10वें बाल संगम में बाल कलाकारों की घूम : चंगू मंगू की गाथा बनी आकर्षण का केंद्र

  |    November 7th, 2017   |   0

नई दिल्ली (आर.के.शर्मा)- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में चल रहे 10वें बाल संगम के चौथे दिन पारंपरिक कला समूहों और विशेष लोक थियेटर के कलाकारों ने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के बच्चां, उनके माता-पिता और वंचित बच्चों सहित काफी संख्या में यहां मौजूद दर्शकों के सामने अपने करामाती प्रदर्शन से अपना जादू बिखेरा। आज का दिन चंगु मंगू की गाथा (नौटंकी) के नाम रहा।

चंगू मंगू की गाथा (नौटंकी) उत्तर प्रदेश का एक लोक थियेटर है। यह नैतिकता पर आधारित एक परंपरागत कहानी है जो यह दर्षाता है कि परिवार में होने वाला संघर्ष किस प्रकार रक्त संबंधों के प्यार और स्नेह पर हावी हो जाता है, जिसके कारण करीबी लोगों और प्रियजनों की मौत हो जाती है। इस विशेष थिएटर प्रदर्शन को इलाहाबाद के मयूर रंगमंच के द्वारा प्रस्तुत किया गया। 1986 में स्थापित मयूर रंगमंच थियेटर गतिविधियों को कायम रखने के लिए लगातार काम कर रहा है।

एनएसडी परिसर में उनके प्रदर्शन के साथ इस महोत्सव की शोभा बढ़ाने वाले अन्य पारंपरिक समूहों में शामिल थे :

चोखरंग कल्चर एंड ड्रामा सोसायटी (त्रिपुरा) : यह 1986 में स्थापित त्रिपुरा राज्य में एक सांस्कृतिक संगठन है। यह त्रिपुरा के आदिवासी लोक नृत्यों की मूल कला को बढ़ावा दे रहा है और उनहें संरक्षित कर रहा है। संगठन ने त्रिपुरा के विभिन्न आदिवासी समुदायों के 100 से ज्यादा कलाकारों को प्रशिक्षित किया है।

लेबांग बुमनी : लेबांग बुमनी नृत्य में पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं। पुरुष बांस से बने क्लैपर्स का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें टोक्का कहा जाता है। जब महिलाएं खूबसूरत कीट लेबांग को पकड़ने के लिए रंगीन स्कार्फों को लहराते हुए नृत्य में शामिल होती हैं तो पुरुष क्लैपर्स को बजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि क्लैपर का लयबद्ध सुर लेबांग को उनके छिपने के स्थानों से बाहर निकलने के लिए आकर्शित करता है जिससे महिलाओं को उन्हें पकड़ने में सुविधा होती है। नृत्य के साथ बांसुरी, खांब, पर्क्यूशन उपकरण पांग, और सरिंदा जैसे संगीत वाद्ययंत्र भी बजाये जाते हैं। महिलाएं खुद को चांदी के हार, चूड़ी, कांस्य से बने कान और नाक के छल्ले से सजायी रहती हैं।

अपनी स्थापना के बाद से ही कला-ओ-कलाकार (संबलपुर, ओडिशा) प्राचीन और आधुनिक कला, संस्कृति और संगीत के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास कर रहा है, और इसे बढ़ावा देने और भावी पीढ़ी के लिए इसे संरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, यह ड्राइंग, पेंटिंग और ओडिसी नृत्य पर शिक्षा प्रदान करता है।