध्यम से सभी बच्चों को ‘मित्रता के महत्व‘ के बारे में बताया गया।
इसके अतिरिक्त इस मंडप पर, माता दान कौर स्कूल से आए बच्चों ने ‘पर्यावरण संरक्षण‘ विषय पर आधारित नाटिका मंचन किया तथा वाइज़ एंड शाइन द्वारा ‘क्रोध/तनाव प्रबंधन पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।
साथ ही, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा ‘रेडियो कार्यक्रम एंव विज्ञापन गीत बनाना कार्यशाला‘ का आयोजन किया गया जिसमें कथावाचक जयश्री सेठी ने बच्चों को यह बताया कि रेडियो जिंगल किस प्रकार बनाई जाती हैं। उन्होंने बच्चों को विश्व पुस्तक मेला पर आधारित जिंगल बनाने को कहा जिसमें बच्चों ने अपने सृजनात्मक कौशल का प्रयोग कर ‘सुनो गौर से दुनिया वालों….सबसे आगे होगा अपना बुक फेयर‘ जैसे अनेक रोचक जिंगल बनाएँ। कार्यक्रम में एसएनएस फाउंडेशन, प्रथम बुक्स, दीप फाउंडेशन तथा कोशिश स्पेशल स्कूल से आए बच्चों ने भाग लिया।
थीम मंडप
आज इस मंडप पर ‘दिव्यांग बच्चों में पढ़ने की आदत बढ़ाना‘ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में एनसीईआरटी के प्रोफेसर एन.के.जंगीरा ने कहा कि केवल पाठ्य-पुस्तकें पढ़ना ही पठन की आदत को नहीं बढ़ाता है। वास्तव में अनुपूरक सामग्री बच्चों में पठन आदत को विकसित करने का कार्य करती है। परिचर्चा के अन्य वक्ताओं में एनसीईआरटी के शिक्षा विभाग की प्रोफेसर, अनुपम अहूजा और नेशनल एसोसिएशन फाॅर द ब्लाइंड की सुश्री शांता रंगराजन शामिल थीं।
साहित्यिक गतिविधियाँ
आॅथर्स काॅर्नर पर प्रकाशन विभाग द्वारा ‘बाल साहित्य और गेजेट्स में उलझे बाल पाठक‘ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डाॅ. सच्चिदानंद जोशी, प्रकाशन विभाग की महानिदेशक, डाॅ. साधना राउत, डाॅ. अखिलेश झा और सुश्री शमीमा सिद्दीकी उपस्थित थीं। इस अवसर पर बापू की वाणी, वेद-गाथा, हमारे समय में उपनिषद, शेखावटी की लोक संस्कृति, हार की खुशी, माँ का जन्मदिन, बाल महाभारत, चिल्ड्रेन्स विवेकानंद आदि पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
इसी मंच पर स्टोरीटेल द्वारा लेखक गीताश्री के उपन्यास ‘हसीनाबाद‘ का आॅडियो प्रारूप जारी किया गया। कार्यक्रम में किस्सागो हिमांशु बाजपेयी मौजूद थे जिन्होंने पाठकों को दास्तानगोई के बारे में बताया तथा अपने लिखे किस्से पाठकों के साथ साझा किए।
ऑथर्स कॉर्नर पर पुस्तक बर्ड्स इन डेल्ही पर चर्चा हुई। सत्र का आयोजन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा डी.के. पब्लिशर्स के सहयोग से किया गया। फोटोग्राफर और दिल्ली ट्रस्ट फाउंडेशन के सदस्य संजय तिवारी ने किताब के लेखक निखिल देवसर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक में पक्षियों की साधारण से लेकर दुर्लभ पाँच सौ प्रजातियों का वर्णन है। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि यदि आप पक्षियों से प्यार करते हैं, तो उन्हें उड़ने दें।