दिल्ली सरकार ने पर्यावरण शुल्क मामले में जनता के साथ धोखा किया : मनोज तिवारी

  |    November 17th, 2017   |   0

डीटीसी के पास डिपो की पर्याप्त भूमि व 9000 बसें पार्क की क्षमता , दिल्ली सरकार कर रही है जनता को गुमराह : विजेन्द्र गुप्ता

नई दिल्ली(भारती शर्मा)-दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने सुक्रवार को एक पत्रकार सममेलन में कहा है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एवं प्रदूषण को लेकर जहां एक ओर दिल्ली की जनता को गुमराह एवं उपराज्यपाल से टकराव उत्पन्न करती रही है वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अवहेलना करती रही है।
तिवारी ने कहा है कि 20 अक्टूबर, 2015 को दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार एक अधिसूचना जारी कर दिल्ली में घुसने वाले सभी माल वाहक वाहनों पर पर्यावरण शुल्क लगाया था और इस पैसे का हर तिमाही के हिसाब से सर्वोच्च न्यायालय को हिसाब देना था।
तिवारी ने कहा कि साथ ही इस पैसे का उपयोग सरकार को दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुचारू करना, सड़कों की सफाई एवं सुधार में उपयोग करना था पर अरविन्द केजरीवाल सरकार ने न तो सर्वोच्च न्यायालय को कभी कोई हिसाब दिया और न ही दिल्ली की सार्वजनिक व्यवस्था एवं सड़कों के सुधार के लिए कुछ किया।
तिवारी ने घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी इस पर्यावरण शुल्क के मामले में केजरीवाल सरकार द्वारा जनता एवं सर्वोच्च न्यायालय दोनों के साथ किये धोखे के मामले को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठायेगी और हम इसके लिए एक अवमानना याचिका माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेंगे।
भाजपा नेताओं ने कहा कि सत्ता में आने के तुरन्त बाद से अरविन्द केजरीवाल सरकार की मंशा दिल्ली की बस सेवा के निजीकरण की थी। सरकार ने प्रीमियम एप बस सेवा के नाम पर निजीकरण के प्रस्ताव का प्रयास भी किया था जिसे भारतीय जनता पार्टी के कड़े विरोध के चलते सरकार को वापस लेना पड़ा था।  उसके बाद से केजरीवाल सरकार ने अनेक बार बसें खरीदने की घोषणायें की पर नई बसें आना तो दूर डी.टी.सी. का चालू बस बेड़ा भी घट गया है।  साथ ही डी.टी.सी. के कर्मचारी अपने वेतन पाने तक के लिए परेशान हैं और सरकार सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए डी.टी.सी. को आर्थिक जंजाल की ओर धकेल रही है।  डी.टी.सी. के बस डिपों में भारी अव्यवस्था है, दिल्ली देहात के चार बस डिपो घुम्मनहेड़ा, दिचाऊ कलां, नरेला, बवाना में लगभग 1500 बसें खड़ी करने का स्थान हैं लेकिन वहां पर 163 बसें ही खड़ी हो रही हैं।
विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में डी.टी.सी. व क्लस्टर बसों को मिलाकर बसों की कुल संख्या 5,500 है व सरकार के पास वर्तमान में 260 एकड़ क्षेत्र में 7,500 बसें पार्क करने की सुविधा उपलब्ध है।
गुप्ता ने कहा कि यदि दिल्ली सरकार अपनी कागजी योजना के अनुसार 2,000 नई बसें खरीदने में सफल रहती है तो यह बसें दिसम्बर 2018 तक ही सड़कों पर उपलब्ध हो पाएंगी।  इन 2,000 नई बसों के लिए भी डी.टी.सी. के वर्तमान डिपो में ही बसों की पार्किंग के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।
इसके अलावा दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा दिल्ली सरकार को रोहिणी में बस डिपो के लिए 32 एकड़ और भूमि उपलब्ध करवाई जा रही है। साथ ही द्वारका एवं रानी खेड़ा में बस डिपो के लिए भूमि आबंटित है पर केजरीवाल सरकार ने गत एक साल में कोई काम प्रारम्भ नहीं किया है।  जिससे 1,000 और बसों की पार्किंग के लिए व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। इस प्रकार सरकार के पास 9,000 बसों की पार्किंग के लिए प्रर्याप्त पार्किंग उपलब्ध है। केजरीवाल सरकार द्वारा बस डिपो उपलब्ध न होने की बात एवं 132 एकड़ भूमि की मांग केवल जनता का ध्यान प्रदूषण की समस्या से भटकाने के लिए एक छलावा मात्र है।