भगत‍ सिंह के विचार, संवेदना की दिशा को पहचानें : प्रो. अपूर्वानंद

  |    March 23rd, 2018   |   0

हिंदी विश्‍वविद्यालय में ‘शहीद भगत सिंह का राष्‍ट्र और हम’ विषय पर व्‍याख्‍यान

वर्धा  23 मार्च 2018(संवाददाता)- भगत सिंह के शहादत दिवस पर ‘शहीद भगत सिंह का राष्‍ट्र और हम’ विषय पर आयोजित व्‍याख्‍यान में दिल्ली विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि भगत सिंह के विचार और संवेदना की दिशा को पहचान कर हमें उनके विचारों की व्‍याख्‍या करनी चाहिए। भगत सिंह चीर तरुण और चीर युवा है । वे स्‍वेच्‍छा से फांसी तक बढ़े।

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के शिक्षक संघ की ओर से 23 मार्च को विवि के गालिब सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्‍यक्षता शिक्षक संघ के अध्‍यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने की। प्रो. अपूर्वानंद का परिचय सहायक प्रोफेसर डॉ. अमरेंद्र कुमार शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. अमित राय ने किया तथा आभार शिक्षक संघ के सदस्‍य डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी ने माना। कार्यक्रम में अध्‍यापक, अधिकारी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

प्रो. अपूर्वानंद विश्‍वविद्यालय के अकादमिक अधिकारी भी रहे हैं। उन्‍होंने अपने व्‍याख्‍यान की शुरूआत विश्‍वविद्यालय के विकास को लेकर की तथा अपने कार्यकाल के विद्यार्थियों का जिक्र किया। उन्‍होंने भगत सिंह के जीवन एवं कार्यों पर विस्‍तार से चर्चा करते हुए कहा कि 16 साल की उम्र में भगत सिंह घर से चल पड़े थे। उन्‍होंने जुलाई 1928 में किर्ति अखबार में लेख‍ लिखा जो ‘नए नेताओं के अलग-अलग विचार’ शीर्षक से छपा था। उनकी लेखन शैली और विचार करने की पद्धति और संवेदना प्रभावकारी थी। उनके विचार और संवेदना की दिशा को हमें पहचानना चाहिए। उन्‍होंने महात्‍मा गांधी और भगत सिंह के विचारों के संघर्ष और द्वैत पर भी भाष्‍य किया। भगत सिंह द्वारा ट्रेड कंफ्लीक्‍ट बिल के खिलाफ असेंब्‍ली में बम फेके जाने की घटना का उल्‍लेख करते हुए कहा कि प्रतिवाद के लिए उन्‍होंने ऐसा किया था और उसकी पूरी जिम्‍मेदारी उन्‍होंने उठाई थी। उन्‍होंने अकालतों का मंच के तौर पर इस्‍तेमाल किया और अपनी बात बेबाकी के साथ रखी। उनका यह फैसला ठंडे दिगाम से लिया गया फैसला था जिसकी कीमत उन्‍हें चुकानी पड़ी थी। प्रो. अपूर्वानंद ने भगत सिंह के मॉडर्न रिव्‍यू में प्रकाशित ‘इंकलाब जिंदाबाद’ लेख का जिक्र करते हुए उनकी लेखन शैली और सोच-विचार की पद्धति को रेखांकित किया।

अध्‍यक्षीय वक्‍तव्‍य में प्रो. मनोज कुमार कहा कि भगत सिंह को जानने के लिए दिमाग को खुला रखकर दृष्टि विकसित करने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने संपूर्ण गांधी वाड़़मय से महात्‍मा गांधी के पत्रों का संदर्भ लेकर भगत सिंह और गांधी के विचारों पर प्रकाश ड़ाला। कार्यक्रम में प्रो. अपूर्वानंद का स्‍वागत मानवविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र प्रताप यादव ने किया। व्‍याख्‍यान के बाद उनका विद्यार्थियों के साथ वार्तालाप कार्यक्रम हुआ जिसमें विद्यार्थियों ने वर्तमान संदर्भों के साथ-साथ शिक्षा की बदलती दिशाएं आदि विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं प्रकट की।