भागलपुर ने स्मार्ट सिटी बनने के अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बहुत तेजी से तरक्की की है

  |    May 29th, 2018   |   0

 नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)-  भागलपुर भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के आरंभ के साथ जिसमें भारत सरकार ने टिकाऊ, नागरिक-अनुकूल, और तकनीकी रूप से उन्नत शहर बनाने का लक्ष्य रखा है, इस योजना के अंतर्गत लिए गए हर शहर ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया को तेज कर दिया है ताकि शीघ्र ही परिवर्तन लाया जा सके| इन्हीं शहरों में एक शहर एक शांत शहर भागलपुर है जो दूसरे शहरों को प्रेरित कर रहा है अपने नागरिकों के द्वारा की गई पहल से।

इस शहर का नेतृत्व एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता कर रहा है जो भागलपुर शहर का उपमहापौर है,  इसी युवा ने शहर के नागरिकों को प्रेरित किया है कि वह स्मार्ट सिटी मिशन में भाग लें एवं अपने शहर की जिम्मेदारी उठाए। शहर की मूलभूत समस्याओं जैसे कि स्वच्छ एवं बेहतर  वातावरण जो कि अन्य शहरों की भी समस्या है,के लिए  श्रीमान राजेश वर्मा ने नागरिकों का आवाहन किया है कि वह स्वच्छ भागलपुर का भाग बनें और अपने शहर को स्वच्छ रखें|

स्वच्छ भागलपुर इसी युवा के द्वारा शुरू की गई पहल है जो कि एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट ड्राइव है ताकि शहर के रास्तों को और इसके घरों को साफ रखा जा सके और इसके साथ ही शहर के लोगों को वेस्ट डिस्पोजल एवं  इसके वाइल्डलाइफ, वातावरण और स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों के प्रति शिक्षित किया जा सके|  सॉलिड वेस्ट प्रबंधन स्मार्ट सिटी के लिए दिए जाने वाले प्रस्ताव का महत्वपूर्ण मापदंड है|

अपनी इस पहल के बारे में बात करते हुए राजेश वर्मा ने कहा ” नागरिकों को स्मार्ट सिटी बनाने की विकास प्रक्रिया में देर से शामिल नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें इस विकास प्रक्रिया की अग्रिम पंक्ति में रखना चाहिए ताकि वह अपने शहर के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सक। यह विदित है कि स्मार्ट सिटी भारतीय सरकार,राज्य सरकार और मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के अंतर्गत आती है परंतु नागरिकों की भागीदारी इस में अहम भूमिका निभा सकती है और इस प्रयास को बेहतर बना सकती है|  जो शहर सबके लिए है उसे सब के द्वारा ही बनाया जाना चाहिए”।

युवा सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा” हमें कुछ ऐसा तरीका अपनाना  चाहिए जिसमें नागरिक स्मार्ट सिटी बनाने की इस विकास प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बन सके | नागरिक इसमें निजी क्षेत्र सरकार एवं ज्ञान संस्थानों के साथ स्मार्ट सिटी बनाने के इस प्रयोजन में भागीदारी निभा सकते हैं| नागरिकों को इस परियोजना में भागीदार बनाने से ना सिर्फ इसका मूल्य बढ़ेगा बल्कि यह शहर की सरकार एवं मुंसिपल कॉरपोरेशन के दृष्टिकोण में अभिनव पहल एवं बेहतर संचार को बढ़ावा देंगे|”

राजेश वर्मा ने हाल ही में एक स्वच्छता अभियान की पहल की है जिसका नाम “रन फॉर रिवाइवल ऑफ़  चंपा” है,  इसमें स्वच्छता के लिए मैराथन एवं चंपानगर के नागरिकों को सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के बारे में शिक्षित करना शामिल है| उन्होंने कई पहल एक नागरिक के रूप में की है ना कि भागलपुर के उप महापौर के रूप में , उन्होंने भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध सिल्क उत्पादन केंद्र के संरक्षक के रूप में इसे साफ रखने की जिम्मेदारी ली है|  उन्होंने भागलपुर मुंसिपल कॉरपोरेशन के एक अधिकारी के रूप में उन  अधिकारियों से भी से सवाल भी पूछे हैं जो शहर में नालियों में निर्माण नालियों के निर्माण में होने वाली कमी जिसके फलस्वरूप नागरिकों को परेशानी हो रही है के लिए जिम्मेदार थे|

उन्होंने शहर के नागरिक के रूप में हाल ही में एक नई पहल की है जिससे अंतर्गत उन्होंने शहर में दरवाजे – दरवाजे जाकर डस्टबिन का वितरण किया है जिसका खर्चा उन्होंने अपनी जेब से दिया है|   राजेश वर्मा एवं उनकी टीम ने भागलपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 38 में हर घर में जाकर डस्टबिन का वितरण किया एवं सॉलिड वेस्ट डिस्पोजल के बारे में इन लोगों को शिक्षित किया यही नहीं उन्होंने यह भी तय किया कि घर-घर जाकर इस डस्टबिन में इकट्ठा हुए कचरे को संग्रहित किया जाए ,  उनकी इस पहल की बड़े पैमाने पर स्वीकार्यता एवं भागीदारी देखी गई है|

यह सारी पहल उनके द्वारा जमीन से जुड़ी विभिन्न पहलों एक बहुत छोटा सा हिस्सा है जो कि उन्होंने पूरे शहर में स्मार्ट सिटी से जुड़ी समस्याओं विषयों को ध्यान में रखते हुए की है| उचित मदद के साथ ये सारी पहल एक प्रभावी प्रभाव प्रदान कर सकती हैं,जो कि इस दिशा में आगे बढ़ रहे अन्य शहरों के लिए प्रेरणा बन सकता है|

एक युवा नागरिक की यह पहल जिसमें वह अपने शहर के नागरिकों  का अपने शहर के विकास के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना में हाथ बताने का आवाहन करता है, यह प्रयोग अपने आप में एक अद्वितीय उदाहरण बन सकता है जिसमें भारत के शहर एवं उनके नगरवासी विकास का मजबूत आधार बन सकते हैं और अपने शहरों को खुद ही स्मार्ट और स्वच्छ शहरों में तब्दील कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें विभिन्न वैश्विक तरीकों को अपनाने की जरूरत नहीं है  वह अपने आप में एक अद्वितीय उदाहरण बन सकते हैं|