आईकन-2015 अंतरराट्रीय कान्फ्रेंस में 500 से ज़्यादा फैमिली फीज़ीशियन हुए शामिल

  |    July 26th, 2015   |   144

नई दिल्ली (आर.के. शर्मा)- आईकन 2015 का शुभारंभ करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राश्ट्रीय अध्यक्ष पदम्श्री डॉ. ए मारतंड पिल्लई और पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने कहा, श्फैमिली फीज़ीषियन समाज की रीढ़ की हड्डी हैं। सरकार ने हाल ही में जो मेडिकल पोस्ट-ग्रेजुएट सीटों की संख्या बढ़ाने और उन्हें एमबीबीएस सीटों के बराबर मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है, यह आगे चल कर समाज को नुकसान ही पहुंचाएगा। हमें विषेशज्ञों से ज़्यादा फैमिली फिज़ीशियन्स की आवष्यकता है। अगर सरकार पोस्ट ग्रेजुएट सीटों में बढ़ोतरी करना चाहती है तो यह बढ़ोतरी फैमिली मेडिसन में की जानी चाहिए।

डॉ केतन देसाई आरेशन, आईएमए कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टीशनर के चीफ पैटरन डॉ एस अरुलरहाज ने कहा कि 90 प्रतिशत बीमारियों में विशेषज्ञ सलाह की ज़रूरत नहीं होती। फैमिली फीजि़शियन इनका इलाज कर सकता है। आईएमएसीजीपी के डीन डॉ ई प्रभावति और डीन इलैक्ट डॉ वीके मोंगा ने कहा कि आईएमए के सदस्यों द्वारा चलाए जा रहे छोटे मेडिकल संस्थानों को चाहिए कि वह लोगों को किफायती इलाज और सेवाएं प्रदान करें।

यूपी षाखा के अध्यक्ष डॉ शरद अग्रवाल, आईएमएसीजीपी के ऑनरेरी सेक्रेटरी डॉ ए राजा राजेश्वर और आईकन 2015 के ऑर्गेनाईजिंग सेक्रेटरी डॉ बीबी वधवा ने कहा कि फैमिली फिजि़षियन का जिम्मेदारी सिर्फ लोगों का इलाज करना ही नहीं है, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उन्हे सही मेडिकल केंद्र में भेजना भी है। उन्हें अपने उन मरीज़ों को जो आर्थिक तौर पर इलाज करवाने में सक्षम नहीं हैं उन्हें उन हस्पतालों के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए जहां मुफ्त और कम खर्च में इलाज होता है।

श्रीलंका के डॉ पृथी विजेगूनवार्ड देने, अकेडमी ऑफ फैमिली फीजि़शियन्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ रमन कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ एनके ग्रोवर समर्पित भाशण देते हुए डॉ विवेका कुमार और डॉ बीसी छपरवाल समर्पित भाषण देते हुए डॉ रजनीष मल्होत्रा ने कहा कि दिल की बीमारियों के इलाज में भारत सबसे आगे है। देश के ज़्यादातर दिल के रोगों के निजी हस्पताल, जिनमें उच्च स्तर की दिल की बीमारी संबंधी सेवाएं देश में 20 प्रतिशत लागत पर उपलब्ध हैं, वह मरीज़ों के लाखों डॉलर बचा रहे हैं। आईएमएसीजीपी के डीन डॉ ई प्रभावति ने अपने वक्तव्य में पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंडरोम से पीडि़त युवतियों का दवाओं से इलाज करने से पहले खान-पान नियंत्रण और व्यायम को अपनाने पर ज़ोर दिया।