अंबेडकर की 129वीं जयंती पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में आंबेडकर के अनेक अनछुए पहलुओं पर लाइव व्याख्यान

  |    April 15th, 2020   |   0

वर्धा(संवाददाता)- भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 129 वीं जयंती पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल और प्रति कुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अभिवादन किया।

माल्यार्पण के बाद कुलपति प्रो. शुक्ल ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी, बिहार को फेसबुक के माध्यम से ‘डॉ अंबेडकर का नवबौद्ध आन्दोलन : देश के लिए दार्शनिक आधार’ विषय पर  संबोधित किया. उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर विविध आयामों के व्यक्ति हैं,  उनके व्यक्तित्व का समेकित आकलन करना संभव नहीं है. वे एक दार्शनिक के साथ – साथ 20 वीं सदी के धर्मोपदेशक है।

अनेक बाधाओं से भरे जीवन में डॉ अंबेडकर ने ज्ञानार्जन से समस्त समाज के उदय का रास्ता बनाया और जीवनपर्यंत संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कहा कि सन 1935 में डॉ अंबेडकर ने हिंदू धर्म को छोड़ने का मन बनाया और सन 1956 में बौद्ध धम्म का रास्ता अपनाया।

प्रो. शुक्ल ने कहा कि डॉ अंबेडकर संस्कृत पढ़ना चाहते थे परंतु उन्हें संस्कृत पढ़ने से मना कर दिया और वही बाबासाहेब है जिन्होंने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव लाया था. डॉ अंबेडकर हिंदू कोड बिल के माध्यम से सांस्कृतिक एकिकरण चाहते थे। वे एक कालजयी विचारक थे और इस युग के बोधिसत्व भी। अपने एक घंटे के लाइव व्याख्यान में प्रो. शुक्ल ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला।