अभिमंच साहित्य सभा के अभिकाव्य- 2019 में 51 कवियों ने बिखेरी इंद्रधनुषीय छटा

  |    December 2nd, 2019   |   0

नई दिल्ली (संवाददाता)- दिल्ली के हिन्दी भवन में अभिमंच साहित्य सभा ने अभिकाव्य 2019 का सफल आयोजन किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न कोने से पधारे 51 कवियों ने कार्यक्रम में इंद्रधनुषीय छठा बिखेरी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित।

कार्यक्रम में वी एल मीडिया सोलूशन्स द्वारा प्रकाशित साझा काव्य संग्रह कहकशाँ का विमोचन भी किया गया जिसमे 17 ग़ज़लकारों की रचनायें सम्मिलित है। इस पुस्तक का संपादन डॉ गुरविन्दर बांगा, दिलदार देहलवी, पियूष कांति एंव मयंक राजेश ने किया है। अभिमंच ने साहित्य और समाज के विशेष प्रतिभाओं को विभिन्न पुरस्कारों से पुरस्कृत किया।

नवगीत विधा के पुरोधा डॉ इंदीवर को दिनकर सम्मान, वरिष्ठ ग़ज़लकार देवेंद्र मांझी को ग़ालिब सम्मान उपन्यास कार सन्दीप तोमर को प्रेमचन्द सम्मान, कुलदीप मक्कड़ को अभिमंच साहित्य सम्मान, डॉ तोषेन्द्र द्विवेदी को विद्या सम्मान एवं राहुल बंसल को सामाजिक सरोकार सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ गुरविन्दर बांगा, डॉ उमेश पाठक, एवं आयुषी सिंह ने किया। कार्यक्रम के आयोजक नित्यानन्द तिवारी ने अपने स्वागत सम्बोधन में अभिकाव्य के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि अभिमंच साहित्य को समर्पित एक ऐसी संस्था है जहाँ नवोदित प्रतिभाओं को अवसर प्रदान किया जाता है।

कार्यक्रम में  विनय सक्सेना, नम्रता राय, प्रशंसा पंवार, राजीव रंजन द्विवेदी, प्रोफेसर धनंजय जोशी, मयंक आर्यन, प्रतीक, कवीता, विनोद मैरता, कुलदीप मक्कड़, मार्टिन फैसल, डॉ श्यामलेंदु रंजन, जयदीप सिंह, सिद्धार्थ सिंह, शिव कुमार सिंह, डॉ दमयंती शर्मा, वंदना गोयल, डॉ गुरविन्दर बांगा, डी.पी. सिंह, नंदिनी सिंह, मनोज कामदेव, जगदीश मीणा, इंद्रजीत सुकुमा, निशि शर्मा, रामकिशोर उपाध्याय, पुष्पलता सिंह, डॉ अनुराधा पाण्डेय, इंदु मिश्रा, ज्योति राठौर, ममता लड़ीवाल, मयंक राजेश, शाहिद मिर्ज़ा शाहिद, सत्यवान सत्य, पीयूष कान्ति, दिलदार देहलवी, सर्वत जमाल, सईद फैजुदीन, अशोक अग्रवाल जगधारी, सैफ अजहर, फैज़ बदायूंनी एवं अन्य कवियों ने कविता पाठ किया।

कार्यक्रम तीन सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम का पहला सत्र नवोदित कवियों को समर्पित था, दूसरा सत्र ग़ज़लकारों को, जबकि तीसरे सत्र में हिंदी के वरिष्ठ कवियों ने कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वरिष्ठ वक्ताओं, डॉ इंदीवर पाण्डेय, देवेन्द्र मांझी, डॉ दमयंती शर्मा, शाहिद मिर्ज़ा शाहिद, डॉ वी सावित्री कुमार, डॉ बी एन मिश्रा आदि ने लेखन के गुर सिखाया।